विदेश सचिव विक्रम मिस्री: वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य खंडित, सप्लाई चेन और तकनीक बने दबाव के हथियार
सारांश
मुख्य बातें
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में कहा कि वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य पहले की तुलना में कहीं अधिक खंडित और संघर्षपूर्ण हो चुका है। यूरोप और पश्चिम एशिया में सक्रिय टकरावों, सप्लाई चेन के हथियारीकरण और महत्वपूर्ण तकनीकों के दबाव-साधन बनने की ओर इशारा करते हुए मिस्री ने कहा कि यह एक निर्णायक भू-राजनीतिक मोड़ है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज (CENJOWS) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वीआईएसवी-2026 (विजन, इनोवेशन, सिनर्जी, वैल्यूज) कार्यक्रम में उन्होंने ये विचार साझा किए।
वैश्विक सुरक्षा के सामने बढ़ती चुनौतियाँ
मिस्री ने रेखांकित किया कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य केवल पारंपरिक संघर्षों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा, 'यूरोप और पश्चिम एशिया में टकराव चल रहे हैं। सप्लाई चेन को हथियार बना दिया गया है। महत्वपूर्ण तकनीकें दबाव डालने का जरिया बन गई हैं।' उन्होंने अंतरिक्ष और गहरे समुद्र में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा की ओर भी ध्यान दिलाया।
मिस्री ने यह भी चेताया कि ये घटनाक्रम न केवल मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नीतिगत ढाँचे, बल्कि कूटनीति की गति से भी आगे निकल रहे हैं। उनके अनुसार, समुद्र, साइबरस्पेस और बाहरी अंतरिक्ष जैसे वैश्विक साझा क्षेत्रों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आतंकवाद और जलवायु अस्थिरता: दोहरा संकट
विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद आज भी समाजों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है और 'कुछ देश अभी भी इसे अपनी सरकारी नीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।' हालाँकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, यह वक्तव्य भारत की ओर से बार-बार उठाए जाने वाले राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे के संदर्भ में उल्लेखनीय है।
इसके साथ ही, मिस्री ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु अस्थिरता संसाधनों की कमी को एक गंभीर सुरक्षा संकट की ओर धकेल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को लेकर भू-राजनीतिक तनाव तेज होता जा रहा है।
वीआईएसवी-2026: रक्षा कूटनीति की नई पहल
'रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन, वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी उपस्थित रहे। मिस्री ने इसे डीआरडीओ द्वारा विदेशी रक्षा अताशे के लिए आयोजित 'पहला आउटरीच कार्यक्रम' बताते हुए रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ की सराहना की।
गौरतलब है कि वीआईएसवी-2026 का उद्देश्य भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना और मित्र देशों के साथ तकनीक-आधारित सहयोग के नए अवसर तलाशना है। इस कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र, उद्योग, शिक्षा जगत और राजनयिक समुदाय के प्रतिनिधि एक साथ आए।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का रेखांकन
रक्षा कूटनीति पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए मिस्री ने कहा, 'हमें अपनी क्षमता और मजबूती बढ़ानी होगी, और साझेदारियाँ कायम करनी होंगी।' उन्होंने भारत की विदेश नीति के मूल सिद्धांत — 'रणनीतिक स्वायत्तता' — का उल्लेख किया, जिसका अर्थ है अपने हितों के आकलन के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता।
विदेशी रक्षा अताशे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संकेतों को समझने और भारतीय समकक्षों के साथ संस्थागत विश्वास बनाने की उनकी क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना उनके मिशनों में अन्य राजनयिकों का काम।
आगे की राह
मिस्री ने उम्मीद जताई कि वीआईएसवी-2026 जैसी पहलें बदलते भू-राजनीतिक माहौल की समझ को गहरा करेंगी और देशों को आपसी लाभ के अवसर पहचानने में सहायता करेंगी। डीआरडीओ का लक्ष्य इस मंच के माध्यम से तकनीकी आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों को और गहरा करना है — एक ऐसे दौर में जब वैश्विक सुरक्षा का परिदृश्य तेजी से पुनर्परिभाषित हो रहा है।