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अहमदाबाद विमान हादसे की पहली बरसी: एक साल बाद भी उस जगह से गुजरने में काँपते हैं बचे हुए लोग

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अहमदाबाद विमान हादसे की पहली बरसी: एक साल बाद भी उस जगह से गुजरने में काँपते हैं बचे हुए लोग

सारांश

अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल हो गया, लेकिन 260 मौतों का दर्द कम नहीं हुआ। बचे हुए छात्र अब भी उस जगह से गुजरने में काँपते हैं, पीड़ित परिवार न्याय की राह देख रहे हैं और जाँच की अंतिम रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं हुई।

मुख्य बातें

अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल पूरा हुआ; इसमें ज़मीन पर मौजूद 19 लोगों समेत कुल 260 लोगों की जान गई थी।
मेडिकल छात्र भागीरथ चावड़ा समेत बचे हुए लोग आज भी मेघानीनगर स्थित क्रैश स्थल से गुजरने में डर महसूस करते हैं।
विमान के एक हिस्से ने 'अतुल्यम' बिल्डिंग को और दूसरे ने मेस की छत को टक्कर मारी थी, जिसमें चार छात्रों की मौत हुई।
पीड़ित गुंजन चौधरी की पत्नी लंदन जाते समय दो महीने की गर्भवती थीं; उन्होंने PM मोदी से जाँच रिपोर्ट जल्द जारी करने की अपील की।
सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम जाँच रिपोर्ट जारी होगी।
पीड़ित के भाई प्रताप सिंह ने सरकार से पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाई।

अहमदाबाद में हुए विमान हादसे को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन उस त्रासदी के ज़ख्म अभी भी ताज़े हैं। जो लोग उस हादसे में बाल-बाल बचे थे, वे आज भी मेघानीनगर स्थित उस जगह से गुजरने में डर महसूस करते हैं। इस हादसे में ज़मीन पर मौजूद 19 लोगों समेत कुल 260 लोगों की जानें गई थीं।

बचे हुए लोगों की ज़ुबानी

मेडिकल छात्र भागीरथ चावड़ा उन भाग्यशाली लोगों में से एक हैं जो कुछ ही मिनटों के अंतर से मौत से बच गए थे। उन्होंने बताया कि उस जगह का नज़ारा 'दुखद और डरावना' था।

चावड़ा ने कहा, 'उस समय मैंने मेस में खाना खत्म किया था और अपने हॉस्टल वापस जा रहा था। तभी एक धमाका हुआ और हम सबने देखा कि क्या हुआ है।' उन्होंने आगे बताया, 'वहाँ पहुँचने पर पता चला कि एक विमान क्रैश हो गया है और वह दो हिस्सों में बँट गया है — एक हिस्सा 'अतुल्यम' बिल्डिंग से टकराया था, और दूसरा हिस्सा हमारी मेस की छत पर गिरा था, जिससे चार छात्रों की मौत हो गई थी।'

अपने भयावह अनुभव को याद करते हुए चावड़ा ने कहा, 'हम बिल्कुल सुन्न हो गए थे और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। फिर भी हमने हिम्मत जुटाई और फँसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए बिल्डिंग के अंदर गए। उनमें से कुछ घायल थे और चार लोगों की मौत हो चुकी थी।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमें अब भी उस जगह से गुजरने में डर लगता है। जब भी कोई विमान ऊपर से गुजरता है, उस घटना की याद आ जाती है।'

पीड़ित परिवारों का दर्द

हादसे की पहली बरसी पर पीड़ित परिवारों के सदस्य मेघानीनगर में क्रैश वाली जगह पर प्रार्थना करने, रस्में निभाने और जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए।

गुंजन चौधरी अपनी पत्नी को श्रद्धांजलि देने आए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी उनसे मिलने लंदन जा रही थीं और उस वक्त दो महीने की गर्भवती थीं। भावुक चौधरी ने कहा, 'उन्होंने दोपहर 1:38 बजे फ्लाइट में चढ़ते समय मुझे फोन किया था और कहा था कि मैं सीधे अपने काम की जगह से लंदन में एयरपोर्ट पहुँच जाऊँ।' इस नुकसान ने उनके पूरे परिवार को गहरे दुख में डाल दिया।

चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि जाँच की अंतिम रिपोर्ट जल्द से जल्द जारी की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।

जाँच की स्थिति

सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि इस हादसे की गहन जाँच जारी है। सभी ज़रूरी अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और विचार-विमर्श की प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी। गौरतलब है कि विमान हादसों की जाँच में अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत एकाधिक देशों की भागीदारी होती है, जिससे प्रक्रिया में समय लग सकता है।

आर्थिक मदद की गुहार

पीड़ितों में से एक के भाई प्रताप सिंह ने सरकार से अपनी पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता की अपील की। उन्होंने बताया, 'मैं भी आगे की पढ़ाई करना चाहता हूँ, लेकिन मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर है। मेरे पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं। सरकार से बस यही अपील है कि वे हमें मदद दें।' यह हादसा उन परिवारों के लिए न केवल भावनात्मक, बल्कि आर्थिक संकट भी बन गया है।

आगे की राह

हादसे की बरसी पर बचे हुए लोगों और पीड़ित परिवारों की आवाज़ एक ही माँग पर केंद्रित है — जाँच रिपोर्ट, न्याय और पुनर्वास। जब तक अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और पीड़ितों को उचित सहायता नहीं मिलती, अहमदाबाद के उस इलाके की हवा में वह दर्द बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर जवाबदेही की प्रतीक्षा। भारत में बड़े विमान हादसों के बाद जाँच रिपोर्टें अक्सर वर्षों तक लंबित रहती हैं, जिससे परिवारों को न्यायिक और बीमा प्रक्रियाओं में भी अड़चनें आती हैं। प्रताप सिंह जैसे युवाओं की आर्थिक गुहार यह बताती है कि राहत और पुनर्वास का ढाँचा अभी भी अधूरा है। सरकार की 'प्रक्रिया जारी है' वाली भाषा तकनीकी रूप से सही हो सकती है, लेकिन एक साल की देरी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद विमान हादसे में कितने लोगों की मौत हुई थी?
इस हादसे में कुल 260 लोगों की जान गई थी, जिनमें ज़मीन पर मौजूद 19 लोग भी शामिल थे। विमान के दो हिस्से हो गए थे — एक 'अतुल्यम' बिल्डिंग से टकराया और दूसरा एक मेस की छत पर गिरा, जिससे चार छात्रों की मौत हुई।
अहमदाबाद प्लेन क्रैश की जाँच रिपोर्ट कब आएगी?
सरकार ने कहा है कि सभी ज़रूरी अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और विचार-विमर्श की प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी। अभी तक कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।
बचे हुए लोगों पर इस हादसे का क्या असर पड़ा है?
मेडिकल छात्र भागीरथ चावड़ा जैसे बचे हुए लोग एक साल बाद भी मेघानीनगर स्थित उस जगह से गुजरने में डर महसूस करते हैं। उनके अनुसार ऊपर से गुजरने वाला हर विमान उस हादसे की याद ताज़ा कर देता है।
पीड़ित परिवार सरकार से क्या माँग कर रहे हैं?
पीड़ित परिवार जाँच की अंतिम रिपोर्ट जल्द जारी करने और न्याय दिलाने की माँग कर रहे हैं। इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के सदस्य शिक्षा व पुनर्वास के लिए सरकारी सहायता की अपील भी कर रहे हैं।
हादसे की बरसी पर क्रैश स्थल पर क्या हुआ?
पीड़ितों के परिवार मेघानीनगर स्थित क्रैश स्थल पर एकत्रित हुए और प्रार्थना, रस्में निभाकर जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। कई परिजन भावुक होकर अपने प्रियजनों की यादें साझा करते दिखे।
राष्ट्र प्रेस
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