आंध्र प्रदेश में 47 करोड़ रुपये की अवैध अलप्राज़ोलम और 3.5 टन रसायन का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- अवयव: 237 किलोग्राम अलप्राज़ोलम जब्त हुआ।
- गिरफ्तारी: दो आरोपी पकड़े गए।
- ऑपरेशन नाम: व्हाइट हैमर।
- मार्केट वैल्यू: 47 करोड़ रुपए।
- सरकारी अभियान: नशामुक्त भारत को बढ़ावा।
नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले के कोंडापल्ली औद्योगिक विकास क्षेत्र में एक गुप्त संयंत्र का भंडाफोड़ किया है, जो अलप्राज़ोलम का उत्पादन कर रहा था। यह एक साइकोट्रॉपिक पदार्थ है, जिसे नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत नियंत्रित किया जाता है।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि छापेमारी के दौरान 237 किलोग्राम अलप्राज़ोलम जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 47 करोड़ रुपए है।
इस खुफिया अभियान को “ऑपरेशन व्हाइट हैमर” का नाम दिया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान एक पूरी तरह से कार्यशील औद्योगिक सेटअप का पता चला, जो कथित तौर पर अलप्राज़ोलम का उत्पादन कर रहा था और इसे रासायनिक निर्माण इकाई के आड़ में छिपाया गया था।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि अधिकारियों ने 800 किलोग्राम से अधिक महत्वपूर्ण कच्चा माल, 2,860 लीटर विभिन्न रसायन और औद्योगिक उपकरण जैसे रिएक्टर, ड्रायर और सेंट्रीफ्यूज जब्त किए, जो एक संगठित और बड़े पैमाने पर गुप्त दवा निर्माण संयंत्र की मौजूदगी को दर्शाते हैं।
प्रारंभिक जांच से यह भी सामने आया कि यह ऑपरेशन एक रसायनज्ञ द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसके पास रसायन और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में 20 साल का अनुभव था। यह व्यक्ति हैदराबाद में कच्चा माल उपलब्ध कराने और वितरण नेटवर्क को संभालने वाले सहयोगी के साथ मिलकर काम कर रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने अवैध अलप्राज़ोलम उत्पादन के लिए फैक्ट्री परिसर किराए पर लिया था। दोनों कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
अधिकारियों ने बताया कि इस वित्त वर्ष के दौरान डीआरआई ने खुफिया-आधारित अभियानों के माध्यम से आठ गुप्त दवा निर्माण इकाइयों को ध्वस्त किया, जो सरकार के नशामुक्त भारत अभियान और समाज तथा लोगों को नार्कोटिक और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के खतरे से सुरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इससे पहले, फरवरी में असम राइफल्स और डीआरआई ने एक संयुक्त अभियान में अत्यधिक नशे की लत वाले मेथामफेटामाइन टैबलेट्स जब्त किए थे, जिनकी कीमत 45 करोड़ रुपए से अधिक थी और त्रिपुरा में एक ड्रग पैडलर को गिरफ्तार किया था।