वायुसेना के 42 स्कूलों के 261 शिक्षक बने साइबर अपराध हस्तक्षेप अधिकारी, छात्रों की डिजिटल सुरक्षा होगी मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन एयर फोर्स एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसाइटी ने देशभर के 42 वायुसेना विद्यालयों के 261 शिक्षकों को साइबर क्राइम इंटरवेंशन ऑफिसर (साइबर अपराध हस्तक्षेप अधिकारी) के रूप में प्रशिक्षित एवं प्रमाणित किया है, जिसका उद्देश्य डिजिटल स्पेस में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वायुसेना मुख्यालय के तत्वावधान में शुरू किए गए इस अभियान की जानकारी 2 नवंबर 2026 को एक अधिकारी ने नई दिल्ली में दी। यह पहल राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के उपलक्ष्य में की गई है।
कार्यक्रम की रूपरेखा
यह प्रशिक्षण सूचना साझाकरण एवं विश्लेषण केंद्र फाउंडेशन (ISAC फाउंडेशन) के माध्यम से संचालित बाल डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम 'स्क्रॉलकंट्रोल' के अंतर्गत दिया गया है। प्रमाणन पाठ्यक्रम पूरा करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय सुरक्षा डेटाबेस में पंजीकृत किया गया है। गौरतलब है कि यह देश के किसी भी सशस्त्र बल शिक्षा नेटवर्क में इस पैमाने पर की गई पहली ऐसी संरचित साइबर सुरक्षा क्षमता-निर्माण पहल बताई जा रही है।
किन खतरों से होगी सुरक्षा
प्रशिक्षित शिक्षक बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग, गेमिंग से जुड़े नुकसान और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, वे डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने और घटना के प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करने में भी प्रशिक्षित हैं। बयान के अनुसार, किफायती हाई-स्पीड इंटरनेट और सोशल मीडिया की व्यापक पहुँच के इस दौर में स्कूली बच्चे उन डिजिटल प्लेटफार्मों के संपर्क में आ रहे हैं जो मुख्यतः वयस्कों के लिए बनाए गए हैं।
स्कूलों को मिलेंगी नई क्षमताएँ
स्क्रॉलकंट्रोल प्लेटफॉर्म के ज़रिये वायुसेना के विद्यालय अब साइबर क्लब स्थापित कर सकेंगे, छात्रों को साइबर सुरक्षा प्रमाण पत्र दे सकेंगे और अभिभावकों व कर्मचारियों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित कर सकेंगे। इसके साथ ही परिवारों के लिए आयु-उपयुक्त सामग्री रेटिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग और 'साइबर सुरक्षित विद्यालय' की आधिकारिक मान्यता प्राप्त करना भी संभव होगा।
24x7 पीड़ित सहायता का प्रावधान
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत ISAC फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षकों का प्रशिक्षण और प्रमाणन किया गया है। साथ ही, साइबर वकीलों, साइबर मनोवैज्ञानिकों और फोरेंसिक विशेषज्ञों के बहु-विषयक नेटवर्क के ज़रिये 24 घंटे, सातों दिन पीड़ित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पहले ही अपने संबद्ध स्कूलों को हर माह 'साइबर जागरूकता दिवस' मनाने का निर्देश दे चुका है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
यह पहल भारत सरकार की बढ़ती इस मान्यता का हिस्सा है कि स्कूल-स्तर पर साइबर सुरक्षा शिक्षा को संस्थागत रूप देना ज़रूरी है। वायुसेना विद्यालयों का यह मॉडल आगे चलकर अन्य सरकारी और अर्ध-सरकारी शिक्षण संस्थानों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।