संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट: 149 देशों में 25.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि की बहाली, 10 लाख से अधिक हरित रोज़गार सृजित
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र की 29 अक्टूबर 2026 को जारी एक ऐतिहासिक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 149 देशों में 25.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली का कार्य सक्रिय रूप से चल रहा है। इस वैश्विक अभियान से अब तक 10 लाख से अधिक हरित रोज़गार सृजित हो चुके हैं। रिपोर्ट में इसे अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा प्रलेखित पारिस्थितिकी तंत्र बहाली अभियान घोषित किया गया है।
रिपोर्ट का परिचय और उद्देश्य
'नेचर'स कमबैक — स्केलिंग इकोसिस्टम रेस्टोरेशन फॉर पीपल एंड प्लैनेट' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के पारिस्थितिकी तंत्र बहाली दशक (2021-2030) के मध्यबिंदु पर जारी की गई है। इसे संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और जैव विविधता सम्मेलन (सीबीडी) के सचिवालय ने संयुक्त रूप से प्रकाशित किया है। इसे संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (सीओपी17) के दौरान येरेवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में जारी किया गया।
यह रिपोर्ट पहली बार वैश्विक स्तर पर बहाली से जुड़ी प्रतिबद्धताओं की व्यापक समीक्षा प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य लगभग एक अरब हेक्टेयर भूमि और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के संकल्प तथा कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के तहत 2030 तक क्षरित पारिस्थितिकी तंत्र के कम-से-कम 30 प्रतिशत हिस्से को प्रभावी बहाली के दायरे में लाने की दिशा में हुई प्रगति का आकलन करना है।
क्षेत्रवार बहाली की स्थिति
रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, बहाली के कुल दर्ज क्षेत्रफल में एशिया की हिस्सेदारी सर्वाधिक है — वहाँ 19.22 करोड़ हेक्टेयर में कार्य दर्ज किया गया है। इसके बाद अफ्रीका में 3.63 करोड़ हेक्टेयर, यूरोप में 91 लाख हेक्टेयर, उत्तर और मध्य अमेरिका में 58 लाख हेक्टेयर, दक्षिण अमेरिका में 54 लाख हेक्टेयर और ओशिनिया में 32 लाख हेक्टेयर में बहाली का काम चल रहा है।
स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के मामले में चीन ने सबसे बड़े क्षेत्रफल — 12.74 करोड़ हेक्टेयर — में बहाली की जानकारी दी है। मंगोलिया और कज़ाखस्तान में भी बड़े पैमाने पर बहाली कार्य दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इन आँकड़ों के आधार पर क्षेत्रों की तुलनात्मक रैंकिंग नहीं की जा सकती, क्योंकि इनमें अंतर क्षेत्रीय भूमि क्षेत्रफल, बहाली के पैमाने और निगरानी-रिपोर्टिंग क्षमताओं को भी दर्शाता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा, 'आज हम प्रकृति के लिए दर्ज इतिहास के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक की शुरुआत होते देख रहे हैं।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बहाली दशक के आधे समय तक पहुँचने के बावजूद प्रकृति की पुनर्स्थापना आवश्यक पैमाने और गति से नहीं हो रही है।
एफएओ के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने कहा, 'बहाली दशक के पाँच साल बाद यह संदेश स्पष्ट है — बहाली के प्रयास सफल होते हैं।' उन्होंने ज़ोर दिया कि भूमि, जल और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन में बहाली को एक अभिन्न अंग बनाना होगा और कृषि-खाद्य प्रणालियों में समन्वित बदलाव लाना आवश्यक है।
वित्तपोषण और रोज़गार की संभावनाएँ
रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बहाली कार्यों हेतु वार्षिक वित्तपोषण को मौजूदा स्तर से चार गुना से अधिक बढ़ाना अनिवार्य है। यदि यह निवेश किया जाता है, तो अनुमान है कि 2030 तक दुनियाभर में 3.2 करोड़ नए रोज़गार सृजित हो सकते हैं। विशेष रूप से मीठे पानी के स्रोतों, समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्राथमिकता से ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।
शोध के अनुसार, दुनिया के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के केवल 15 प्रतिशत हिस्से को बहाल करके औद्योगिक क्रांति के बाद से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड के समतुल्य उत्सर्जन का 30 प्रतिशत तक अवशोषित एवं संग्रहित किया जा सकता है। इससे प्रजातियों के विलुप्त होने की 60 प्रतिशत घटनाओं को रोकने में भी सहायता मिल सकती है।
भारत सहित उल्लेखनीय सफलताएँ
संयुक्त राष्ट्र विश्व बहाली फ्लैगशिप के तहत चीन, कोलंबिया, इथियोपिया, इटली और अमेरिका की पाँच पहलों को मान्यता दी गई। दर्ज सफलताओं में पूर्वी अफ्रीका में पर्वतीय गोरिल्ला, ब्राज़ील में जगुआर, किर्गिस्तान में हिम तेंदुए और भारत में गंगा नदी की डॉल्फिन जैसी प्रजातियों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार शामिल है। प्रकृति को बहाल करने का यह अभियान अब राष्ट्रीय कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा — इसमें शहरों, स्कूलों, व्यवसायों और सामुदायिक संगठनों की भागीदारी भी तेज़ी से बढ़ रही है। बहाली दशक की शुरुआत के बाद से इसके साझेदारी नेटवर्क में दुनिया के सभी क्षेत्रों के 300 से अधिक संगठन शामिल हो चुके हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के क्षरण पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। 2030 तक प्रेरणादायक पहलों को व्यापक स्तर पर लागू किए जाने वाले प्रयासों में बदलना होगा — यही इस दशक की सबसे बड़ी चुनौती है।