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अंबेडकरनगर में सपा का दबदबा: 5 में से 4 सीटें जीतीं, 2027 के लिए समीकरण समझें

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अंबेडकरनगर में सपा का दबदबा: 5 में से 4 सीटें जीतीं, 2027 के लिए समीकरण समझें

सारांश

2022 में अंबेडकरनगर की 5 में से 4 सीटें जीत चुकी सपा अब 2027 की तैयारी में मज़बूत स्थिति में है। जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और BJP-निषाद गठबंधन की चुनौती — इन सभी के बीच इस जिले की राजनीति एक बार फिर निर्णायक होने वाली है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अंबेडकरनगर की 5 में से 4 सीटें जीतीं।
अकबरपुर से राम अचल राजभर , आलापुर से त्रिभुवन दत्त , जलालपुर से राकेश पांडेय और टांडा से राममूर्ति वर्मा ने सपा के टिकट पर जीत दर्ज की।
कटेहरी सीट BJP-निषाद पार्टी गठबंधन के अवधेश कुमार ने जीती, सपा के लालजी वर्मा को हराकर।
टांडा में सपा की सबसे बड़ी जीत — राममूर्ति वर्मा ने 32,097 मतों के अंतर से BJP को हराया; उन्हें 95,263 वोट मिले।
जलालपुर में राकेश पांडेय को 93,668 वोट मिले, बसपा को 13,630 मतों के अंतर से पछाड़ा।
2027 चुनाव में जातीय समीकरण, रोजगार और स्थानीय विकास के मुद्दे फिर निर्णायक भूमिका निभाएँगे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में अंबेडकरनगर जिले की सियासत पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपना वर्चस्व बनाए रखा — जिले की पाँच विधानसभा सीटों में से चार पर सपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि केवल एक सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP)-निषाद पार्टी गठबंधन के खाते में गई। अब जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं, तो इन नतीजों के जातीय और राजनीतिक समीकरण एक बार फिर चर्चा में हैं।

मुख्य चुनावी परिणाम

अकबरपुर, आलापुर, जलालपुर और टांडा — इन चारों सीटों पर सपा ने जीत हासिल की। एकमात्र कटेहरी सीट पर BJP-निषाद पार्टी गठबंधन ने बाज़ी मारी। इस जीत ने जिले में सपा को राजनीतिक रूप से सबसे मजबूत दल के रूप में स्थापित किया और आगामी चुनाव के लिए पार्टी को एक ठोस आधार दिया।

सीटवार परिणाम

अकबरपुर सीट पर सपा के राम अचल राजभर ने BJP के धर्मराज निषाद, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के चंद्रप्रकाश वर्मा और कांग्रेस की प्रियंका जायसवाल को पराजित किया। यह सीट राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है, जहाँ दलित, ब्राह्मण, कुर्मी, राजभर और निषाद समुदायों के मतदाता नतीजे तय करते हैं। गौरतलब है कि 1993 में यहाँ बसपा ने पहली बार जीत दर्ज की थी, और स्वयं राम अचल राजभर उस समय बसपा प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए थे। इस सीट से मायावती भी सांसद रह चुकी हैं।

आलापुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, जहाँ सपा के त्रिभुवन दत्त ने BJP की त्रिवेणी राम, कांग्रेस की सत्यमवदा पासवान और बसपा की केशरा देवी गौतम को हराया। 2017 में इस सीट पर BJP की अनीता कमल ने सपा की संगीता को 12,513 मतों से हराया था। 2022 में त्रिभुवन दत्त ने वह सीट सपा के लिए वापस जीत ली।

जलालपुर सीट पर सपा के राकेश पांडेय ने बसपा के राजेश सिंह को 13,630 मतों के अंतर से हराया। राकेश पांडेय को 93,668 वोट मिले, जबकि राजेश सिंह को 80,038 मत मिले। BJP के सुभाष चंद्र राय 71,236 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।

कटेहरी सीट पर BJP-निषाद पार्टी गठबंधन के अवधेश कुमार ने सपा के लालजी वर्मा को पराजित किया। बसपा से प्रतीक पांडेय और कांग्रेस से निशात फातिमा भी मैदान में थीं, लेकिन मुख्य टक्कर गठबंधन और सपा के बीच ही रही।

