एम्स दिल्ली ने महिला मरीज से दुर्व्यवहार पर सिक्योरिटी गार्ड धनंजय सिंह को बर्खास्त किया, पुलिस शिकायत दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने 8 अगस्त को एक महिला मरीज के साथ दुर्व्यवहार के मामले में सिक्योरिटी गार्ड धनंजय सिंह को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया। संस्थान ने संबंधित सिक्योरिटी एजेंसी पर जुर्माना लगाया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है।
मुख्य घटनाक्रम
एम्स परिसर में हुए इस दुर्व्यवहार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिसके बाद सार्वजनिक दबाव बढ़ा और कड़ी कार्रवाई की माँग उठने लगी। घटना की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रबंधन ने बिना देरी किए अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू की।
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के अस्पतालों में महिला मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक संस्थान में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एम्स की आधिकारिक प्रतिक्रिया
एम्स ने अपने आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया: 'गार्ड को नौकरी से निकाल दिया गया है, सिक्योरिटी एजेंसी पर जुर्माना लगाया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।' संस्थान ने यह भी दोहराया कि वह महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न और गलत व्यवहार के मामले में 'जीरो-टॉलरेंस' नीति पर अडिग है।
एम्स ने आश्वस्त किया कि वह 'सभी मरीजों व उनके साथ आने वाले लोगों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।'
आम जनता और सोशल मीडिया पर असर
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नागरिकों का कहना था कि अस्पताल जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक स्थान सभी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित होने चाहिए। इस घटना ने अस्पताल परिसरों में तैनात सुरक्षा कर्मियों की जाँच और प्रशिक्षण प्रक्रिया पर नए सिरे से विचार करने की ज़रूरत रेखांकित की है।
क्या होगा आगे
पुलिस शिकायत दर्ज होने के बाद धनंजय सिंह के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही अपने स्वाभाविक क्रम में आगे बढ़ेगी। एम्स प्रबंधन से अपेक्षा है कि वह परिसर में सुरक्षा एजेंसियों के चयन और निगरानी की प्रक्रिया की समीक्षा करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।