4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

2019 से 274 भगोड़े अपराधी भारत वापस, 36 देशों से प्रत्यर्पण और ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
2019 से 274 भगोड़े अपराधी भारत वापस, 36 देशों से प्रत्यर्पण और ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त

सारांश

2019 से 2026 के बीच भारत ने 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधी वापस लाए और ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की। भारतपोल, ऑपरेशन त्रिशूल और बढ़ते रेड कॉर्नर नोटिस इस अभियान की रीढ़ बने हैं — और तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण इसकी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत।

मुख्य बातें

2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया गया।
भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त; ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी।
जनवरी 2025 में लॉन्च 'भारतपोल' से 1,400 से अधिक एजेंसी यूनिट एकीकृत।
2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी — 2022 के 40 नोटिस से साढ़े चार गुना वृद्धि।
बीएनएस धारा 355-356 के तहत पहली बार 'अनुपस्थिति में मुकदमा' का प्रावधान लागू।
तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण जटिल आतंकवाद मामलों में कूटनीतिक सफलता का प्रतीक।

केंद्र सरकार ने 4 अगस्त 2026 को खुलासा किया कि 2019 से अब तक 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है और इस दौरान भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। खुफिया सूचनाओं, आधुनिक तकनीक और बहु-एजेंसी समन्वय पर आधारित इस तंत्र ने विदेशों में छिपे अपराधियों की वापसी की प्रक्रिया को पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी बना दिया है।

मिशन मोड में प्रत्यर्पण अभियान

सरकार के अनुसार, 2020 के बाद भगोड़ों को वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में संचालित किया गया। 2019 में लागू एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम ने कार्रवाई का दायरा केवल संगठनों तक सीमित न रखकर व्यक्तिगत आतंकियों, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक विस्तारित किया। गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ बताया है।

2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 355 और 356 में पहली बार 'अनुपस्थिति में मुकदमा' का प्रावधान रखा गया, जिससे भगोड़े अपराधी की गैर-मौजूदगी में भी ट्रायल से लेकर अभियोजन तक की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

भारतपोल और वैश्विक समन्वय

2022 में भारत ने 90वीं इंटरपोल जनरल असेंबली की मेजबानी की, जिसमें गृह मंत्री शाह ने वैश्विक पुलिसिंग में कम्युनिकेशन, कोलैबोरेशन और कोऑपरेशन का संदेश दिया। इसके बाद जनवरी 2025 में 'भारतपोल' लॉन्च किया गया, जिसने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एकीकृत सूचना ढाँचे में जोड़ा। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस इस पोर्टल से जुड़कर सूचना का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे एजेंसियों के बीच सूचना-साझेदारी के प्रतिक्रिया समय में भारी कमी आई है।

सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों की धरपकड़ के लिए विशेष ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर स्थापित किया है, जो इंटरपोल के माध्यम से दुनियाभर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए हर राज्य व केंद्रीय जाँच एजेंसी में इंटरपोल संपर्क अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

रेड कॉर्नर नोटिस और ऑपरेशन त्रिशूल

इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है — 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 नोटिस जारी हो चुके हैं। भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया, जिसके तहत इंटरपोल के सहयोग से सैटेलाइट, सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर छिपे अपराधियों की लोकेशन स्थापित की गई।

संपत्ति जब्ती और आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा

मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) को सख्ती से लागू करते हुए सरकार ने 2019 से 2026 के बीच भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की। इसी अवधि में ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी भी की गई, जिसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है। वापस लाए गए भगोड़ों में आतंकवादी, गैंगस्टर, वित्तीय अपराधी, नार्कोटिक्स आरोपी और हत्या, बलात्कार तथा पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं।

इस अभियान का सबसे चर्चित उदाहरण तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण है, जिसे भारत के संकल्प और जटिल आतंकवाद मामलों में धैर्यपूर्ण कानूनी-कूटनीतिक प्रयास का प्रतीक माना जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग आतंकवाद, नार्को-टेरर और सीमा-पार सहायता नेटवर्क को चलाने में हो रहा था।

बहु-एजेंसी ढाँचा और आगे की राह

देश के भीतर समन्वय में आईबी, सीबीआई, रॉ, एनआईए, ईडी, एमईए, एनसीबी, डीजीजीआई और राज्य पुलिस की साझा भूमिका है। जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में यह तंत्र और अधिक सुदृढ़ होगा तथा विदेशों में शरण लेकर कानूनी कार्रवाई से बचना पहले से कहीं अधिक कठिन होता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

874 करोड़ की जब्ती प्रभावशाली आँकड़े हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने मामलों में अदालत में दोषसिद्धि हुई — क्योंकि प्रत्यर्पण और सज़ा के बीच की खाई भारतीय न्याय प्रणाली की पुरानी कमज़ोरी रही है। 'अनुपस्थिति में मुकदमा' का प्रावधान कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है, परंतु अंतरराष्ट्रीय अदालतों में इसकी स्वीकार्यता अभी परखी जानी बाकी है। भारतपोल और ऑपरेशन त्रिशूल जैसे संस्थागत कदम सराहनीय हैं, लेकिन विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में वर्षों की कानूनी लड़ाई यह याद दिलाती है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और तकनीकी तंत्र के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2019 से भारत ने कितने भगोड़े अपराधी वापस लाए हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। इस दौरान भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त और ₹18,762 करोड़ की वापसी भी की गई।
भारतपोल क्या है और यह कैसे काम करता है?
भारतपोल जनवरी 2025 में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च किया गया एकीकृत सूचना ढाँचा है, जो सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एक पोर्टल पर जोड़ता है। इससे 1,400 से अधिक एजेंसी यूनिट इंटरपोल के माध्यम से रियल-टाइम सूचना साझा कर सकती हैं।
ऑपरेशन त्रिशूल क्या है?
ऑपरेशन त्रिशूल भगोड़े अपराधियों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए चलाया गया विशेष अभियान है। इसके तहत इंटरपोल के सहयोग से सैटेलाइट, सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर विदेशों में छिपे अपराधियों की सटीक लोकेशन स्थापित की जाती है।
बीएनएस में 'अनुपस्थिति में मुकदमा' का प्रावधान क्या है?
2024 में लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 355 और 356 में पहली बार यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई अपराधी विदेश में छिपा हो, तो उसकी अनुपस्थिति में भी ट्रायल से लेकर अभियोजन तक की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यह भगोड़ों को कानूनी प्रक्रिया से बाहर रहकर बचने से रोकने का प्रयास है।
तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण क्यों महत्वपूर्ण है?
तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के जटिल आतंकवाद मामलों में धैर्यपूर्ण कानूनी और कूटनीतिक प्रयास का प्रतीक माना जा रहा है। यह मामला दर्शाता है कि भारत अब हाई-प्रोफाइल आतंकवाद से जुड़े मामलों में भी दीर्घकालिक कानूनी लड़ाई लड़कर प्रत्यर्पण हासिल करने में सक्षम है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले