कुर्मी समुदाय से अखिलेश यादव को क्या आपत्ति: ओपी राजभर का तीखा सवाल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने 30 जुलाई को आजमगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर जातीय पक्षपात का आरोप लगाया। राजभर ने सीधे सवाल किया कि अखिलेश यादव को कुर्मी समुदाय के लोगों से क्या परेशानी है।
अखिलेश पर जातीय भेदभाव का आरोप
ओपी राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव जेल में रमाकांत यादव से मिलने गए, लेकिन आजम खान से मिलने नहीं पहुंचे। उन्होंने आगे कहा कि सपा प्रमुख यादव समुदाय के विवाह समारोहों में तो शामिल होते हैं, किंतु अन्य जातियों के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखते हैं। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सोनू लाल पटेल की जयंती पर न फूल चढ़ाए और न ही कोई सोशल मीडिया पोस्ट किया।
गौरतलब है कि यह बयान उस संदर्भ में आया है जब राजभर ने पहले यह सवाल उठाया था कि यदि धर्मेंद्र प्रधान यादव जाति से होते, तो क्या सपा उनसे इस्तीफे की मांग करती।
कॉकरोच जनता पार्टी पर तीखी प्रतिक्रिया
राजभर ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, यह पार्टी छात्र हित से नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की छवि धूमिल करने की मंशा से काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भी अनदेखी कर रही है, और इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय को स्वयं संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करना चाहिए।
नए शिक्षा मंत्री पर विपक्ष के सवालों का जवाब
प्रह्लाद जोशी को धर्मेंद्र प्रधान के स्थान पर शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर विपक्ष की आलोचना के बारे में राजभर ने कहा कि सवाल उठाना विपक्ष का स्वभाव है, किंतु हर मुद्दे पर अनावश्यक प्रतिक्रिया देने से उनकी विश्वसनीयता ही संकट में पड़ती है।
नीट पेपर लीक और सीबीआई चार्जशीट
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नीट पेपर लीक मामले में चार्जशीट दाखिल किए जाने पर राजभर ने इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने जांच के बाद जिम्मेदार लोगों को चिन्हित करके यह कार्रवाई की है, जिसमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े लोग भी शामिल हैं।
एंटी पेपर लीक बिल पर स्वागत
राजभर ने एंटी पेपर लीक बिल के पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस बिल से इसलिए परेशान थे क्योंकि उनके शासनकाल में सर्वाधिक पेपर लीक के मामले सामने आए थे। राजभर के अनुसार, इन नेताओं को आशंका थी कि बिल पास होने पर उनके करीबी लोग कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।