29 जुलाई 2026
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ट्रंप ने जेलेंस्की और नेतन्याहू से व्हाइट हाउस में की अलग-अलग बैठकें, यूक्रेन युद्ध और ईरान परमाणु कार्यक्रम पर मंथन

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ट्रंप ने जेलेंस्की और नेतन्याहू से व्हाइट हाउस में की अलग-अलग बैठकें, यूक्रेन युद्ध और ईरान परमाणु कार्यक्रम पर मंथन

सारांश

एक ही दिन में दो युद्ध मोर्चे, दो शीर्ष नेता और एक ओवल ऑफिस — ट्रंप की यह कूटनीतिक मैराथन दिखाती है कि अमेरिका एक साथ यूक्रेन में शांति और ईरान पर दबाव की दोहरी रणनीति पर चल रहा है, लेकिन इजरायल के साथ समन्वय में दरारें भी सतह पर आ रही हैं।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जुलाई 2025 को व्हाइट हाउस में जेलेंस्की और नेतन्याहू के साथ अलग-अलग बंद-दरवाज़ा बैठकें कीं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने दोनों बैठकों को 'सकारात्मक और अच्छी' बताया।
नेतन्याहू ने ईरान के कथित परमाणु स्थल 'पिकैक्स माउंटेन' से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की।
ट्रंप ने नेतन्याहू की योजना को पहले सार्वजनिक करने पर नाराज़गी जताई; ईरान को पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमले की चेतावनी दी।
जेलेंस्की ने पैट्रियट हवाई रक्षा प्रणालियों और यूक्रेन के लिए अमेरिकी मदद पर चर्चा की।
व्हाइट हाउस ने रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जुलाई 2025 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ क्रमशः अलग-अलग बंद-दरवाज़ा बैठकें कीं। यह कूटनीतिक मैराथन ऐसे नाज़ुक दौर में हुआ जब अमेरिका एक साथ दो सक्रिय युद्ध मोर्चों — रूस-यूक्रेन और ईरान संकट — पर कठिन निर्णयों का सामना कर रहा है।

बैठकों का क्रम और माहौल

जेलेंस्की सुबह करीब 9:40 बजे व्हाइट हाउस पहुँचे और वेस्ट विंग के एक साइड एंट्रेंस से अंदर गए। नेतन्याहू दोपहर करीब 12:25 बजे वहाँ से रवाना हुए। दोनों बैठकों में मीडिया को प्रवेश नहीं दिया गया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति जेलेंस्की और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ अपनी बैठकें पूरी कर ली हैं। दोनों बैठकें सकारात्मक और अच्छी रहीं।' इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रंप और नेतन्याहू की संयुक्त तस्वीरें जारी कीं, और एक इजरायली अधिकारी ने बैठक को 'बहुत सकारात्मक' बताया।

ईरान पर तनाव और खुफिया जानकारी

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप-नेतन्याहू बैठक में ईरान के साथ युद्ध, लेबनान से जुड़ी बातचीत और अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर चर्चा अपेक्षित थी। नेतन्याहू से यह भी उम्मीद थी कि वे ट्रंप को ईरान की कथित गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी देंगे — जिसमें 'पिकैक्स माउंटेन' नामक एक भूमिगत स्थल भी शामिल था, जिसे कथित तौर पर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़ा जाता है।

हालाँकि, ट्रंप इस बात से नाराज़ दिखे कि नेतन्याहू ने अपनी योजना पहले ही सार्वजनिक कर दी थी। फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'मैंने सुना कि नेतन्याहू ने इसकी घोषणा कर दी। मैंने कहा, आप मुझे ही क्यों नहीं बता देते? इसे पूरी दुनिया को बताने की क्या ज़रूरत थी?' यह टिप्पणी दोनों सहयोगी देशों के बीच रणनीतिक समन्वय की सीमाओं को उजागर करती है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने सोमवार को स्वीकार किया था कि अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान नीति पर 'थोड़ा अंतर' है, लेकिन दोनों 'काफी करीब' हैं। मंगलवार को ट्रंप ने फिर ईरान को चेतावनी दी कि यदि तेहरान किसी समझौते पर नहीं पहुँचता, तो अमेरिका पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे ठिकानों पर हमला कर सकता है।

जेलेंस्की की प्राथमिकताएँ और यूक्रेन की उम्मीदें

जेलेंस्की वॉशिंगटन इस उम्मीद के साथ पहुँचे थे कि रूस पर प्रतिबंधों, ड्रोन समझौते, पैट्रियट हवाई रक्षा प्रणालियों और शांति वार्ता में प्रगति पर सहमति बन सकेगी। बैठक के बाद जेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने ट्रंप के साथ हवाई सुरक्षा प्रणालियों और नई कूटनीतिक कोशिशों पर विस्तार से चर्चा की। उनके अमेरिकी सांसदों से मिलने और पूरे सीनेट की एक बैठक को संबोधित करने की भी उम्मीद थी।

व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा, 'राष्ट्रपति और उनकी टीम रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म कराने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्हें अब भी उम्मीद है कि आखिरकार शांति समझौता हो जाएगा।'

व्यापक कूटनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विदेश नीति दो भिन्न मोर्चों पर एक साथ दबाव में है। एक तरफ यूक्रेन युद्ध में रूस के साथ संभावित शांति वार्ता की जटिलताएँ हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व की अस्थिरता। एक ही दिन में दो परस्पर जुड़े लेकिन अलग-अलग संकटों पर शीर्ष नेताओं की बंद-दरवाज़ा बैठकें ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक प्राथमिकताओं की जटिलता को दर्शाती हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और यूक्रेन — तीनों की अगली कूटनीतिक चाल पर दुनिया की नज़र टिकी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नेतन्याहू की योजना के सार्वजनिक खुलासे पर ट्रंप की खुली नाराज़गी बताती है कि अमेरिका-इजरायल समन्वय उतना निर्बाध नहीं है जितना दिखता है। यूक्रेन के लिए ट्रंप की 'शांति की उम्मीद' और ईरान को हमले की धमकी — ये दोनों एक साथ टिकाऊ नहीं हो सकते, क्योंकि एक मोर्चे पर आक्रामकता दूसरे पर वार्ता की विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है। मुख्यधारा की कवरेज बैठकों के 'सकारात्मक' रहने पर रुक जाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि इन बंद दरवाज़ों के पीछे हुई बातों का ज़मीनी असर कब और कैसे दिखेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने जेलेंस्की और नेतन्याहू के साथ व्हाइट हाउस में किस पर बातचीत की?
ट्रंप ने 29 जुलाई 2025 को ओवल ऑफिस में जेलेंस्की के साथ यूक्रेन के लिए अमेरिकी मदद, पैट्रियट हवाई रक्षा प्रणालियों और रूस के साथ शांति वार्ता पर चर्चा की। नेतन्याहू के साथ बैठक में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, लेबनान वार्ता और अब्राहम समझौते पर मंथन हुआ।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ईरान नीति पर मतभेद क्यों सामने आए?
ट्रंप ईरान के साथ दोबारा बातचीत के पक्ष में हैं, जबकि इजरायल ईरान पर लगातार दबाव बनाए रखने की नीति पर है। ट्रंप ने नाराज़गी जताई कि नेतन्याहू ने अपनी योजना पहले ही सार्वजनिक कर दी, जो रणनीतिक समन्वय की कमी को दर्शाता है।
'पिकैक्स माउंटेन' क्या है जिसका ज़िक्र नेतन्याहू-ट्रंप बैठक में हुआ?
यह कथित तौर पर एक भूमिगत स्थल है जिसे इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़ा है। नेतन्याहू से उम्मीद थी कि वे इस स्थान से जुड़ी खुफिया जानकारी ट्रंप के साथ साझा करेंगे, हालाँकि आधिकारिक पुष्टि सीमित रही।
जेलेंस्की की वॉशिंगटन यात्रा से यूक्रेन को क्या हासिल हुआ?
बैठक के बाद जेलेंस्की ने बताया कि हवाई सुरक्षा प्रणालियों और नई कूटनीतिक कोशिशों पर चर्चा हुई। व्हाइट हाउस ने रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं की गई।
ट्रंप ने ईरान को क्या चेतावनी दी?
ट्रंप ने मंगलवार को ईरान को चेतावनी दी कि यदि तेहरान किसी समझौते पर नहीं पहुँचता, तो अमेरिका पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे ठिकानों पर हमला कर सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे ईरान के साथ दोबारा बातचीत के पक्ष में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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