अभिषेक बनर्जी का बड़ा आरोप: पश्चिम बंगाल पुलिस ने 25 लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी ने 2 जुलाई 2026 को कोलकाता में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस की STF/CID ने पिछले कुछ हफ्तों में उनके कार्यालय से जुड़े या उनसे संबंधित लगभग 25 लोगों को बिना उचित सूचना और बुनियादी कानूनी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करते हुए अचानक तलब किया या मनमाने ढंग से हिरासत में लिया। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए कहा, 'मैं अपनी आखिरी सांस तक झुकूंगा नहीं।'
अभिषेक के आरोप: क्या कहा सांसद ने
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन 25 लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है और उन पर उनके (अभिषेक के) खिलाफ झूठे बयान देने के लिए दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों के फोन टैप किए जा रहे हैं और परिवार के सदस्यों — जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं — को भी कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है।
अभिषेक ने कहा, 'यह राजनीतिक धमकियों का सबसे बुरा रूप है। जिस सरकार के मुख्यमंत्री को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद किया गया था और जिन पर सीबीआई के कई मामले लंबित हैं, वही सरकार अब मुझे निशाना बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।' उन्होंने स्पष्ट किया, 'आप जो चाहें करें — मैं झुकूंगा नहीं।'
अदालती नोटिस और आवाज़ के नमूने का विवाद
1 जुलाई 2026 को उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभिषेक बनर्जी को नोटिस जारी किया। उन्हें 8 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे तक अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है, ताकि CID अधिकारी न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में उनके आवाज़ के नमूने ले सकें।
अभिषेक पर आरोप है कि उन्होंने एक चुनावी रैली में हिंसा भड़काने वाले बयान दिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकाया। गौरतलब है कि अभिषेक मंगलवार को जिला अदालत में पेश नहीं हुए, क्योंकि कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ में उनकी उस याचिका पर सुनवाई चल रही थी जिसमें उन्होंने जिला अदालत के आवाज़ नमूना आदेश को चुनौती दी थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC और विपक्षी दलों के बीच तनाव चरम पर है। अभिषेक बनर्जी, जो TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं, लंबे समय से राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका में हैं। आलोचकों का कहना है कि राज्य पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल में नई बात नहीं है — यह एक दीर्घकालिक प्रवृत्ति रही है जिस पर विभिन्न दलों ने समय-समय पर सवाल उठाए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब CBI के कई मामले राज्य सरकार से जुड़े व्यक्तियों पर लंबित बताए जाते हैं, और केंद्र-राज्य संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।
आगे क्या होगा
अभिषेक बनर्जी की 8 जुलाई को बिधाननगर कोर्ट में उपस्थिति और कलकत्ता उच्च न्यायालय में उनकी याचिका पर सुनवाई का परिणाम इस मामले की अगली दिशा तय करेगा। यदि उच्च न्यायालय आवाज़ नमूना आदेश पर रोक लगाता है, तो CID की कार्यवाही अस्थायी रूप से रुक सकती है। राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर यह मामला आने वाले दिनों में और गहरा होने की संभावना है।