अजित दादा का निधन: महाराष्ट्र में एक अद्वितीय नेता की कमी महसूस हो रही है, देवेंद्र फडणवीस
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मुंबई, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को बताया कि अजित पवार जैसे नेता महाराष्ट्र के सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन राज्य को उनका नेतृत्व उस वास्तविकता में नहीं मिल सका। उनके निधन से जो खालीपन उत्पन्न हुआ है, वह अब सच में वैक्यूम शब्द का सही अर्थ समझा रहा है।
विधानसभा के बजट सत्र के आरंभ में शोक प्रस्ताव के दौरान उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस खालीपन को भरना असंभव है। फडणवीस ने कहा, “ऐसे नेता जैसे दादा फिर कभी नहीं मिलेंगे।”
फडणवीस ने याद किया कि विधानसभा सत्र के दौरान अजित पवार हमेशा सबसे पहले विधान भवन पहुंचते थे और सदन की कार्यवाही के अंत तक अपनी सीट पर रहते थे। यह बहुत दुखद है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करते और अगले साल 13वां बजट पेश करके बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेते, लेकिन इससे पहले उनका निधन हो गया।
इस बार बजट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी खुद फडणवीस ने संभाली है। उन्होंने कहा कि बजट के मामलों में अजित पवार कभी भी कठिन निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि जब वित्त विभाग ने ‘लड़की बहिन’ योजना पर आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए पुनर्विचार करने का सुझाव दिया था, तब भी अजित पवार अपने निर्णय पर अडिग रहे और योजना को लागू करने के लिए सुनिश्चित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “लड़की बहन योजना शुरू होने के बाद अजित पवार ने गुलाबी जैकेट पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने हमें भी वह जैकेट पहनाई थी। अब यह सब केवल यादें रह गई हैं। यह शोक प्रस्ताव लाना मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन मेरे लिए यह एक भावनात्मक क्षण है।”
महाकवि भास के नाटक स्वप्नवासवदत्तम की एक पंक्ति का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा कि अजित पवार का जाना केवल राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत दुख भी है।
उन्होंने कहा, “कहते हैं समय हर घाव भर देता है, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी कम नहीं होते। यह भी ऐसा ही दर्द है। किसी नेता के जाने के बाद हम अक्सर कहते हैं कि एक खालीपन बन गया है, लेकिन जब अजित दादा जैसे नेता जाते हैं, तब सच में उस शब्द का मतलब समझ में आता है। उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता।”
मुख्यमंत्री ने एक प्रेरक पंक्ति भी दोहराई, “काम को जिंदगी दो और मौत को आराम।” अजित पवार को ऐसे नेता बताया जिन्होंने अपने जीवन का हर पल कार्य के लिए समर्पित किया।
फडणवीस ने कहा, “हम दोनों का जन्म 22 जुलाई को हुआ था। वह मुझसे 11 साल बड़े थे, इसलिए सच मायनों में मेरे dada थे। हमारी दस साल से अधिक समय तक गहरी दोस्ती रही। हम 1999 में मिले, लेकिन 2014 के बाद हमारे बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया। मैं एनसीपी को राजनीतिक सहयोगी मानता था, लेकिन अजित दादा को हमेशा भावनात्मक रूप से करीब माना।”
उन्होंने 2019 में सरकार गठन के विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे, जो हर स्थिति में अपनी बात स्पष्टता से रखते थे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “2019 में सरकार बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन बाद में उनके सीनियर नेताओं ने अपना निर्णय बदला, फिर भी उन्होंने मुझसे वादा किया था और उसे निभाने का निर्णय लिया। कई लोग इसे ‘सुबह-सुबह की शपथ’ कहते थे, लेकिन दादा को इस बात से चिढ़ होती थी। उनका कहना था कि ‘सुबह-सुबह’ का मतलब छह बजे होता है, जबकि हमने नौ बजे शपथ ली थी। उन्हें इस निर्णय की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जब सुप्रीम कोर्ट ने हमारे खिलाफ फैसला दिया, तब हम दोनों ‘वर्षा’ बंगले पर मौजूद थे। मैंने उनसे कहा था कि वे अपना निर्णय खुद लें, क्योंकि उन्हें अपने साथ जुड़े लोगों के भविष्य के बारे में भी सोचना है।”
फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार समय के बेहद पाबंद नेता थे और उनका राजनीतिक सफर भी लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “दादा हमेशा समय का पूरा ध्यान रखते थे, लेकिन इस बार वे अपनी ही समय सीमा से चूक गए। सभी ने उन्हें लंबी पारी खेलते देखा, लेकिन वे बहुत जल्दी हमें छोड़कर चले गए।”
उन्होंने बताया कि अजित पवार छह बार उपमुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वे अक्सर मजाक में कहते थे, “मैं किसी दिन मुख्यमंत्री बनूंगा लेकिन अभी के लिए उपमुख्यमंत्री ही ठीक है।”