नेतन्याहू ट्रंप से मिलने रवाना, बोले- ईरान सबसे अहम मुद्दा, इजरायल की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार, 27 जुलाई को अमेरिका के लिए रवाना हुए, जहाँ वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। रवानगी से पहले नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में ईरान सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी और उनकी पहली प्राथमिकता इजरायल की सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा शांति के दायरे का विस्तार करना है।
नेतन्याहू का एक्स पर संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने लिखा, 'मैं अभी हमारे दोस्त, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के लिए रवाना हो रहा हूँ। उनके दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद यह हमारी आठवीं मुलाकात होगी। किसी भी दूसरे अंतरराष्ट्रीय नेता की तुलना में मेरी उनसे सबसे ज़्यादा मुलाकातें हुई हैं। यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है, लेकिन साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।'
उन्होंने आगे कहा, 'हमारी बैठक में उन सभी अहम मुद्दों पर बात होगी जो इस समय सामने हैं, जिनमें ईरान सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। हमारा लक्ष्य बिल्कुल साफ है — इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उसकी ताकत को और मजबूत करना और शांति के दायरे को और आगे बढ़ाना।'
लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि
नेतन्याहू ने यह भी बताया कि इस दौरे के दौरान वे अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे। 71 वर्ष की आयु में बीमारी के कारण निधन हो जाने वाले ग्राहम को नेतन्याहू ने 'इजरायल के सबसे बड़े समर्थकों में से एक' बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसा करके मैं सभी इजरायली नागरिकों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहा हूँ।'
रूबियो से बातचीत और आईसीसी विवाद
इससे पहले रविवार को कैबिनेट ब्रीफिंग में नेतन्याहू ने बताया कि शनिवार रात उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बातचीत हुई। उनके अनुसार, रूबियो ने भरोसा दिलाया कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
नेतन्याहू ने आईसीसी पर आरोप लगाया कि वह दुनियाभर में न्याय व्यवस्था को खतरे में डाल रहा है और लोकतांत्रिक एवं संप्रभु देशों के अपने अधिकारों के इस्तेमाल में बाधा बन रहा है। गौरतलब है कि आईसीसी ने नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया हुआ है। नेतन्याहू ने इसे 'हेग में बैठे भ्रष्ट नौकरशाहों' का फैसला करार दिया।
यह बैठक क्यों अहम है
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका-इजरायल की साझा रणनीति पर दुनिया की नज़रें टिकी हैं। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नेतन्याहू की यह आठवीं मुलाकात उनके बीच असाधारण रूप से घनिष्ठ कूटनीतिक संबंध को दर्शाती है। विश्लेषकों के अनुसार, इस बैठक के नतीजे ईरान नीति और मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया की दिशा तय कर सकते हैं।