विश्वास विदु सपकाल स्लोवाक गणराज्य में भारत के नए राजदूत नियुक्त, पेरू में हैं वर्तमान में तैनात
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 20 जून 2026 को स्लोवाक गणराज्य में भारत के अगले राजदूत की नियुक्ति की घोषणा की। मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, विश्वास विदु सपकाल इस पद पर नियुक्त किए गए हैं, जो शीघ्र ही अपना नया दायित्व संभालेंगे। सपकाल वर्तमान में पेरू गणराज्य में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत हैं।
सपकाल की राजनयिक पृष्ठभूमि
1998 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी सपकाल ने महाराष्ट्र के वालचंद इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की है। पेरू से पहले वे फिजी में भारत के उच्चायुक्त और सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) में महावाणिज्यदूत के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने मॉस्को, शिकागो, येरेवन (आर्मेनिया) और काहिरा (मिस्र) में भी विभिन्न राजनयिक पदों पर कार्य किया है।
भारत-स्लोवाकिया संबंधों की पृष्ठभूमि
1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में गठन के बाद से ही भारत के साथ उसके संबंध सुदृढ़ रहे हैं। हाल ही में इन संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया है, जो द्विपक्षीय जुड़ाव में एक नई परिपक्वता को दर्शाता है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं।
मोदी का ऐतिहासिक स्लोवाकिया दौरा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाक गणराज्य के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के आमंत्रण पर 15 जून 2026 को स्लोवाकिया का राजकीय दौरा किया था। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, यह स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का इस देश का पहला दौरा था। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
साझेदारी का विस्तारित ढाँचा
दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बढ़ते भू-राजनीतिक, आर्थिक और प्रौद्योगिकीय महत्व को स्वीकार करते हुए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, मुक्त अंतरराष्ट्रीय व्यापार, नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन में सहमति जताई। विस्तृत साझेदारी का उद्देश्य द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग के नए अवसरों की तलाश करना तथा मौजूदा तंत्र को और सुदृढ़ बनाना है।
सपकाल की नियुक्ति भारत-स्लोवाकिया संबंधों की नई गति को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम है, और आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयाम खुलने की संभावना है।