2 नवंबर 2026
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राजौरी में एलओसी के पास माइन विस्फोट: सेना के कुली कृष्ण लाल का दाहिना पैर कटा, नौशेरा सेक्टर में हादसा

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राजौरी में एलओसी के पास माइन विस्फोट: सेना के कुली कृष्ण लाल का दाहिना पैर कटा, नौशेरा सेक्टर में हादसा

सारांश

राजौरी के नौशेरा सेक्टर में एलओसी के पास एंटी-पर्सनल माइन विस्फोट में सेना के कुली कृष्ण लाल का दाहिना पैर कट गया। भारी बारिश के कारण माइन अपनी जगह से खिसक गई थी — यह उस अदृश्य खतरे की याद दिलाता है जो सीमा के सबसे क़रीब काम करने वाले नागरिक श्रमिकों पर हर दिन मँडराता है।

मुख्य बातें

कृष्ण लाल , सेना के कुली और लंगर गांव निवासी, 2 नवंबर 2026 को नौशेरा सेक्टर में माइन विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए।
विस्फोट में उनका दाहिना पैर कट गया; उन्हें तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हादसा सुबह 11:30 बजे नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट अग्रिम क्षेत्र में हुआ।
अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश के कारण एंटी-पर्सनल माइन अपनी मूल स्थिति से खिसक गई थी।
सेना दुर्घटना में घायल पोर्टरों को मुआवज़ा देने की नीति का पालन करती है।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट सोमवार, 2 नवंबर 2026 को एक गंभीर हादसे में सेना के कुली कृष्ण लाल एंटी-पर्सनल माइन विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, लंगर गांव निवासी कृष्ण लाल का दाहिना पैर विस्फोट में कट गया और उन्हें तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटनाक्रम

अधिकारियों ने बताया कि यह हादसा सुबह 11:30 बजे नौशेरा सेक्टर के अग्रिम क्षेत्र में उस वक्त हुआ जब कृष्ण लाल वहाँ से गुज़र रहे थे और गलती से एंटी-पर्सनल माइन पर पैर पड़ गया। विस्फोट इतना तीव्र था कि उनका दाहिना पैर बुरी तरह घायल हो गया।

अधिकारियों के अनुसार, एलओसी के साथ लगे अग्रिम क्षेत्रों में सीमा पार घुसपैठ रोकने के उद्देश्य से माइनें बिछाई जाती हैं। हालाँकि, भारी बारिश के कारण ये माइनें कभी-कभी अपनी मूल स्थिति से खिसक जाती हैं या बह जाती हैं, जिससे अग्रिम क्षेत्रों में काम करने वाले नागरिकों के लिए अनायास खतरा उत्पन्न हो जाता है।

सेना के कुली — कौन होते हैं ये?

सेना के कुली (पोर्टर) वे नागरिक श्रमिक होते हैं जिन्हें जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती और उच्च-ऊँचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में रसद एवं आपूर्ति ढोने के लिए संविदा आधार पर नियुक्त किया जाता है। ये नागरिक कर्मी सेना के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं और सीमा सुरक्षा तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।

भर्ती के लिए सामान्य मानदंड में 18 से 40 वर्ष की आयु सीमा, पुरुष नागरिक होना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए चिकित्सकीय व शारीरिक रूप से सक्षम होना शामिल है। जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के निवासी आवेदन कर सकते हैं, और तकनीकी रूप से अन्य भारतीय राज्यों के उम्मीदवार भी खुली रैलियों में भाग लेने के पात्र हैं।

मुआवज़े का प्रावधान

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सेना अपने पोर्टरों को कार्य के दौरान किसी दुर्घटना का शिकार होने पर मुआवज़ा देती रही है। यह प्रावधान उन नागरिक श्रमिकों को कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है जो एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बेहद प्रतिकूल मौसम और परिस्थितियों में काम करते हैं।

व्यापक संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में माइन-संबंधी हादसे छिटपुट रूप से सामने आते रहते हैं। गौरतलब है कि भारी वर्षा के मौसम में माइनों के विस्थापन का खतरा और बढ़ जाता है, जिससे अग्रिम क्षेत्रों में तैनात जवानों और नागरिक श्रमिकों दोनों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। कृष्ण लाल के उपचार की स्थिति का अभी कोई अद्यतन सामने नहीं आया है और इस मामले में आगे की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सीमावर्ती क्षेत्रों में काम करने वाले नागरिक पोर्टरों के लिए एक व्यापक सुरक्षा प्रोटोकॉल — जो महज मुआवज़े से आगे जाए — की माँग बार-बार उठती रही है। मुआवज़े का प्रावधान राहत देता है, पर जोखिम को नहीं मिटाता। असली सवाल यह है कि बारिश के मौसम में माइन-मैपिंग और अग्रिम-क्षेत्र अलर्ट प्रणाली को कितना अद्यतन रखा जा रहा है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजौरी माइन विस्फोट में कौन घायल हुए?
सेना के कुली कृष्ण लाल, जो लंगर गांव के निवासी हैं, 2 नवंबर 2026 को नौशेरा सेक्टर में एंटी-पर्सनल माइन विस्फोट में घायल हुए। विस्फोट में उनका दाहिना पैर कट गया और उन्हें तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह माइन विस्फोट क्यों हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश के कारण एलओसी के अग्रिम क्षेत्र में बिछाई गई एंटी-पर्सनल माइन अपनी मूल स्थिति से खिसक गई थी। इसी खिसकी हुई माइन पर कृष्ण लाल का पैर पड़ गया, जिससे विस्फोट हुआ।
सेना के कुली (पोर्टर) कौन होते हैं?
सेना के कुली वे नागरिक श्रमिक होते हैं जिन्हें जम्मू-कश्मीर के दुर्गम सीमावर्ती और उच्च-ऊँचाई वाले क्षेत्रों में रसद व आपूर्ति ढोने के लिए संविदा आधार पर नियुक्त किया जाता है। भर्ती के लिए 18 से 40 वर्ष की आयु सीमा और शारीरिक-चिकित्सकीय रूप से सक्षम होना अनिवार्य है।
घायल सेना कुली को मुआवज़ा मिलेगा?
हाँ, अधिकारियों के अनुसार सेना अपने पोर्टरों को कार्य के दौरान दुर्घटना का शिकार होने पर मुआवज़ा देती रही है। कृष्ण लाल के मामले में भी यही प्रावधान लागू होने की संभावना है।
एलओसी के पास माइनें क्यों बिछाई जाती हैं?
नियंत्रण रेखा के साथ लगे अग्रिम क्षेत्रों में सीमा पार घुसपैठ और आतंकवादी घुसपैठ को रोकने के उद्देश्य से एंटी-पर्सनल माइनें बिछाई जाती हैं। हालाँकि, भारी वर्षा के दौरान ये माइनें अपनी जगह से खिसक सकती हैं, जिससे नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों के लिए अनायास खतरा बढ़ जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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