अहमदाबाद विमान हादसे की पहली बरसी: एक साल बाद भी उस जगह से गुजरने में काँपते हैं बचे हुए लोग
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद में हुए विमान हादसे को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन उस त्रासदी के ज़ख्म अभी भी ताज़े हैं। जो लोग उस हादसे में बाल-बाल बचे थे, वे आज भी मेघानीनगर स्थित उस जगह से गुजरने में डर महसूस करते हैं। इस हादसे में ज़मीन पर मौजूद 19 लोगों समेत कुल 260 लोगों की जानें गई थीं।
बचे हुए लोगों की ज़ुबानी
मेडिकल छात्र भागीरथ चावड़ा उन भाग्यशाली लोगों में से एक हैं जो कुछ ही मिनटों के अंतर से मौत से बच गए थे। उन्होंने बताया कि उस जगह का नज़ारा 'दुखद और डरावना' था।
चावड़ा ने कहा, 'उस समय मैंने मेस में खाना खत्म किया था और अपने हॉस्टल वापस जा रहा था। तभी एक धमाका हुआ और हम सबने देखा कि क्या हुआ है।' उन्होंने आगे बताया, 'वहाँ पहुँचने पर पता चला कि एक विमान क्रैश हो गया है और वह दो हिस्सों में बँट गया है — एक हिस्सा 'अतुल्यम' बिल्डिंग से टकराया था, और दूसरा हिस्सा हमारी मेस की छत पर गिरा था, जिससे चार छात्रों की मौत हो गई थी।'
अपने भयावह अनुभव को याद करते हुए चावड़ा ने कहा, 'हम बिल्कुल सुन्न हो गए थे और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। फिर भी हमने हिम्मत जुटाई और फँसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए बिल्डिंग के अंदर गए। उनमें से कुछ घायल थे और चार लोगों की मौत हो चुकी थी।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमें अब भी उस जगह से गुजरने में डर लगता है। जब भी कोई विमान ऊपर से गुजरता है, उस घटना की याद आ जाती है।'
पीड़ित परिवारों का दर्द
हादसे की पहली बरसी पर पीड़ित परिवारों के सदस्य मेघानीनगर में क्रैश वाली जगह पर प्रार्थना करने, रस्में निभाने और जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए।
गुंजन चौधरी अपनी पत्नी को श्रद्धांजलि देने आए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी उनसे मिलने लंदन जा रही थीं और उस वक्त दो महीने की गर्भवती थीं। भावुक चौधरी ने कहा, 'उन्होंने दोपहर 1:38 बजे फ्लाइट में चढ़ते समय मुझे फोन किया था और कहा था कि मैं सीधे अपने काम की जगह से लंदन में एयरपोर्ट पहुँच जाऊँ।' इस नुकसान ने उनके पूरे परिवार को गहरे दुख में डाल दिया।
चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि जाँच की अंतिम रिपोर्ट जल्द से जल्द जारी की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
जाँच की स्थिति
सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि इस हादसे की गहन जाँच जारी है। सभी ज़रूरी अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और विचार-विमर्श की प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी। गौरतलब है कि विमान हादसों की जाँच में अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत एकाधिक देशों की भागीदारी होती है, जिससे प्रक्रिया में समय लग सकता है।
आर्थिक मदद की गुहार
पीड़ितों में से एक के भाई प्रताप सिंह ने सरकार से अपनी पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता की अपील की। उन्होंने बताया, 'मैं भी आगे की पढ़ाई करना चाहता हूँ, लेकिन मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर है। मेरे पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं। सरकार से बस यही अपील है कि वे हमें मदद दें।' यह हादसा उन परिवारों के लिए न केवल भावनात्मक, बल्कि आर्थिक संकट भी बन गया है।
आगे की राह
हादसे की बरसी पर बचे हुए लोगों और पीड़ित परिवारों की आवाज़ एक ही माँग पर केंद्रित है — जाँच रिपोर्ट, न्याय और पुनर्वास। जब तक अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और पीड़ितों को उचित सहायता नहीं मिलती, अहमदाबाद के उस इलाके की हवा में वह दर्द बना रहेगा।