ट्रंप की ईरान को दो-टूक: परमाणु समझौते में जल्दबाजी नहीं, शर्तें न मानीं तो सैन्य कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 मई 2026 को व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि वे मिडटर्म चुनावों के राजनीतिक दबाव में आकर ईरान के साथ परमाणु समझौते में कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चल रही वार्ता से अमेरिका की शर्तों के अनुरूप नतीजा नहीं निकला, तो वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई के विकल्प के लिए पूरी तरह तैयार है।
मिडटर्म दबाव को ट्रंप ने किया खारिज
ट्रंप ने कैबिनेट बैठक में कहा कि ईरान को यह उम्मीद थी कि आने वाले मिडटर्म चुनावों का दबाव अमेरिकी वार्ता की स्थिति को कमज़ोर कर देगा। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, 'उन्हें लगा था कि वे मुझसे ज़्यादा इंतजार करवा लेंगे, लेकिन मुझे मिडटर्म चुनावों की कोई परवाह नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता के कई दौर पूरे हो चुके हैं और दोनों पक्षों के बीच अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बनी है।
प्रतिबंध राहत पर ट्रंप का सख्त रुख
पीबीएस न्यूज़ के साथ एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि क्या मौजूदा ढाँचे के तहत ईरान को अपने उच्च-संवर्धित यूरेनियम भंडार छोड़ने के बदले प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी। ट्रंप ने स्पष्ट जवाब दिया, 'नहीं, बिल्कुल नहीं। कोई प्रतिबंध राहत नहीं।' इसके अलावा कैबिनेट बैठक में भी उन्होंने दोहराया कि ईरान को उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार छोड़ने के एवज़ में किसी भी प्रकार की प्रतिबंध राहत नहीं मिलेगी।
ईरानी मीडिया के 'ड्राफ्ट समझौते' को व्हाइट हाउस ने नकारा
इससे पहले बुधवार को व्हाइट हाउस ने ईरानी मीडिया में प्रकाशित उस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें एक कथित ड्राफ्ट समझौते का उल्लेख था। ईरान के सरकारी चैनल आईआरआईबी टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, उस ड्राफ्ट में ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अमेरिकी सेना हटाने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने जैसे प्रावधान शामिल थे। व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को 'पूरी तरह मनगढ़ंत' करार दिया।
सैन्य विकल्प की खुली चेतावनी
ट्रंप ने कैबिनेट बैठक में कहा कि अमेरिका अभी चर्चा में चल रही शर्तों से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा, 'उम्मीद है हम इससे संतुष्ट हो जाएंगे। नहीं तो हमें काम पूरा करना पड़ेगा।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के संदर्भ में सैन्य कार्रवाई का खुलकर उल्लेख किया हो — यह उनकी 'अधिकतम दबाव' नीति का हिस्सा रहा है।
आगे क्या होगा
अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता के अगले दौर की तारीख अभी तय नहीं हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप के इस बयान के बाद वार्ता की राह और कठिन हो सकती है। यह देखना अहम होगा कि ईरान इन शर्तों पर किस हद तक लचीलापन दिखाता है और क्या कोई मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच की खाई पाटने में सफल होता है।