पैलेट गन पर अमित शाह माफी माँगें, तभी होगी परीक्षा विधेयक पर चर्चा: कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने 27 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि जब तक गृह मंत्री अमित शाह छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर सार्वजनिक माफी नहीं माँगते, तब तक कांग्रेस लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर संसद में किसी भी चर्चा में हिस्सा लेने को तैयार नहीं है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह आज लोकसभा में यह विधेयक पेश करने वाले हैं।
माफी की शर्त और विधेयक पर रुख
सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'बिल प्रधानमंत्री पेश करें या जितेंद्र सिंह — पहले गृह मंत्री अमित शाह को माफी माँगनी पड़ेगी। उन्हें बताना होगा कि वे छात्रों को छात्र समझते हैं या आतंकवादी, जो उन्होंने पैलेट गन का इस्तेमाल किया? क्या वे छात्रों को पाकिस्तानी, बांग्लादेशी या नेपाली समझते हैं? पहले माफी, उसके बाद हम चर्चा के लिए तैयार हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार परीक्षा-धोखाधड़ी रोकने के लिए संशोधित कानून को संसद से पारित कराने की कोशिश में है।
नंदन नीलेकणी और आधार विवाद पर निशाना
राजपूत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री अब नंदन नीलेकणी की शरण में गए हैं, जबकि दस साल तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें कोसा था। उन्होंने याद दिलाया कि जब कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आधार कार्ड की शुरुआत हुई थी, तब BJP कार्यकर्ताओं ने नीलेकणी के पुतले फूंके थे और खुद प्रधानमंत्री ने उनका विरोध किया था। 'नंदन नीलेकणी कांग्रेस के समय से काम कर रहे हैं,' उन्होंने जोड़ा।
संसदीय मर्यादा और समिति गठन पर सवाल
राजपूत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने संसद की मर्यादाओं का पालन नहीं किया। उनके अनुसार, जब सदन चल रहा हो और कोई समिति बनानी हो, तो वह सदन के भीतर बननी चाहिए थी — बाहर नहीं।
ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के विपक्ष के साथ आने के बयान पर राजपूत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'माथे पर बंदूक लगाकर गठबंधन नहीं होगा। AIMIM सिर्फ मुसलमानों की बात करती है और BJP सिर्फ हिंदुओं की — दोनों पार्टियाँ देशद्रोह जैसा काम करती हैं।' उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और कांग्रेस के खिलाफ धमकी भरी भाषा के बाद गठबंधन की बात किसी को स्वीकार नहीं होगी।
राम मंदिर एसआईटी और पाकिस्तान पर सवाल
राम मंदिर मामले में गठित एसआईटी पर राजपूत ने पूछा कि इसका कार्यक्षेत्र क्या होगा और सर्वोच्च न्यायालय इसे कैसे मॉनिटर करेगा। उन्होंने माँग की कि एसआईटी जमीन घोटाले और राम मंदिर निर्माण घोटाले की भी जाँच करे, अन्यथा इसे 'लीपापोती' माना जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पाकिस्तान संबंधी बयान पर भी उन्होंने सवाल उठाया और पूछा कि जब सेनाएँ पीओके लेने के लिए तैयार थीं, तो ऑपरेशन सिंदूर क्यों रुकवाया गया। आने वाले समय में यह मुद्दे संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह गर्म बने रहने के आसार हैं।