2019 से 274 भगोड़े अपराधी भारत वापस, 36 देशों से प्रत्यर्पण और ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 4 अगस्त 2026 को खुलासा किया कि 2019 से अब तक 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है और इस दौरान भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। खुफिया सूचनाओं, आधुनिक तकनीक और बहु-एजेंसी समन्वय पर आधारित इस तंत्र ने विदेशों में छिपे अपराधियों की वापसी की प्रक्रिया को पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी बना दिया है।
मिशन मोड में प्रत्यर्पण अभियान
सरकार के अनुसार, 2020 के बाद भगोड़ों को वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में संचालित किया गया। 2019 में लागू एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम ने कार्रवाई का दायरा केवल संगठनों तक सीमित न रखकर व्यक्तिगत आतंकियों, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक विस्तारित किया। गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ बताया है।
2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 355 और 356 में पहली बार 'अनुपस्थिति में मुकदमा' का प्रावधान रखा गया, जिससे भगोड़े अपराधी की गैर-मौजूदगी में भी ट्रायल से लेकर अभियोजन तक की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
भारतपोल और वैश्विक समन्वय
2022 में भारत ने 90वीं इंटरपोल जनरल असेंबली की मेजबानी की, जिसमें गृह मंत्री शाह ने वैश्विक पुलिसिंग में कम्युनिकेशन, कोलैबोरेशन और कोऑपरेशन का संदेश दिया। इसके बाद जनवरी 2025 में 'भारतपोल' लॉन्च किया गया, जिसने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एकीकृत सूचना ढाँचे में जोड़ा। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस इस पोर्टल से जुड़कर सूचना का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे एजेंसियों के बीच सूचना-साझेदारी के प्रतिक्रिया समय में भारी कमी आई है।
सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों की धरपकड़ के लिए विशेष ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर स्थापित किया है, जो इंटरपोल के माध्यम से दुनियाभर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए हर राज्य व केंद्रीय जाँच एजेंसी में इंटरपोल संपर्क अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
रेड कॉर्नर नोटिस और ऑपरेशन त्रिशूल
इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है — 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 नोटिस जारी हो चुके हैं। भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया, जिसके तहत इंटरपोल के सहयोग से सैटेलाइट, सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर छिपे अपराधियों की लोकेशन स्थापित की गई।
संपत्ति जब्ती और आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा
मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) को सख्ती से लागू करते हुए सरकार ने 2019 से 2026 के बीच भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की। इसी अवधि में ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी भी की गई, जिसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है। वापस लाए गए भगोड़ों में आतंकवादी, गैंगस्टर, वित्तीय अपराधी, नार्कोटिक्स आरोपी और हत्या, बलात्कार तथा पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं।
इस अभियान का सबसे चर्चित उदाहरण तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण है, जिसे भारत के संकल्प और जटिल आतंकवाद मामलों में धैर्यपूर्ण कानूनी-कूटनीतिक प्रयास का प्रतीक माना जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग आतंकवाद, नार्को-टेरर और सीमा-पार सहायता नेटवर्क को चलाने में हो रहा था।
बहु-एजेंसी ढाँचा और आगे की राह
देश के भीतर समन्वय में आईबी, सीबीआई, रॉ, एनआईए, ईडी, एमईए, एनसीबी, डीजीजीआई और राज्य पुलिस की साझा भूमिका है। जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में यह तंत्र और अधिक सुदृढ़ होगा तथा विदेशों में शरण लेकर कानूनी कार्रवाई से बचना पहले से कहीं अधिक कठिन होता जाएगा।