अंडमान-निकोबार में पहले LNG बिजली संयंत्र को पर्यावरणीय मंजूरी की राह हुई आसान, IOCL करेगा गैस आपूर्ति
सारांश
मुख्य बातें
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थापित होने वाले पहले एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) आधारित बिजली संयंत्र की पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुँच गई है। अंडमान-निकोबार प्रदूषण नियंत्रण समिति ने 19 जुलाई 2026 को परियोजना स्थल तक एलएनजी परिवहन से जुड़ी पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) और पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) रिपोर्टों पर सभी संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं। यह कदम द्वीपों को डीजल आधारित बिजली उत्पादन से मुक्त करने की केंद्र सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है।
परियोजना का स्वरूप और प्रमुख भागीदार
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) इस परियोजना में री-गैसीफाइड एलएनजी की आपूर्ति का दायित्व निभाएगी। यह गैस होप टाउन, श्री विजयापुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) में एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (एनवीवीएन) द्वारा स्थापित किए जा रहे 55 मेगावाट के बिजली संयंत्र को दी जाएगी। एनवीवीएन, एनटीपीसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
उल्लेखनीय है कि इस बिजली संयंत्र को सितंबर 2022 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) से पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। अब एलएनजी परिवहन अवसंरचना के लिए अलग से ईआईए मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।
डीजल से एलएनजी की ओर नीतिगत बदलाव
वर्तमान में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह अपनी बिजली की अधिकांश आवश्यकताओं के लिए डीजल आधारित जनरेटर सेटों पर निर्भर है, जो महँगे और प्रदूषणकारी दोनों हैं। शुरुआत में इस संयंत्र को ड्यूल फ्यूल (डीजल और एलएनजी) आधार पर संचालित करने की योजना थी, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने द्वीपों में बिजली उत्पादन के पूर्ण डीजलीकरण को समाप्त करने की नीति के अनुरूप इसे केवल एलएनजी आधारित संयंत्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया।
यह बदलाव बिजली मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय की सहमति से किया गया, और आईओसीएल को एलएनजी आपूर्ति का आवश्यक बुनियादी ढाँचा विकसित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।
एलएनजी परिवहन की तकनीकी व्यवस्था
योजना के अनुसार, छोटे एलएनजी टैंकर समुद्री मार्ग से गैस लेकर द्वीप पहुँचेंगे। वहाँ फ्लोटिंग स्टोरेज एंड री-गैसीफिकेशन यूनिट (एफएसआरयू) में एलएनजी उतारी जाएगी और फिर पाइपलाइन के माध्यम से बिजली संयंत्र तक पहुँचाई जाएगी। यह परियोजना पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के तहत श्रेणी 'ए' की परियोजना है, इसलिए इसका मूल्यांकन केंद्रीय स्तर पर एमओईएफसीसी की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) द्वारा किया जाएगा।
ईआईए प्रक्रिया और अध्ययन का विवरण
आईओसीएल ने 'परिवेश' पोर्टल के माध्यम से टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) प्राप्त किए, जिसके बाद मार्च से मई 2023 के बीच आधारभूत पर्यावरणीय अध्ययन किए गए। संशोधित ईआईए और ईएमपी रिपोर्ट तैयार करने की ज़िम्मेदारी चेन्नई स्थित इंडोमर कोस्टल हाइड्रोलिक्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। इसके अतिरिक्त, अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई के आईआरएस द्वारा तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) की मैपिंग और रिपोर्ट का संशोधन भी किया गया है।
पर्यावरण और आर्थिक लाभ
अंडमान-निकोबार प्रशासन के अनुसार, एलएनजी के उपयोग से डीजल की तुलना में 60 से 90 प्रतिशत तक धुंध पैदा करने वाले प्रदूषकों और 30 से 40 प्रतिशत तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। साथ ही, यह डीजल की तुलना में अधिक किफायती भी है। यह परियोजना द्वीपों में विश्वसनीय, सस्ती और स्वच्छ बिजली आपूर्ति की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।