8 जुलाई 2026
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मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर सागरिका घोष के दावे 'साफ झूठ': अमित मालवीय का एक्स पर पलटवार

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मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर सागरिका घोष के दावे 'साफ झूठ': अमित मालवीय का एक्स पर पलटवार

सारांश

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता दौरे ने घरेलू राजनीति में आग लगा दी। TMC सांसद सागरिका घोष के FCRA दावों पर BJP के अमित मालवीय ने एक्स पर पलटवार करते हुए उन्हें 'साफ झूठ' बताया और FCRA पंजीकरण के तथ्य सामने रखे।

मुख्य बातें

BJP के अमित मालवीय ने 23 मई को एक्स पर TMC सांसद सागरिका घोष के मिशनरीज ऑफ चैरिटी संबंधी दावों को 'साफ झूठ' बताया।
मालवीय के अनुसार मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA पंजीकरण सक्रिय है और 31 दिसंबर 2026 तक वैध है।
विवाद की शुरुआत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता स्थित मदर हाउस दौरे पर सागरिका घोष की एक्स पोस्ट से हुई।
घोष ने केंद्र सरकार को 'ईसाई विरोधी' बताते हुए आरोप लगाया कि प्रस्तावित FCRA विधेयक से संस्था की विदेशी सहायता बाधित हो रही है।
मालवीय ने घोष को 'जवाबदेह' ठहराने की माँग करते हुए उनके बयान को 'भारत की छवि नुकसान पहुँचाने की सोची-समझी कोशिश' करार दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने शनिवार, 23 मई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष पर सीधा हमला बोला और उनके दावों को 'साफ झूठ' करार दिया। यह विवाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मदर हाउस दौरे को लेकर सागरिका घोष की एक्स पोस्ट के बाद सार्वजनिक रूप से भड़का।

मालवीय का एक्स पर पलटवार

मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर सागरिका घोष पर गलत जानकारी फैलाने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रुबियो के मदर हाउस जाने की बात को छोड़कर सागरिका घोष का हर दूसरा बयान उनके अनुसार 'साफ झूठ' है। मालवीय ने इसे 'जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से फैलाया गया दुष्प्रचार' बताया, जिसका मकसद उनके अनुसार भारत सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाना और आम जनता को गुमराह करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की करीबी सांसद होने के नाते सागरिका घोष 'आदतन दुष्प्रचार' का सहारा लेती हैं और एक सार्वजनिक पद पर रहते हुए करदाताओं के पैसे से वेतन पाने वाली व्यक्ति को अपने बयानों के लिए जवाबदेह होना चाहिए।

एफसीआरए पंजीकरण पर मालवीय के दावे

मालवीय ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत मिशनरीज ऑफ चैरिटी की कानूनी स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि संस्था का FCRA पंजीकरण सक्रिय है और 31 दिसंबर 2026 तक वैध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्था की FCRA स्थिति को लेकर फिलहाल कोई आवेदन लंबित नहीं है।

गौरतलब है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA पंजीकरण पहले भी विवाद का केंद्र रह चुका है — दिसंबर 2021 में केंद्र सरकार ने संस्था का FCRA नवीनीकरण अस्थायी रूप से रोक दिया था, हालाँकि बाद में इसे बहाल कर दिया गया था। यह पृष्ठभूमि वर्तमान राजनीतिक बहस को और संवेदनशील बनाती है।

सागरिका घोष ने क्या कहा था

सागरिका घोष ने एक्स पर पोस्ट किया था कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कोलकाता स्थित मदर हाउस पहुँचे और वहाँ की 'वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध मानवीय सेवाओं को सलाम किया।' इसके बाद उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे 'घोर पाखंडपूर्ण राजनीति' करार दिया।

