अमेरिका ने भारत को 428 मिलियन डॉलर की अपाचे और हॉवित्जर सपोर्ट डील को दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग ने 18 मई 2025 को भारत के लिए दो अलग-अलग संभावित फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) को मंजूरी दी, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 428.2 मिलियन डॉलर है। इन सौदों में एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टरों के लिए फॉलो-ऑन सपोर्ट सेवाएं और एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के दीर्घकालिक रखरखाव से जुड़ी सहायता शामिल है। इन मंजूरियों की जानकारी अमेरिकी कांग्रेस को भेजी गई दो अधिसूचनाओं के माध्यम से दी गई।
दो सौदों का ब्यौरा
दोनों में से बड़ा सौदा एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर के दीर्घकालिक रखरखाव और सस्टेनमेंट सपोर्ट से संबंधित है, जिसकी अनुमानित कीमत 230 मिलियन डॉलर है। इस पैकेज में अतिरिक्त उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत और वापसी सेवाएं, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, फील्ड सर्विस प्रतिनिधि, डिपो क्षमता तथा लॉजिस्टिक्स और प्रोग्राम सपोर्ट शामिल हैं। इस पैकेज का मुख्य कॉन्ट्रैक्टर बीएई सिस्टम्स होगा।
दूसरा सौदा 198.2 मिलियन डॉलर का है, जो एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टरों के लिए फॉलो-ऑन सपोर्ट सेवाओं और संबंधित उपकरणों की खरीद से जुड़ा है। इसमें मेंटेनेंस सपोर्ट, इंजीनियरिंग एवं लॉजिस्टिक सहायता, तकनीकी दस्तावेज और प्रशिक्षण सेवाएं शामिल हैं। इस पैकेज के मुख्य कॉन्ट्रैक्टर बोइंग और लॉकहीड मार्टिन होंगे।
रणनीतिक महत्व
अमेरिकी विदेश विभाग ने दोनों अधिसूचनाओं में स्पष्ट किया कि ये सौदे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका के व्यापक रणनीतिक उद्देश्यों को मजबूत करने में सहायक होंगे। विभाग के अनुसार यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंध और मजबूत करेगी तथा भारत जैसे प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा क्षमता बढ़ाएगी, जो इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत की रक्षा क्षमता पर असर
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार इन सौदों से भारत की मौजूदा और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय खतरों को रोकने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि एम777ए2 हॉवित्जर पहाड़ी इलाकों में तैनाती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है और भारतीय सेना पहले से इसका संचालन कर रही है। इसी तरह एएच-64ई अपाचे भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल है और इसकी सतत सेवा-क्षमता बनाए रखना रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की पृष्ठभूमि
ये मंजूरियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। पिछले एक दशक में दोनों देशों ने हथियारों की खरीद, संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीक साझाकरण के क्षेत्र में अपने सैन्य संबंध उल्लेखनीय रूप से मजबूत किए हैं। विदेश विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इन सौदों से क्षेत्र में सैन्य संतुलन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और अमेरिकी रक्षा तैयारी पर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होगा।