2 अगस्त 2026
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गुरुग्राम पुलिस ने 13 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया, मानेसर निर्वासन केंद्र भेजा

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गुरुग्राम पुलिस ने 13 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया, मानेसर निर्वासन केंद्र भेजा

सारांश

गुरुग्राम क्राइम ब्रांच ने कई दिनों के तलाशी अभियान के बाद 13 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया — जो झुग्गियों और निर्माण स्थलों पर रह रहे थे और पश्चिम बंगाल सीमा से दाखिल हुए थे। सभी को मानेसर निर्वासन केंद्र भेजा गया है।

मुख्य बातें

गुरुग्राम पुलिस ने 16 जून 2026 को तलाशी अभियान के तहत 13 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया।
हिरासत में लिए गए लोग झुग्गी-झोपड़ियों और निर्माण स्थलों पर रह-काम कर रहे थे।
सभी पश्चिम बंगाल की सीमा से भारत में दाखिल हुए थे और 2 से 4 महीने से गुरुग्राम में थे।
इनके पास से बांग्लादेशी पहचान पत्र और बांग्लादेश के फोन नंबर बरामद हुए।
सभी को मानेसर स्थित निर्वासन केंद्र में रखा गया है; कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वासन होगा।
एसीपी क्राइम नवीन शर्मा ने मकान मालिकों और नियोक्ताओं से पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करने की अपील की।

गुरुग्राम पुलिस ने 16 जून 2026 को अवैध प्रवासियों के विरुद्ध चलाए जा रहे तलाशी अभियान के तहत शहर के विभिन्न इलाकों से 13 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया। इन सभी के पास वैध दस्तावेज़ नहीं पाए गए और इनके पास से बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों को मानेसर स्थित निर्वासन केंद्र में रखा गया है।

कैसे चला अभियान

एसीपी क्राइम नवीन शर्मा ने मीडिया को बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए क्राइम ब्रांच द्वारा गुरुग्राम की कॉलोनियों, सेक्टरों और झुग्गी-झोपड़ी बहुल इलाकों में कई दिनों से सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें सूचना मिली थी कि कुछ बांग्लादेशी नागरिक वैध दस्तावेज़ों के बिना शहर में रह रहे थे।'

पूछताछ और तलाशी के बाद 13 लोगों को औपचारिक रूप से हिरासत में लिया गया। इनमें से कुछ झुग्गी-झोपड़ियों में निवास कर रहे थे, जबकि कुछ निर्माण स्थलों पर मज़दूरी कर रहे थे।

कितने समय से थे भारत में

एसीपी शर्मा के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में से कुछ दो महीने से और कुछ चार महीने से गुरुग्राम में रह रहे थे। ये सभी पश्चिम बंगाल की सीमा से भारत में दाखिल हुए थे। इनके पास से बांग्लादेश के फोन नंबर भी बरामद हुए, जिनका उपयोग ये अपने परिजनों से संपर्क के लिए करते थे।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

एसीपी शर्मा ने स्पष्ट किया कि सभी हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने तक मानेसर स्थित निर्वासन केंद्र में रखा जाएगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्वासित किया जाएगा। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों और देश में कानूनी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को इस अभियान से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

नागरिकों और नियोक्ताओं से अपील

एसीपी नवीन शर्मा ने होटल मालिकों, मकान मालिकों और निर्माण स्थलों के नियोक्ताओं से अपील की है कि वे किरायेदारों, घरेलू सहायकों और कर्मचारियों के पहचान पत्रों की सावधानीपूर्वक जाँच करें और पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करें। यह अभियान फिलहाल गुरुग्राम में जारी है और आगे भी चलता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि द्विपक्षीय समन्वय के बिना ये मामले लंबे समय तक अटके रह सकते हैं। पुलिस की नागरिकों से अपील सही दिशा में है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए किरायेदार सत्यापन को संस्थागत रूप देना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुग्राम में हिरासत में लिए गए बांग्लादेशी नागरिक कौन हैं?
ये 13 बांग्लादेशी नागरिक हैं जो वैध दस्तावेज़ों के बिना गुरुग्राम में अवैध रूप से रह रहे थे। इनमें से कुछ झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे थे और कुछ निर्माण स्थलों पर काम कर रहे थे।
ये लोग भारत में कैसे दाखिल हुए थे?
पुलिस के अनुसार, ये सभी पश्चिम बंगाल की सीमा से भारत में प्रवेश कर गुरुग्राम पहुँचे थे। इनमें से कुछ दो महीने और कुछ चार महीने से यहाँ रह रहे थे।
हिरासत में लिए गए लोगों के साथ आगे क्या होगा?
एसीपी नवीन शर्मा के अनुसार, सभी 13 लोगों को मानेसर स्थित निर्वासन केंद्र में रखा गया है। कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद इन्हें बांग्लादेश निर्वासित किया जाएगा।
क्या इस अभियान से भारतीय नागरिकों को कोई परेशानी होगी?
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों और देश में कानूनी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को इस अभियान से चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। यह अभियान केवल अवैध प्रवासियों पर केंद्रित है।
मकान मालिक और नियोक्ता इस स्थिति में क्या करें?
गुरुग्राम पुलिस ने होटल मालिकों, मकान मालिकों और निर्माण स्थलों के नियोक्ताओं से अपील की है कि वे किरायेदारों और कर्मचारियों के पहचान पत्रों की जाँच करें और पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें।
राष्ट्र प्रेस
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