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भारत-अमेरिका निवेश संबंध और मजबूत होंगे: CFIUS प्रक्रिया में मदद को तैयार वाशिंगटन

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भारत-अमेरिका निवेश संबंध और मजबूत होंगे: CFIUS प्रक्रिया में मदद को तैयार वाशिंगटन

सारांश

अमेरिकी ट्रेजरी के असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस पिलकर्टन ने ऐशविले में जी20 बैठक से पहले साफ किया — CFIUS की 90% समीक्षाएं मंजूर होती हैं और भारतीय कंपनियों को इस प्रक्रिया में नेविगेट करने में मदद देने के लिए वाशिंगटन तैयार है। 'अमेरिका फर्स्ट' का अर्थ एकाकीपन नहीं है।

मुख्य बातें

अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस पिलकर्टन ने 31 अगस्त को ऐशविले में भारत के साथ निवेश संबंध गहरे करने की इच्छा जताई।
CFIUS द्वारा समीक्षा किए जाने वाले लगभग 90 प्रतिशत लेन-देन को मंजूरी मिलती है; निवेश का मूल्यांकन मूल देश के आधार पर नहीं होता।
पिलकर्टन ने भारत को 'महत्वपूर्ण साझेदार' बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच 'बेहतरीन संबंध' विकसित हुए हैं।
AI, क्वांटम, हाइपरसोनिक, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था जी20 बैठक के प्रमुख तकनीकी एजेंडे में शामिल।
ट्रंप प्रशासन के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को पिलकर्टन ने बहुपक्षीय सहयोग के विरुद्ध नहीं बताया।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी) के असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस पिलकर्टन ने 31 अगस्त को ऐशविले में जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत के साथ निवेश संबंधों को और गहरा करना चाहता है और भारतीय कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया में मार्गदर्शन देने के लिए पूरी तरह तैयार है। पिलकर्टन ने भारत को 'एक महत्वपूर्ण साझेदार' बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच 'बेहतरीन संबंध' विकसित हुए हैं।

CFIUS प्रक्रिया और भारतीय निवेशकों के लिए रास्ते

पिलकर्टन ने कहा, 'मैं भारतीय अधिकारियों और भारतीय कंपनियों से मिलने का अवसर चाहता हूं, ताकि हम देख सकें कि कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द यूनाइटेड स्टेट्स (CFIUS) प्रक्रिया के जरिए साथ मिलकर काम करने के कौन-कौन से रास्ते हो सकते हैं।' CFIUS अमेरिका में होने वाले विदेशी निवेशों की राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से समीक्षा करती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समिति निवेश का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं करती कि पूंजी किस देश से आ रही है, बल्कि हर मामले का अलग-अलग राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से परीक्षण होता है। उनके अनुसार, CFIUS द्वारा समीक्षा किए जाने वाले लगभग 90 प्रतिशत लेन-देन को अंततः मंजूरी मिल जाती है।

अमेरिका फर्स्ट का अर्थ एकाकीपन नहीं

भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में पिलकर्टन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडा देशों को अलग-थलग करने की नीति नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह अमेरिका फर्स्ट प्रशासन है और हमारा फोकस अमेरिका फर्स्ट पर है, लेकिन जैसा राष्ट्रपति ट्रंप कह चुके हैं, इसका मतलब अमेरिका अकेले नहीं है। हम कई देशों के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता जारी है और दोनों देश महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों में सहयोग को नई ऊंचाई देने की कोशिश में हैं।

जी20 बैठक में प्रमुख एजेंडा

ऐशविले में होने वाली जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक में वैश्विक आर्थिक विकास, व्यापार असंतुलन, सुदृढ़ सप्लाई चेन और निवेश जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे। पिलकर्टन ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी, हाइपरसोनिक तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था जैसे विषय भी चर्चा में शामिल होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इन क्षेत्रों में साझेदार देशों के साथ सुरक्षित सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है और साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संवेदनशील तकनीकों का दोहरा या गलत उपयोग न हो।

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार गहरा हुआ है। दोनों देश उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों, सुरक्षित सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों में साझेदारी को विस्तार दे रहे हैं। हालांकि पिलकर्टन ने ऐशविले बैठक से भारत के संदर्भ में किसी विशेष आर्थिक परिणाम की उम्मीद के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया।

अनुमान है कि आने वाले महीनों में CFIUS मार्गदर्शन और द्विपक्षीय निवेश ढांचे पर दोनों देशों के बीच ठोस बातचीत आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली बाधा उन शेष 10% मामलों में है जहां संवेदनशील तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा के दावे टकराते हैं, और जहां भारतीय कंपनियों को सबसे ज्यादा मार्गदर्शन की जरूरत है। 'अमेरिका फर्स्ट' को बहुपक्षीय बताने की कोशिश उस व्यापार तनाव के बीच आई है जो अभी पूरी तरह सुलझी नहीं है। जब तक CFIUS मार्गदर्शन के लिए कोई ठोस द्विपक्षीय ढांचा सामने नहीं आता, यह बयान इच्छाशक्ति का प्रदर्शन तो है, पर नीतिगत प्रतिबद्धता नहीं।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CFIUS क्या है और यह भारतीय कंपनियों को कैसे प्रभावित करती है?
CFIUS यानी कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द यूनाइटेड स्टेट्स, अमेरिका में होने वाले विदेशी निवेशों की राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से समीक्षा करती है। भारतीय कंपनियां जो अमेरिका में निवेश करना चाहती हैं, उन्हें इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, हालांकि लगभग 90 प्रतिशत मामलों को मंजूरी मिल जाती है।
क्रिस पिलकर्टन कौन हैं और उन्होंने भारत के बारे में क्या कहा?
क्रिस पिलकर्टन अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी) के असिस्टेंट सेक्रेटरी हैं। उन्होंने 31 अगस्त को ऐशविले में कहा कि वह भारतीय अधिकारियों और कंपनियों के साथ CFIUS प्रक्रिया को समझने और निवेश के रास्ते खोलने के लिए बातचीत का स्वागत करते हैं।
ऐशविले में जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक में क्या प्रमुख मुद्दे उठेंगे?
बैठक में वैश्विक आर्थिक विकास, व्यापार असंतुलन, सुदृढ़ सप्लाई चेन, निवेश और AI, क्वांटम, हाइपरसोनिक, जैव प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था जैसी उभरती तकनीकों पर चर्चा होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में साझेदार देशों के साथ सुरक्षित सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है।
क्या 'अमेरिका फर्स्ट' नीति भारत के साथ निवेश सहयोग में बाधा है?
पिलकर्टन के अनुसार नहीं — उन्होंने स्पष्ट किया कि 'अमेरिका फर्स्ट' का अर्थ एकाकीपन नहीं है और अमेरिका कई देशों के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाना चाहता है। हालांकि विशेषज्ञ इस बयान को नीतिगत प्रतिबद्धता की बजाय कूटनीतिक संकेत मानते हैं।
भारत-अमेरिका आर्थिक सहयोग की मौजूदा स्थिति क्या है?
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार गहरा हुआ है। दोनों देश महत्वपूर्ण तकनीकों, सुरक्षित सप्लाई चेन और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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