26 सितंबर 2026
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अनुप्रिया पटेल का विपक्ष पर निशाना: चुनाव आयोग पर सवाल हार की आशंका से उपजे हैं

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अनुप्रिया पटेल का विपक्ष पर निशाना: चुनाव आयोग पर सवाल हार की आशंका से उपजे हैं

सारांश

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का साफ संदेश — विपक्ष चुनाव आयोग को इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि उसे 2027 में यूपी में हार पहले से दिख रही है। इंडी गठबंधन की आपसी दरारों पर कटाक्ष, राहुल गांधी पर 'दुष्प्रचार' का आरोप, और एनडीए की हैट्रिक का दावा।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 26 सितंबर 2026 को कानपुर में कहा कि चुनाव आयोग पर सवाल विपक्ष की 2027 UP चुनाव में हार की आशंका का नतीजा हैं।
उन्होंने दावा किया कि NDA गठबंधन आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा।
अखिलेश यादव की 'पीडीए' यात्रा और इंडी गठबंधन की आंतरिक दरारों पर कटाक्ष करते हुए कहा — 'आपसी सामंजस्य बिगड़ा हुआ है।' राहुल गांधी पर आरोप — 2024 लोकसभा चुनाव की तरह फिर से दुष्प्रचार के ज़रिये राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश हो रही है।
अपना दल (सोनेलाल) की सीट-माँग पर पटेल ने कहा — अभी कोई बातचीत नहीं हुई, समय आने पर सामंजस्य से तय होगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 26 सितंबर 2026 को कानपुर में कहा कि विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवाल दरअसल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में संभावित हार की आशंका का नतीजा हैं। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) आगामी चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा, जबकि इंडी गठबंधन की आंतरिक दरारें खुलकर सामने आ चुकी हैं।

विपक्षी गठबंधन पर तीखा प्रहार

अनुप्रिया पटेल ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की 'पीडीए' यात्रा को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा, 'अखिलेश यादव की पीडीए यात्रा को हम सब दूर से देख रहे हैं और आनंद ले रहे हैं। यह कैसा गठबंधन है, जहां एक-दूसरे को चुनौती देने का काम किया जा रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि जहाँ साथ मिलकर चुनाव लड़ने के दावे हो रहे हैं, वहीं कोई संयुक्त कार्यक्रम नहीं हो रहा — 'स्पष्ट रूप से आपसी सामंजस्य बिगड़ा हुआ है।'

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब इंडी गठबंधन के घटक दलों के बीच सीट-बँटवारे और नेतृत्व को लेकर खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। पटेल ने कहा कि एनडीए गठबंधन रिकॉर्ड जीत दर्ज करने जा रहा है और इंडी गठबंधन का यह हाल कोई नई बात नहीं है।

चुनाव आयोग पर विवाद और पटेल की प्रतिक्रिया

विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में अनुप्रिया पटेल ने कहा कि देश में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत अभिव्यक्ति की आज़ादी है। हालाँकि, उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि विपक्ष — विशेषकर कांग्रेस — ने संवैधानिक संस्थाओं को इसलिए कटघरे में खड़ा करना शुरू किया है, क्योंकि उन्हें खुद पता है कि 2027 में उत्तर प्रदेश में वे एक बार फिर एनडीए के सामने हार का सामना करेंगे।

पटेल ने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से लगता है कि चुनाव आयोग को इस अनावश्यक विवाद में अपनी स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए, ताकि 'दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए' और जनता के मन में कोई भ्रम न रहे।

राहुल गांधी पर सीधा निशाना

चुनाव बॉयकॉट के सवाल पर राहुल गांधी की ओर से कोई स्पष्ट उत्तर न आने को लेकर पटेल ने कहा कि गांधी की हार तय है और वे केवल दुष्प्रचार के ज़रिये राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय संविधान और आरक्षण को लेकर अफवाहें फैलाई गई थीं, जिससे एनडीए को नुकसान हुआ था। 'लेकिन काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती,' उन्होंने जोड़ा।

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा नतीजों में एनडीए को उत्तर प्रदेश में अपेक्षा से कम सीटें मिली थीं, जिसे सत्ताधारी दल के लिए एक झटके के रूप में देखा गया था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पक्षों का आरोप-प्रत्यारोप तेज हो रहा है।

अपना दल (एस) की सीटों पर रुख

अपनी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) की सीट-माँग को लेकर पटेल ने कहा कि अभी इस पर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय आने पर सभी साथी दल बैठकर जातीय और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए सीटों का निर्धारण करेंगे। 'हम सभी की मंशा एक ही है कि एनडीए इस बार हैट्रिक लगाए,' उन्होंने कहा।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभी करीब डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन सियासी बयानबाज़ी अभी से तेज हो गई है। एनडीए के घटक दलों में सीट-बँटवारे को लेकर जहाँ बातचीत की प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है, वहीं विपक्षी इंडी गठबंधन की एकजुटता पर भी प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच चुनावी रणनीति और गठजोड़ की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही 2024 के झटके को पाटने की कोशिश भी करता है। संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर बहस को महज 'हार का ठीकरा' कहकर खारिज करना लोकतांत्रिक जवाबदेही की दृष्टि से विचारणीय है — चुनाव आयोग की पारदर्शिता की माँग, चाहे किसी भी दल से उठे, उसे केवल राजनीतिक लाभ की नज़र से देखना संस्थागत बहस को संकुचित करता है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुप्रिया पटेल ने चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों को लेकर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 26 सितंबर 2026 को कानपुर में कहा कि विपक्ष — विशेषकर कांग्रेस — ने चुनाव आयोग को इसलिए कटघरे में खड़ा करना शुरू किया है क्योंकि उन्हें 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में हार का अंदाजा हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए ताकि जनता में कोई भ्रम न रहे।
इंडी गठबंधन की आंतरिक दरारों पर पटेल ने क्या कहा?
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अखिलेश यादव की 'पीडीए' यात्रा में शामिल दल एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं, कोई संयुक्त कार्यक्रम नहीं हो रहा, और आपसी सामंजस्य स्पष्ट रूप से बिगड़ा हुआ है। उनके अनुसार इंडी गठबंधन का यह हाल कोई नई बात नहीं है।
2027 उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर NDA का क्या दावा है?
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने दावा किया कि NDA गठबंधन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा और इस बार हैट्रिक लगाएगा। उन्होंने कहा कि सभी साथी दल एकजुट हैं और सीट-बँटवारा समय आने पर सामंजस्य से तय होगा।
अनुप्रिया पटेल ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि राहुल गांधी चुनाव बॉयकॉट के सवाल का जवाब नहीं दे रहे क्योंकि उनकी हार तय है, और वे 2024 लोकसभा चुनाव की तरह दुष्प्रचार के ज़रिये राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।'
अपना दल (सोनेलाल) की 2027 के लिए सीट-माँग की स्थिति क्या है?
अनुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया कि अभी सीटों को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि समय आने पर सभी साथी दल बैठकर जातीय और सामाजिक समीकरणों के आधार पर आपसी सहमति से सीटें तय करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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