अमेरिकी आयोग की तुर्की को विशेष निगरानी सूची में डालने की मांग: धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर गंभीर चिंता

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अमेरिकी आयोग की तुर्की को विशेष निगरानी सूची में डालने की मांग: धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर गंभीर चिंता

सारांश

अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने तुर्की को विशेष निगरानी सूची में डालने की मांग की है। इस रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों का जिक्र है, जो तुर्की में पिछले कुछ वर्षों से बढ़ते जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • तुर्की को विशेष निगरानी सूची में डालने की मांग की गई है।
  • धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के गंभीर मामले सामने आए हैं।
  • 375 विदेशी धार्मिक कार्यकर्ताओं की कानूनी स्थिति खत्म की गई।
  • राजनीतिक अभिव्यक्ति पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है।
  • ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्च के लिए शिक्षा के अवसर सीमित हैं।

अंकारा, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से अनुरोध किया है कि तुर्की को विशेष निगरानी सूची (एसडब्ल्यूएल) में डाला जाए, क्योंकि वहां धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन हो रहे हैं। यह सिफारिश इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम एक्ट (आईआरएफए) के अंतर्गत की गई है।

यूएससीआईआरएफ, जो कि अमेरिकी सरकार का एक सलाहकार निकाय है और धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करता है, ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सुझाव दिया कि भविष्य की अमेरिकी सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार नीतियों को तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति में सुधार से जोड़ा जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर और लगातार उल्लंघन किए गए, जैसा कि पिछले वर्ष भी देखा गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर एक लंबे समय से चल रहे अभियान को तेज किया है। इसके तहत कम से कम 375 विदेशी ईसाई पादरियों, उनके परिवारों और अन्य धार्मिक कार्यकर्ताओं की कानूनी निवास स्थिति समाप्त कर दी गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि विपक्षी नेताओं के समर्थन में राजनीतिक अभिव्यक्ति पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बीच, सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता का भी उल्लंघन किया। राज्य संस्थानों में धर्मनिरपेक्ष विचारों को दंडित किया गया और तुर्की दंड संहिता की धारा 216 को ईशनिंदा कानून की तरह लागू किया गया।

जनवरी में, रक्षा मंत्रालय ने पांच नए लेफ्टिनेंट और उनके तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया, क्योंकि उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में एक धर्मनिरपेक्ष शपथ का चयन किया था। सरकार ने इस्लाम के खिलाफ माने जाने वाले ऑनलाइन बयानों की भी निगरानी की और धार्मिक असहमति जताने वालों पर मुकदमे चलाए।

यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी कांग्रेस से आग्रह किया कि वह तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता पर सुनवाई करे और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को तुर्की भेजे ताकि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया जा सके। इन मुद्दों में सार्वजनिक शिक्षा में धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता का दमन, झूठे सुरक्षा खतरों के बहाने अमेरिकी पादरियों को देश में पुनः प्रवेश से रोकना और तुर्की में उन शरणार्थियों की स्थिति शामिल है जिन्हें अपने गृह देशों में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वापस भेजे जाने का डर है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्च के सदस्य अब भी हैल्की स्कूल को पुनः खोलने की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। यह स्कूल 54 साल पहले सरकारी नीतियों के कारण बंद कर दिया गया था।

इस कारण ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स, प्रोटेस्टेंट और अन्य ईसाई समुदायों को देश के भीतर धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलता और उन्हें विदेशों में सेमिनरी कार्यक्रमों में जाना पड़ता है।

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की की लगभग 8.5 करोड़ आबादी में से 99.8 प्रतिशत को मुस्लिम माना जाता है, जिसमें 1 से 2.5 करोड़ अलेवी भी शामिल हैं, जिनमें से कई खुद को मुस्लिम नहीं मानते।

इसके अलावा, जाफरी शिया मुसलमान बहुत छोटी संख्या में हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक प्रतिशत से भी कम आबादी गैर-मुस्लिम है। रिपोर्ट में कहा गया कि तुर्की का धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ढांचा इस 102 साल पुराने गणराज्य का मूल सिद्धांत है, जो संविधान में भी देखा जा सकता है और जिसमें धर्म और अंतरात्मा की स्वतंत्रता को मान्यता दी गई है। हालाँकि, हाल के वर्षों में जनसंख्या और राजनीति से जुड़े रुझानों के कारण गैर-सुन्नी मुस्लिम समुदायों के प्रति सरकारी और सामाजिक भेदभाव में वृद्धि हुई है।

Point of View

NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति क्या है?
तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन हो रहे हैं, जहां कई धार्मिक कार्यकर्ताओं की कानूनी निवास स्थिति समाप्त कर दी गई है।
यूएससीआईआरएफ क्या है?
यूएससीआईआरएफ एक अमेरिकी सलाहकार निकाय है जो धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करता है।
तुर्की में धार्मिक शिक्षा का क्या हाल है?
तुर्की में धार्मिक शिक्षा का अवसर बहुत सीमित है, और कई ईसाई समुदायों को विदेशों में सेमिनरी कार्यक्रमों में जाना पड़ता है।
क्या तुर्की में गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव होता है?
हाँ, तुर्की में गैर-सुन्नी मुस्लिम समुदायों के प्रति सरकारी और सामाजिक भेदभाव में वृद्धि हुई है।
क्या तुर्की में धार्मिक उत्पीड़न की घटनाएँ बढ़ रही हैं?
जी हाँ, तुर्की में धार्मिक उत्पीड़न की घटनाएँ पिछले कुछ वर्षों से बढ़ रही हैं, खासकर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों के संदर्भ में।
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