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नशामुक्त जम्मू-कश्मीर: 100 दिवसीय अभियान में 1 करोड़ लोगों तक पहुँची सेना, 900 तस्कर गिरफ्तार

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नशामुक्त जम्मू-कश्मीर: 100 दिवसीय अभियान में 1 करोड़ लोगों तक पहुँची सेना, 900 तस्कर गिरफ्तार

सारांश

भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड का 100 दिवसीय नशा मुक्ति अभियान जम्मू-कश्मीर में अब तक का सबसे व्यापक प्रयास साबित हुआ — 1 करोड़ लोगों तक पहुँच, 900 तस्कर गिरफ्तार और ₹48 करोड़ की संपत्ति जब्त। सेना, प्रशासन और 7,000 महिला समितियों की साझेदारी इसे महज़ कानूनी अभियान से अलग बनाती है।

मुख्य बातें

नॉर्दर्न कमांड के 100 दिवसीय नशा मुक्ति अभियान के तहत जम्मू-कश्मीर में 1 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई गई।
16.37 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित; 7,000 महिला समितियाँ गठित।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत 850 से अधिक एफआईआर दर्ज, 900 से अधिक तस्कर व सप्लायर गिरफ्तार।
₹48 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्तियाँ जब्त; 49 ड्रग हॉटस्पॉट चिह्नित।
ड्रोन से गिराई जा रही नशीली सामग्री रोकने के लिए एआई-आधारित निगरानी और नाइट विजन उपकरण तैनात।
अभियान का शुभारंभ 6 अप्रैल को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया; दोषियों के पासपोर्ट, लाइसेंस व आधार रद्द करने का प्रावधान।

भारतीय सेना की उधमपुर स्थित नॉर्दर्न कमांड ने 16 जून को जानकारी दी कि जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त करने के लिए चलाए गए 100 दिवसीय नशा मुक्ति अभियान के तहत 1 करोड़ से अधिक लोगों तक सीधी पहुँच बनाई गई और 900 से अधिक नशा तस्करों व सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया। सेना ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल कानून-प्रवर्तन तक सीमित नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और युवा पुनर्वास को इसका केंद्र बनाया गया है।

अभियान का दायरा और उपलब्धियाँ

नॉर्दर्न कमांड ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा कि यह अभियान 'विकसित और नशामुक्त जम्मू-कश्मीर' की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। पूरे केंद्र शासित प्रदेश में स्कूलों, गाँवों और पंचायतों में 16.37 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जमीनी स्तर पर निगरानी और जागरूकता को मज़बूत करने के लिए 7,000 महिला समितियों का गठन किया गया, जो इस अभियान की एक उल्लेखनीय विशेषता है।

कानूनी कार्रवाई और संपत्ति जब्ती

एनडीपीएस अधिनियम के तहत 850 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। नशा तस्करी से जुड़े गिरोहों और उनके ठिकानों पर छापेमारी करते हुए ₹48 करोड़ से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियाँ जब्त की गईं। इसके अतिरिक्त, सीमा क्षेत्रों में निगरानी को और पुख्ता करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने एआई-आधारित निगरानी प्रणाली और नाइट विजन उपकरणों का उपयोग किया, जिससे ड्रोन के ज़रिये गिराई जा रही नशीली सामग्री को पकड़ने में सफलता मिली।

पुनर्वास और काउंसलिंग पर ज़ोर

अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर नशे के शिकार युवाओं के पुनर्वास और काउंसलिंग को प्राथमिकता दी गई, जिससे हज़ारों युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालने में मदद मिली। क्षेत्र में 49 संवेदनशील 'ड्रग हॉटस्पॉट' चिह्नित कर वहाँ विशेष अभियान चलाए गए। नशामुक्ति सेवाओं तक आसान पहुँच के लिए 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर पोर्टल' भी शुरू किया गया, जहाँ काउंसलिंग, नशामुक्ति पाठ्यक्रम और सहायता सेवाएँ उपलब्ध हैं।

उपराज्यपाल की सख्त घोषणाएँ

इस 100 दिवसीय अभियान का शुभारंभ 6 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया था। उन्होंने अभियान के तहत अतिरिक्त सख्त कदमों की घोषणा करते हुए कहा था कि नशे के मामलों में पकड़े गए लोगों के पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और जब्त वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए जाएँगे — यह प्रशासनिक दंड का एक असामान्य और कड़ा प्रावधान है।

आगे की राह

जागरूकता गतिविधियों की निगरानी के लिए 20 वरिष्ठ अधिकारियों को जिला मेंटर के रूप में नियुक्त किया गया है, जो अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे। यह अभियान दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन का समन्वित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है — और आने वाले समय में इसके दीर्घकालिक परिणाम ही इसकी असली सफलता का पैमाना होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सीमा-पार तस्करी और सामाजिक विघटन की दोहरी चुनौती है — और नॉर्दर्न कमांड का यह अभियान इस जटिलता को स्वीकार करता दिखता है। 7,000 महिला समितियों का गठन और युवा पुनर्वास पर ज़ोर पिछले सुरक्षा-केंद्रित अभियानों से एक सकारात्मक विचलन है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि 'हॉटस्पॉट' की पहचान और एफआईआर की संख्या तब तक पर्याप्त नहीं, जब तक पुनर्वास के दीर्घकालिक आँकड़े सार्वजनिक न हों। पासपोर्ट और आधार रद्द करने जैसे प्रशासनिक दंड कड़े संदेश देते हैं, लेकिन इनकी कानूनी समीक्षा और मानवाधिकार निहितार्थ अभी भी बहस के दायरे में हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नॉर्दर्न कमांड का 100 दिवसीय नशा मुक्ति अभियान क्या है?
यह भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड द्वारा जम्मू-कश्मीर में 6 अप्रैल 2026 को शुरू किया गया व्यापक अभियान है, जिसका उद्देश्य जागरूकता, कानूनी कार्रवाई और युवा पुनर्वास के ज़रिये नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना है। इसमें 1 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई गई और 900 से अधिक तस्कर गिरफ्तार किए गए।
इस अभियान में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया और कितनी संपत्ति जब्त हुई?
अभियान के तहत 900 से अधिक नशा तस्करों और सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत 850 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। इसके साथ ही ₹48 करोड़ से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियाँ जब्त की गईं।
जम्मू-कश्मीर में नशा तस्करी रोकने के लिए क्या तकनीकी उपाय अपनाए गए?
सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन के ज़रिये गिराई जा रही नशीली सामग्री को पकड़ने के लिए एआई-आधारित निगरानी प्रणाली और नाइट विजन उपकरणों का उपयोग किया। इसके अलावा 49 संवेदनशील ड्रग हॉटस्पॉट चिह्नित कर वहाँ विशेष अभियान चलाए गए।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नशा तस्करों के खिलाफ क्या अतिरिक्त कदम उठाने की घोषणा की?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 6 अप्रैल को अभियान के शुभारंभ के अवसर पर कहा था कि नशे के मामलों में पकड़े गए लोगों के पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और जब्त वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए जाएँगे। यह प्रावधान सामान्य कानूनी दंड से परे एक अतिरिक्त प्रशासनिक कार्रवाई है।
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर पोर्टल क्या सुविधाएँ देता है?
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर पोर्टल नागरिकों को नशामुक्ति सेवाओं तक आसान पहुँच देने के लिए शुरू किया गया है। इस पर नशामुक्ति पाठ्यक्रम, काउंसलिंग और सहायता सेवाएँ उपलब्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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