4 अप्रैल का पंचांग: बैशाख कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि, भद्रा और शुभ-अशुभ समय की जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- 4 अप्रैल का पंचांग महत्वपूर्ण है।
- भद्रा का समय शुभ कार्यों में सावधानी का संकेत है।
- अमृत काल में काम करना फलदायी रहेगा।
- शुभ और अशुभ समय की जानकारी से कार्यों की सफलता बढ़ सकती है।
- विशेष योग का ध्यान रखना चाहिए।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है। इसके पांच अंग—नक्षत्र, योग, करण, वार और पक्ष—के माध्यम से दिन की शुरुआत तथा शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। 4 अप्रैल को शनिवार है, जो कि बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है।
इस दिन कई महत्वपूर्ण योग और मुहूर्त बन रहे हैं। भद्रा का समय भी होगा, इसलिए कुछ शुभ कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए।
शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:08 बजे और सूर्यास्त शाम 6:41 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 9:01 बजे होगा। कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 10:08 बजे तक रहेगी, उसके बाद कृष्ण तृतीया होगी। हालांकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन द्वितीया का ही मान होगा। स्वाती नक्षत्र शाम 9:35 बजे तक, इसके बाद विशाखा और हर्षण योग दोपहर 2:17 बजे तक तथा गर करण सुबह 10:08 बजे तक रहेगा।
4 अप्रैल को भद्रा का समय होने के कारण कुछ शुभ कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए। अमृत काल और सर्वार्थ सिद्धि योग में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करना फलदायी रहेगा। राहुकाल में यात्रा या नया काम शुरू करने से बचें।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो 4 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:36 बजे से 5:22 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:59 बजे से 12:49 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:20 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:39 बजे से 7:02 बजे तक रहेगा। वहीं, अमृत काल दोपहर 11:59 बजे से 1:44 बजे तक और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:08 बजे से शाम 9:35 बजे तक रहेगा।
शनिवार को अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 9:16 बजे से 10:50 बजे तक, यमगंड दोपहर 1:58 बजे से 3:32 बजे तक, गुलिक काल सुबह 6:08 बजे से 7:42 बजे तक और दुर्मुहूर्त सुबह 6:08 बजे से 6:58 बजे तक रहेगा। शनिवार को भद्रा की छाया भी रहेगी। रात 11:01 बजे से अगले दिन सुबह 6:07 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा।