अखिलेश के कमीशनखोरी बयान पर मंत्री अनिल राजभर का पलटवार: 'सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने 13 सितंबर 2026 को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के कमीशनखोरी वाले बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी समाजवादी पार्टी के नेता अब ईमानदारी का उपदेश देने निकले हैं। उनका यह बयान यूपी विधानसभा चुनाव से लगभग चार महीने पहले आया है, जो राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है।
मंत्री राजभर का सीधा हमला
अनिल राजभर ने कहा, 'ये तो वही कहावत हुई कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। भ्रष्टाचार के आकंठ तक डूबी हुई समाजवादी पार्टी की सरकारें और उसको चलाने वाले लोग आज भ्रष्टाचार पर बात कर रहे हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है और इसीलिए वे 'बेवजह की बेतुकी बातें' करते रहते हैं।
राजभर ने आगे कहा, 'अब चार महीने का चुनाव रह गया है, जनता उनको जवाब देगी।' यह बयान स्पष्ट रूप से आगामी विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में दिया गया है, जो भाजपा और सपा के बीच सीधे टकराव का संकेत देता है।
मायावती और आकाश आनंद प्रकरण पर रुख
आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर की ओर से आकाश आनंद को पार्टी में शामिल कराने की पेशकश और बसपा सुप्रीमो मायावती पर सपा सांसद डिंपल यादव के पीडीए वाले बयान पर राजभर ने स्पष्ट कहा, 'किसी पार्टी के अंदरूनी मामले में किसी को भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।'
उन्होंने कहा कि मायावती अपनी पार्टी की मुखिया हैं और उन्हें अपने तरीके से फैसले लेने का पूरा अधिकार है। राजभर ने सभी दलों से अपील की कि वे दूसरी पार्टियों के आंतरिक विषयों पर टिप्पणी करने से बचें।
मोदी के 25 वर्ष और सेवा संकल्प अभियान
राजभर ने 17 सितंबर से शुरू होने वाली बाइक यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'इन 25 वर्षों में उन्होंने माँ भारती की जिस तरह सेवा की है, उसका हम स्वागत करते हैं।'
उन्होंने बताया कि सेवा संकल्प अभियान एक महीने तक चलेगा और इसमें विशेष रूप से युवाओं को लक्षित किया गया है। बाइक यात्रा में एक दल वाराणसी — जो प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है — से रवाना होगा, जबकि दूसरा दल गुजरात से निकलेगा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सभी दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। गौरतलब है कि यूपी की राजनीति में भ्रष्टाचार का मुद्दा हर चुनाव में केंद्रीय भूमिका निभाता है और दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।
अखिलेश यादव के बयान पर भाजपा की इस त्वरित प्रतिक्रिया से साफ है कि आने वाले हफ्तों में यूपी की राजनीति और अधिक तीखी होगी, और दोनों पक्षों के बीच बयानबाज़ी का यह दौर जारी रहने की संभावना है।