होर्मुज स्ट्रेट संकट: अमेरिका का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम', 15,000 सैनिक तैनात; रुबियो ने ईरान पर लगाया 'समुद्री डकैती' का आरोप

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होर्मुज स्ट्रेट संकट: अमेरिका का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम', 15,000 सैनिक तैनात; रुबियो ने ईरान पर लगाया 'समुद्री डकैती' का आरोप

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट — दुनिया के तेल व्यापार की जीवन-रेखा — पर ईरान की कथित नाकाबंदी के जवाब में अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' लॉन्च किया है। 15,000 सैनिक, 100 से ज़्यादा विमान और मिसाइल डिस्ट्रॉयर के साथ यह अभियान 87 देशों के 23,000 फंसे नागरिकों को निकालने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को मंज़ूरी दी।
87 देशों के लगभग 23,000 नागरिक व्यापारिक जहाजों पर फंसे हुए हैं।
अभियान में 15,000 अमेरिकी सैनिक , 100 से ज़्यादा विमान और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल।
अमेरिकी सेना ने ईरान की 7 तेज़ रफ़्तार नावें नष्ट कीं जो चेतावनी के बावजूद जहाजों के करीब आईं।
अमेरिकी झंडे वाले 2 व्यापारिक जहाज पहले चरण में सुरक्षित स्ट्रेट पार कर चुके हैं।
अमेरिका मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठा रहा है और ईरान की निंदा प्रस्ताव की माँग कर रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 5 मई 2026 को व्हाइट हाउस में घोषणा की कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने और इस महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग पर आवाजाही बहाल करने के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को मंज़ूरी दी है। रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाकर और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक ऊर्जा निर्भरता की मजबूरी से उपजी है — भारत, चीन और जापान जैसे देश भी इसी रास्ते पर टिके हैं, फिर भी खुलकर अमेरिका के साथ नहीं आए। 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' का नाम राजनीतिक रूप से सुविचारित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह अभियान ईरान को वार्ता की मेज पर लाएगा या तनाव को एक नए स्तर पर ले जाएगा। ट्रंप प्रशासन का परमाणु कार्यक्रम से जोड़ना संकेत देता है कि यह केवल नौसैनिक अभियान नहीं, बल्कि व्यापक कूटनीतिक दबाव की रणनीति का हिस्सा है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रोजेक्ट फ्रीडम' क्या है?
'प्रोजेक्ट फ्रीडम' राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मंज़ूर किया गया अमेरिकी नौसैनिक अभियान है, जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालना और इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर आवाजाही बहाल करना है। इसमें 15,000 सैनिक, 100 से ज़्यादा विमान और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।
होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी को वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ता है और दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा इसी से गुजरता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर भारी निर्भर हैं।
ईरान पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाने, व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करके 87 देशों के 23,000 नागरिकों को फंसाने का आरोप लगाया है। रुबियो ने इसे 'समुद्री डकैती' करार दिया।
इस अभियान में अमेरिका की क्या भूमिका होगी?
अमेरिकी नौसेना और वायुसेना व्यापारिक जहाजों के लिए 'सुरक्षा घेरा' बनाएंगी और उन्हें सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट पार कराएंगी। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना पहले गोली नहीं चलाएगी और केवल आत्मरक्षा में जवाब देगी।
इस संकट का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए काफी हद तक होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर है, इसलिए नाकाबंदी से भारत के तेल आयात और ऊर्जा कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। अभियान की सफलता भारत सहित कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए राहत का कारण बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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