नशामुक्त जम्मू-कश्मीर: 100 दिवसीय अभियान में 1 करोड़ लोगों तक पहुँची सेना, 900 तस्कर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना की उधमपुर स्थित नॉर्दर्न कमांड ने 16 जून को जानकारी दी कि जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त करने के लिए चलाए गए 100 दिवसीय नशा मुक्ति अभियान के तहत 1 करोड़ से अधिक लोगों तक सीधी पहुँच बनाई गई और 900 से अधिक नशा तस्करों व सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया। सेना ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल कानून-प्रवर्तन तक सीमित नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और युवा पुनर्वास को इसका केंद्र बनाया गया है।
अभियान का दायरा और उपलब्धियाँ
नॉर्दर्न कमांड ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा कि यह अभियान 'विकसित और नशामुक्त जम्मू-कश्मीर' की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। पूरे केंद्र शासित प्रदेश में स्कूलों, गाँवों और पंचायतों में 16.37 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जमीनी स्तर पर निगरानी और जागरूकता को मज़बूत करने के लिए 7,000 महिला समितियों का गठन किया गया, जो इस अभियान की एक उल्लेखनीय विशेषता है।
कानूनी कार्रवाई और संपत्ति जब्ती
एनडीपीएस अधिनियम के तहत 850 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। नशा तस्करी से जुड़े गिरोहों और उनके ठिकानों पर छापेमारी करते हुए ₹48 करोड़ से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियाँ जब्त की गईं। इसके अतिरिक्त, सीमा क्षेत्रों में निगरानी को और पुख्ता करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने एआई-आधारित निगरानी प्रणाली और नाइट विजन उपकरणों का उपयोग किया, जिससे ड्रोन के ज़रिये गिराई जा रही नशीली सामग्री को पकड़ने में सफलता मिली।
पुनर्वास और काउंसलिंग पर ज़ोर
अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर नशे के शिकार युवाओं के पुनर्वास और काउंसलिंग को प्राथमिकता दी गई, जिससे हज़ारों युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालने में मदद मिली। क्षेत्र में 49 संवेदनशील 'ड्रग हॉटस्पॉट' चिह्नित कर वहाँ विशेष अभियान चलाए गए। नशामुक्ति सेवाओं तक आसान पहुँच के लिए 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर पोर्टल' भी शुरू किया गया, जहाँ काउंसलिंग, नशामुक्ति पाठ्यक्रम और सहायता सेवाएँ उपलब्ध हैं।
उपराज्यपाल की सख्त घोषणाएँ
इस 100 दिवसीय अभियान का शुभारंभ 6 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया था। उन्होंने अभियान के तहत अतिरिक्त सख्त कदमों की घोषणा करते हुए कहा था कि नशे के मामलों में पकड़े गए लोगों के पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और जब्त वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए जाएँगे — यह प्रशासनिक दंड का एक असामान्य और कड़ा प्रावधान है।
आगे की राह
जागरूकता गतिविधियों की निगरानी के लिए 20 वरिष्ठ अधिकारियों को जिला मेंटर के रूप में नियुक्त किया गया है, जो अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे। यह अभियान दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन का समन्वित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है — और आने वाले समय में इसके दीर्घकालिक परिणाम ही इसकी असली सफलता का पैमाना होंगे।