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ट्रंप की सऊदी अरब से सिविल न्यूक्लियर डील: अब्राहम समझौते में शामिल होना अनिवार्य शर्त

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ट्रंप की सऊदी अरब से सिविल न्यूक्लियर डील: अब्राहम समझौते में शामिल होना अनिवार्य शर्त

सारांश

ट्रंप ने सऊदी अरब से सिविल न्यूक्लियर डील को अब्राहम समझौते की सदस्यता से सीधे जोड़ दिया है — यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देते हुए, लेकिन आईएईए की अचानक-निरीक्षण शर्त हटाकर। साथ ही ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को युद्ध अपराधों के आदेश न मानने की खुली चेतावनी दी।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 23 जुलाई को कहा कि सऊदी अरब से सिविल न्यूक्लियर डील अब्राहम समझौते में शामिल होने पर निर्भर करेगी।
प्रस्तावित डील में सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन और परमाणु रिएक्टर निर्माण की अनुमति मिलेगी।
आईएईए के अचानक निरीक्षण की शर्त इस समझौते में शामिल नहीं — जो ईरान के मामले में अनिवार्य मानी जाती थी।
यूएई ने 2009 में यूरेनियम संवर्धन छोड़ने पर सहमति दी थी; सऊदी के लिए शर्तें अधिक उदार हैं।
ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने अमेरिकी सैनिकों को नागरिक ठिकानों पर हमले के आदेश न मानने की चेतावनी दी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 जुलाई को स्पष्ट किया कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच प्रस्तावित सिविल न्यूक्लियर डील तभी संभव होगी, जब सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल होने पर सहमति दे। यह बयान ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दिया, जो मध्य-पूर्व में परमाणु कूटनीति की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।

डील की शर्तें और दायरा

ट्रंप ने लिखा, 'अमेरिका असैन्य परमाणु सुविधाओं का विरोध नहीं करता और प्रस्तावित समझौता केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होगा। यह वही मॉडल है, जैसा ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अन्य देशों के पास पहले से मौजूद है।' प्रस्तावित समझौते के तहत सऊदी अरब को अमेरिकी तकनीक की सहायता से परमाणु रिएक्टर बनाने और यूरेनियम संवर्धन की अनुमति दी जाएगी।

गौरतलब है कि इस समझौते में संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) द्वारा अचानक निरीक्षण की वह शर्त शामिल नहीं है, जिसे अमेरिका पहले ईरान के संदर्भ में अनिवार्य मानता रहा है — यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत अंतर है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह परमाणु समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के दौरान भी चर्चा का विषय रहा था। तुलनात्मक रूप से, वर्ष 2009 में अमेरिका के साथ हुए समझौते में यूएई ने यूरेनियम संवर्धन और परमाणु अपशिष्ट के पुनर्प्रसंस्करण — दोनों गतिविधियाँ छोड़ने पर सहमति दी थी। सऊदी अरब के लिए प्रस्तावित शर्तें उससे कहीं अधिक उदार हैं।

विशेषज्ञों की चिंताएँ

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु अपशिष्ट पुनर्प्रसंस्करण जैसी तकनीकें शांतिपूर्ण उपयोग के साथ-साथ परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में भी इस्तेमाल की जा सकती हैं। इस दोहरे उपयोग की संभावना को लेकर अप्रसार विशेषज्ञों ने गंभीर आपत्तियाँ जताई हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि 'किसी के लिए भी युद्ध अपराध मत कीजिए। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का हवाला देकर युद्ध अपराधों की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।' बाघेई ने चेतावनी दी कि नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले से जुड़े आदेशों का पालन करने वाले अमेरिकी सैनिक अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह हो सकते हैं।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और परमाणु कूटनीति के इर्द-गिर्द कई देशों की रणनीतिक स्थिति तेज़ी से बदल रही है।

आगे क्या होगा

अब्राहम समझौते को सऊदी अरब की स्वीकृति मिलना अभी भी अनिश्चित है, क्योंकि रियाद ने फिलिस्तीन मुद्दे पर ठोस प्रगति को किसी भी सामान्यीकरण की पूर्व-शर्त बताया है। ऐसे में सिविल न्यूक्लियर डील की राह कूटनीतिक रूप से जटिल बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें स्वयं तोड़ा है। अब्राहम समझौते को 'गाजर' की तरह इस्तेमाल करना कूटनीतिक रूप से चतुर दिख सकता है, लेकिन सऊदी अरब ने फिलिस्तीन मुद्दे पर ठोस प्रगति के बिना किसी भी सामान्यीकरण से इनकार किया है — जो इस पूरी शर्त को अनिश्चित बनाता है। ईरान की युद्ध अपराध चेतावनी इस भू-राजनीतिक तनाव में एक और परत जोड़ती है, जो संकेत देती है कि तेहरान इस परमाणु कूटनीति को अपने लिए सीधा खतरा मान रहा है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप की सऊदी अरब से सिविल न्यूक्लियर डील क्या है?
यह एक प्रस्तावित समझौता है जिसके तहत सऊदी अरब को अमेरिकी तकनीक से परमाणु रिएक्टर बनाने और यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलेगी। ट्रंप ने इसे केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बताया है, लेकिन इसमें आईएईए के अचानक निरीक्षण की शर्त शामिल नहीं है।
अब्राहम समझौते का इस डील से क्या संबंध है?
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि सिविल न्यूक्लियर डील तभी होगी जब सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल होगा — यानी इज़राइल के साथ सामान्यीकरण करेगा। यह डील को एक व्यापक कूटनीतिक शर्त से जोड़ता है।
यह डील यूएई के 2009 के परमाणु समझौते से कैसे अलग है?
2009 में यूएई ने यूरेनियम संवर्धन और परमाणु अपशिष्ट पुनर्प्रसंस्करण दोनों छोड़ने पर सहमति दी थी। सऊदी अरब के लिए प्रस्तावित डील में ये प्रतिबंध नहीं हैं, जिसे विशेषज्ञ अधिक उदार और जोखिमपूर्ण मानते हैं।
ईरान ने इस मामले पर क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने एक्स पर लिखा कि अमेरिकी सैनिकों को नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले के आदेश नहीं मानने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आदेशों का पालन करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
क्या यह परमाणु समझौता पहले भी चर्चा में रहा है?
हाँ, यह समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के दौरान भी विचाराधीन रहा था। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका-सऊदी परमाणु सहयोग की बात उठी हो।
राष्ट्र प्रेस
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