घोष ने केंद्र सरकार को 'ईसाई विरोधी' बताते हुए आरोप लगाया कि प्रस्तावित FCRA विधेयक के ज़रिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी को विदेशी सहायता लेने से रोका जा रहा है और सरकार चर्च की संपत्तियाँ जब्त करने का रास्ता तैयार कर रही है, जिससे ईसाई संस्थाओं की मानवीय, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने मदर टेरेसा के संगठन को प्रदर्शित किया जा रहा है।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-अमेरिका संबंध और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं। रुबियो का मदर हाउस दौरा कूटनीतिक रूप से प्रतीकात्मक माना जा रहा है, और इसी प्रतीकात्मकता को लेकर घरेलू राजनीति में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी व्याख्या पेश की है।

आलोचकों का कहना है कि FCRA कानून का उपयोग गैर-सरकारी संगठनों पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है, जबकि सरकार का पक्ष है कि यह कानून विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है। इस बहस में मिशनरीज ऑफ चैरिटी का नाम आना संगठन की वैश्विक प्रतिष्ठा को देखते हुए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।

आगे क्या

दोनों पक्षों की ओर से एक्स पर यह बहस जारी है। अभी तक सागरिका घोष की ओर से मालवीय के आरोपों का सीधा जवाब सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों के व्यापक तनाव का हिस्सा है, जो आने वाले समय में और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी तहें गहरी हैं — FCRA कानून, धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता और कूटनीतिक प्रतीकवाद तीनों एक साथ टकरा रहे हैं। मालवीय का FCRA पंजीकरण वाला तथ्य सत्यापन-योग्य है और महत्वपूर्ण है, लेकिन यह उस व्यापक बहस को नहीं ढकता जो FCRA संशोधनों के इरादे और NGO क्षेत्र पर उनके असर को लेकर चल रही है। दिसंबर 2021 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी का पंजीकरण अस्थायी रूप से रोका जाना एक स्थापित तथ्य है, जिसे इस बहस से अलग नहीं किया जा सकता। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि दोनों पक्ष एक ही घटना — रुबियो का दौरा — को अपने राजनीतिक आख्यान के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि मिशनरीज ऑफ चैरिटी की जमीनी सेवाएँ इस पूरे शोर से परे हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA पंजीकरण अभी किस स्थिति में है?
अमित मालवीय के अनुसार मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA पंजीकरण सक्रिय है और 31 दिसंबर 2026 तक वैध है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल संस्था की FCRA स्थिति को लेकर कोई आवेदन लंबित नहीं है।
सागरिका घोष ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी को लेकर क्या दावे किए?
TMC सांसद सागरिका घोष ने एक्स पर आरोप लगाया कि मोदी सरकार प्रस्तावित FCRA विधेयक के जरिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी को विदेशी सहायता लेने से रोक रही है और चर्च संपत्तियाँ जब्त करने का रास्ता तैयार कर रही है। उन्होंने सरकार को 'ईसाई विरोधी' भी बताया।
मार्को रुबियो के कोलकाता दौरे से यह विवाद कैसे जुड़ा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मदर हाउस दौरे पर सागरिका घोष की एक्स पोस्ट ने इस विवाद को जन्म दिया। घोष ने इस दौरे को सरकार की 'पाखंडपूर्ण राजनीति' का उदाहरण बताया, जिस पर BJP ने पलटवार किया।
अमित मालवीय ने सागरिका घोष के खिलाफ क्या माँग की?
मालवीय ने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए और करदाताओं के पैसे से वेतन पाने वाली सांसद को अपने बयानों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने घोष के व्यवहार को 'निंदनीय' बताते हुए स्पष्ट आलोचना की माँग की।
मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA पंजीकरण पहले कब रोका गया था?
दिसंबर 2021 में केंद्र सरकार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA नवीनीकरण अस्थायी रूप से रोक दिया था, जिसके बाद इसे बहाल कर दिया गया। यही पृष्ठभूमि वर्तमान राजनीतिक विवाद को अधिक संवेदनशील बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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