पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति गंभीर, यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट में खुलासा

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पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति गंभीर, यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट में खुलासा

सारांश

यूएससीआईआरएफ की वार्षिक रिपोर्ट से पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की चिंताजनक स्थिति का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का जिक्र है।

Key Takeaways

  • यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की गंभीर स्थिति का जिक्र है।
  • ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को बढ़ावा दे रहा है।
  • पाकिस्तान सरकार द्वारा हजारों अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने के प्रयास जारी हैं।
  • बाल विवाह निषेध विधेयक का विरोध किया गया है, जिसे नेशनल असेंबली ने पारित किया था।
  • रिपोर्ट में 13 देशों को 'विशेष चिंता का देश' घोषित करने की सिफारिश की गई है।

इस्लामाबाद, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी सरकार की सलाहकार संस्था यूएससीआईआरएफ (यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम) ने अपनी हालिया वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि 2025 में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी रही। यह संस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करती है और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को नीतिगत सुझाव प्रदान करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने अपने कठोर ईशनिंदा कानूनों को लागू करना जारी रखा, जिसका प्रभाव सभी धर्मों के लोगों पर पड़ा, खासकर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर। अहमदी मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाकर किए गए भीड़ के हमलों और हिंसा की घटनाओं ने समाज में डर और असहिष्णुता का वातावरण और बढ़ा दिया।

जनवरी 2025 में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ईशनिंदा से संबंधित सामग्री पोस्ट करने के आरोप में चार व्यक्तियों को मौत की सजा सुनाने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि इसी महीने मानसिक रूप से बीमार एक ईसाई व्यक्ति फरहान मसीह को ईशनिंदा और आतंकवाद के आरोपों में जेल भेज दिया गया। हालांकि बाद में उसे बरी कर दिया गया, लेकिन सुरक्षा कारणों से वह अपने गांव वापस नहीं लौट सका।

फरवरी में एक सत्र अदालत ने एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई, जब तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के एक सदस्य ने उस पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया। अगले महीने लाहौर उच्च न्यायालय ने ईशनिंदा के आरोपों से जुड़े जुनैद हफीज की अपील को अपनी केस सूची से हटा दिया। रिपोर्ट के अनुसार, हफीज को 2014 से एकांत कारावास में रखा गया है और 2019 में एक सत्र अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। उसका मामला 2020 से लंबित है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले वर्ष इस्लामी विचारधारा परिषद ने ‘इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी बाल विवाह निषेध विधेयक’ का विरोध किया था, जिसे पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सर्वसम्मति से पारित किया था। इस कानून का उद्देश्य बाल विवाह और कम उम्र की लड़कियों के जबरन धर्मांतरण को रोकना था। प्रस्तावित कानून के तहत किसी बच्चे की शादी कराने या उसे मजबूर करने वालों को सात साल तक की जेल हो सकती थी।

यूएससीआईआरएफ के अनुसार, इस विधेयक को “इस्लामी आदेशों के अनुरूप न होने के कारण गैर-इस्लामी” घोषित कर दिया गया। मौलाना फजलुर रहमान के नेतृत्व वाली जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल ने इसके विरोध में रैलियों का आयोजन किया। वहीं मिली यकजेथी काउंसिल के नेताओं ने भी इसे गैर-इस्लामी और असंवैधानिक बताते हुए इसकी निंदा की।

रिपोर्ट में कहा गया कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक हमले अक्सर बिना सजा के होते रहे और कई मामलों में इन हमलों को जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों से जोड़ा गया। मार्च 2025 में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपने सहकर्मी 22 वर्षीय ईसाई वकास मसीह पर हमला कर उसका गला काट दिया। आरोप था कि उसने ‘अपवित्र हाथों’ से एक इस्लामी धार्मिक पुस्तक को छू लिया था। कुछ दिनों बाद नदीम नाथ नामक एक हिंदू व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने इस्लाम स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में दो बंदूकधारियों ने ईसाई पादरी कामरान नाज पर हमला किया, जब वे इस्लामाबाद में चर्च की प्रार्थना सभा का नेतृत्व करने जा रहे थे। पादरी को पहले भी जान से मारने की धमकियां मिल चुकी थीं और उन पर अफगान शरणार्थियों के बीच धर्म प्रचार करने का आरोप लगाया गया था। पंजाब और सिंध प्रांतों में हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं पूरे 2025 में सामने आती रहीं।

यूएससीआईआरएफ ने यह भी कहा कि पूरे 2025 के दौरान पाकिस्तानी सरकार ने हजारों अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस अफगानिस्तान भेजने के प्रयास जारी रखे। इनमें हजारा शिया समुदाय के लोग भी शामिल थे, जिन्हें तालिबान द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और जिन्हें धर्म-त्यागी माना जाता है।

इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने 29 दिसंबर 2023 को धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों के आधार पर पाकिस्तान को फिर से ‘विशेष चिंता का देश’ (सीपीसी) घोषित किया था। यूएससीआईआरएफ ने अपनी नई रिपोर्ट में पाकिस्तान सहित 13 देशों—बर्मा, चीन, क्यूबा, इरिट्रिया, ईरान, निकारागुआ, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान—को दोबारा ‘विशेष चिंता का देश’ घोषित करने की सिफारिश की है।

Point of View

बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी भी बनती है कि वे इसे गंभीरता से लें।
NationPress
17/03/2026

Frequently Asked Questions

यूएससीआईआरएफ क्या है?
यूएससीआईआरएफ (यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम) एक अमेरिकी सरकारी सलाहकार संस्था है जो धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करती है।
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की स्थिति क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक हमले बढ़ रहे हैं, और कई मामलों में इन्हें बिना सजा के छोड़ दिया जा रहा है।
ईशनिंदा कानूनों का क्या असर है?
पाकिस्तान के सख्त ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा बढ़ रही है।
यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट में अन्य देशों का क्या जिक्र है?
रिपोर्ट में पाकिस्तान सहित 13 देशों को 'विशेष चिंता का देश' घोषित किया गया है, जिनमें बर्मा, चीन, ईरान और सऊदी अरब शामिल हैं।
पाकिस्तान में बाल विवाह निषेध विधेयक का क्या हुआ?
इस्लामी विचारधारा परिषद ने इस विधेयक का विरोध किया, जिसे नेशनल असेंबली ने पारित किया था, जिसका उद्देश्य बाल विवाह और जबरन धर्मांतरण को रोकना था।
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