17 जुलाई 2026
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अखिल गोगोई का 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर हमला: 'संघीय ढाँचे को तोड़ने की साज़िश'

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अखिल गोगोई का 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर हमला: 'संघीय ढाँचे को तोड़ने की साज़िश'

सारांश

शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को संविधान की भावना के विरुद्ध बताया और इसे एकात्मक शासन थोपने की कोशिश करार दिया। उन्होंने जन आंदोलन की चेतावनी देते हुए केंद्र से प्रस्ताव वापस लेने की माँग की।

मुख्य बातें

रायजोर दल अध्यक्ष और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने 16 जुलाई को गुवाहाटी में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (ONOE) की कड़ी आलोचना की।
गोगोई ने आरोप लगाया कि यह पहल भारत को संघीय लोकतंत्र से एकात्मक राज्य में बदलने का प्रयास है।
उन्होंने इसे तानाशाही मानसिकता का प्रतीक बताया और केंद्र से प्रस्ताव वापस लेने की माँग की।
गोगोई ने चेतावनी दी कि प्रस्ताव लागू होने पर राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन होगा।
केंद्र सरकार ONOE को चुनावी खर्च घटाने और शासन सुधार का ज़रिया बताती है; विपक्ष संवैधानिक और संघीय चिंताएँ उठा रहा है।

रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने 16 जुलाई को गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्र सरकार की प्रस्तावित 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (ONOE) पहल को संविधान-विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम भारत के संघीय ढाँचे को कमज़ोर कर सत्ता को केंद्र में सिमटाने की कोशिश है।

मुख्य आरोप और बयान

गोगोई ने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' भारत को संघीय लोकतंत्र से पूर्णतः एकात्मक राज्य में बदलने का प्रयास है। उनके अनुसार, 'भारत राज्यों का संघ है, और किसी भी सरकार को इस संवैधानिक सिद्धांत को कमज़ोर करने का अधिकार नहीं है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पहल तानाशाही मानसिकता को दर्शाती है।

गोगोई के अनुसार, एक साथ चुनाव कराने से राज्यों की स्वायत्तता घटेगी और संविधान द्वारा परिकल्पित संघीय संतुलन बिगड़ेगा। उन्होंने केंद्र से यह प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की माँग की।

जन आंदोलन की चेतावनी

विधायक गोगोई ने चेतावनी दी कि यदि यह प्रस्ताव जनता पर थोपा गया, तो पूरे देश में एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन खड़ा होगा जिसमें नागरिक संविधान और भारत के संघीय स्वरूप की रक्षा के लिए एकजुट होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल और नागरिक समाज संगठन इसे लागू करने के किसी भी प्रयास का सक्रिय विरोध करेंगे।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का तर्क है कि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च में कटौती होगी, शासन में निरंतरता आएगी और बार-बार चुनाव होने से उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक बाधाएँ कम होंगी। सरकार इसे दीर्घकालिक शासन-सुधार के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का प्रस्ताव देश भर में तीखी राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। गौरतलब है कि कई विपक्षी दल — संवैधानिक, व्यवस्थागत और संघीय चिंताओं का हवाला देते हुए — पहले ही इसका विरोध दर्ज करा चुके हैं। यह मुद्दा केंद्र और विपक्ष के बीच प्रमुख राजनीतिक विवादों में से एक बना हुआ है। आने वाले समय में संसदीय बहस और राज्यों की प्रतिक्रियाएँ इस प्रस्ताव की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केंद्रीकरण की परियोजना मानती है। असल सवाल यह है कि क्या सरकार ने राज्यों की विधानसभाओं की अवधि बाधित किए बिना एक साथ चुनाव कराने का कोई व्यावहारिक रोडमैप पेश किया है — जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ। संघवाद की रक्षा का नारा राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह चूक जाती है कि ONOE के तकनीकी और संवैधानिक अवरोध — जैसे अनुच्छेद 83, 85, 172 और 174 में संशोधन — किसी भी सरकार के लिए सरल नहीं होंगे।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' क्या है और अखिल गोगोई ने इसका विरोध क्यों किया?
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' केंद्र सरकार का वह प्रस्ताव है जिसमें लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की बात है। अखिल गोगोई का कहना है कि यह भारत के संघीय ढाँचे को कमज़ोर करता है और राज्यों की स्वायत्तता छीनता है।
अखिल गोगोई ने क्या चेतावनी दी है?
गोगोई ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव जनता पर थोपा गया तो पूरे देश में व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन होगा। उन्होंने विपक्षी दलों और नागरिक समाज के एकजुट होने का भी संकेत दिया।
केंद्र सरकार 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के पक्ष में क्या तर्क देती है?
सरकार का तर्क है कि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च में कमी आएगी, शासन में निरंतरता बनेगी और बार-बार चुनावों से होने वाली प्रशासनिक बाधाएँ दूर होंगी।
रायजोर दल और अखिल गोगोई कौन हैं?
रायजोर दल असम का एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है जिसके अध्यक्ष अखिल गोगोई हैं। गोगोई शिवसागर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और किसान-अधिकार आंदोलन से उभरे एक प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक चेहरा हैं।
क्या अन्य विपक्षी दल भी ONOE का विरोध कर रहे हैं?
हाँ, कई विपक्षी दल संवैधानिक, व्यवस्थागत और संघीय चिंताओं का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। यह मुद्दा केंद्र और विपक्ष के बीच प्रमुख राजनीतिक विवादों में से एक बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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