टांडा सीट पर सपा के राममूर्ति वर्मा ने BJP के कपिल देव को 32,097 मतों के बड़े अंतर से हराया। राममूर्ति वर्मा को 95,263 वोट मिले, जबकि कपिल देव को 63,166 मत मिले। बसपा की शबाना खातून 45,222 वोट के साथ तीसरे और AIMIM की प्रेमलता 7,442 वोट के साथ चौथे स्थान पर रहीं।

जातीय समीकरण और चुनावी कारक

अंबेडकरनगर के चुनावी नतीजों में जातीय ध्रुवीकरण की अहम भूमिका रही। दलित, यादव, राजभर, निषाद, ब्राह्मण और कुर्मी मतदाताओं के रुझान ने अलग-अलग सीटों पर नतीजे तय किए। इसके अलावा स्थानीय विकास, रोजगार, किसानों की समस्याएँ, सड़क, बिजली और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे भी मतदाताओं की पसंद-नापसंद को प्रभावित करते रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब 2022 में पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार दोबारा सत्ता में आई, फिर भी अंबेडकरनगर में सपा का वर्चस्व बना रहा — जो जिले की अनोखी राजनीतिक संरचना को दर्शाता है।

2027 के लिए क्या होगा आगे

इन नतीजों की पृष्ठभूमि में 2027 का विधानसभा चुनाव अंबेडकरनगर में और अधिक रोचक होने की संभावना है। सपा की चार सीटों पर पकड़ को देखते हुए BJP-निषाद पार्टी गठबंधन रणनीति बदलने की कोशिश कर सकता है, जबकि बसपा की घटती हिस्सेदारी भी एक बड़ा चुनावी कारक बनी रहेगी। जो भी दल जातीय समीकरणों को साधने और स्थानीय मुद्दों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने में सफल रहेगा, वही इस जिले की राजनीति पर अपनी छाप छोड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जातीय गठजोड़ की ताकत से संभव हुआ। असली सवाल यह है कि क्या सपा 2027 में इन चार सीटों पर अपने विधायकों के कार्यकाल को 'एंटी-इनकंबेंसी' से बचा पाएगी, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक स्थायी चरित्र है। कटेहरी में BJP-निषाद गठबंधन की जीत यह भी दर्शाती है कि जहाँ निषाद समुदाय की संख्या अधिक है, वहाँ गठबंधन राजनीति निर्णायक हो सकती है — और 2027 में इस मॉडल को और अधिक सीटों पर आजमाने की कोशिश की जा सकती है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2022 में अंबेडकरनगर की कौन-सी सीटें सपा ने जीतीं?
सपा ने अकबरपुर, आलापुर, जलालपुर और टांडा — ये चार सीटें जीतीं। पाँचवीं सीट कटेहरी पर BJP-निषाद पार्टी गठबंधन ने जीत दर्ज की।
कटेहरी सीट किसने जीती और किसे हराया?
BJP-निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी अवधेश कुमार ने कटेहरी सीट जीती। उन्होंने समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा को पराजित किया।
टांडा सीट पर जीत का अंतर कितना रहा?
टांडा सीट पर सपा के राममूर्ति वर्मा ने भाजपा के कपिल देव को 32,097 मतों के बड़े अंतर से हराया। वर्मा को 95,263 और कपिल देव को 63,166 वोट मिले।
अंबेडकरनगर की राजनीति में कौन-से जातीय समीकरण अहम हैं?
इस जिले में दलित, यादव, राजभर, निषाद, ब्राह्मण और कुर्मी मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। आलापुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, जहाँ दलित और यादव मतदाता सबसे प्रभावशाली हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव में अंबेडकरनगर के लिए क्या संभावनाएँ हैं?
2022 के प्रदर्शन के आधार पर सपा इस जिले में मज़बूत स्थिति में है, लेकिन विधायकों के खिलाफ संभावित एंटी-इनकंबेंसी और BJP-निषाद पार्टी गठबंधन की रणनीति उसके लिए चुनौती बन सकती है। जातीय गठजोड़ और स्थानीय विकास के मुद्दे एक बार फिर निर्णायक होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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