अखिल गोगोई का 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर हमला: 'संघीय ढाँचे को तोड़ने की साज़िश'
सारांश
मुख्य बातें
रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने 16 जुलाई को गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्र सरकार की प्रस्तावित 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (ONOE) पहल को संविधान-विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम भारत के संघीय ढाँचे को कमज़ोर कर सत्ता को केंद्र में सिमटाने की कोशिश है।
मुख्य आरोप और बयान
गोगोई ने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' भारत को संघीय लोकतंत्र से पूर्णतः एकात्मक राज्य में बदलने का प्रयास है। उनके अनुसार, 'भारत राज्यों का संघ है, और किसी भी सरकार को इस संवैधानिक सिद्धांत को कमज़ोर करने का अधिकार नहीं है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पहल तानाशाही मानसिकता को दर्शाती है।
गोगोई के अनुसार, एक साथ चुनाव कराने से राज्यों की स्वायत्तता घटेगी और संविधान द्वारा परिकल्पित संघीय संतुलन बिगड़ेगा। उन्होंने केंद्र से यह प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की माँग की।
जन आंदोलन की चेतावनी
विधायक गोगोई ने चेतावनी दी कि यदि यह प्रस्ताव जनता पर थोपा गया, तो पूरे देश में एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन खड़ा होगा जिसमें नागरिक संविधान और भारत के संघीय स्वरूप की रक्षा के लिए एकजुट होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल और नागरिक समाज संगठन इसे लागू करने के किसी भी प्रयास का सक्रिय विरोध करेंगे।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार का तर्क है कि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च में कटौती होगी, शासन में निरंतरता आएगी और बार-बार चुनाव होने से उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक बाधाएँ कम होंगी। सरकार इसे दीर्घकालिक शासन-सुधार के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का प्रस्ताव देश भर में तीखी राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। गौरतलब है कि कई विपक्षी दल — संवैधानिक, व्यवस्थागत और संघीय चिंताओं का हवाला देते हुए — पहले ही इसका विरोध दर्ज करा चुके हैं। यह मुद्दा केंद्र और विपक्ष के बीच प्रमुख राजनीतिक विवादों में से एक बना हुआ है। आने वाले समय में संसदीय बहस और राज्यों की प्रतिक्रियाएँ इस प्रस्ताव की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।