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छड़ी मुबारक पहलगाम पहुंची: गुरु पूर्णिमा पर 4.25 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, शांति की अरदास

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छड़ी मुबारक पहलगाम पहुंची: गुरु पूर्णिमा पर 4.25 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, शांति की अरदास

सारांश

आषाढ़ पूर्णिमा पर पवित्र छड़ी मुबारक पहलगाम पहुंची और इस वर्ष 4.25 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। सावन माह के आरंभ के साथ यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। पंपोर में माता ज्वाला जी उत्सव में हिंदू-मुस्लिम एकता की झलक भी देखने को मिली।

मुख्य बातें

पवित्र छड़ी मुबारक को गुरु पूर्णिमा पर श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से पहलगाम ले जाया गया।
इस वर्ष अब तक 4,25,000 तीर्थयात्री दर्शन कर सुरक्षित घर लौट चुके हैं।
प्रतिदिन औसतन 17,000 से 18,000 श्रद्धालु यात्रा में शामिल हो रहे हैं।
सावन माह के आरंभ से तीर्थयात्रियों की संख्या में और वृद्धि की संभावना।
पंपोर में माता ज्वाला जी उत्सव में हिंदू-मुस्लिम समुदायों ने मिलकर भाईचारे का संदेश दिया।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के पावन अवसर पर पवित्र छड़ी मुबारक को श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से पहलगाम ले जाया गया। यात्रा के दौरान पारंपरिक भूमि पूजन और नवग्रह पूजन की विधिवत रस्में अदा की गईं। इस वर्ष अब तक 4,25,000 से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर सुरक्षित घर लौट चुके हैं।

यात्रा का क्रम और परंपरा

छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी पूजा-अर्चना और यात्रा का क्रम निर्बाध रूप से जारी है। उन्होंने कहा, "मेरी जानकारी के अनुसार, इस साल लगभग 4,25,000 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं और सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। मौसम की मुश्किल स्थितियों के बावजूद यह यात्रा का वाकई बहुत उत्साहजनक पहलू है।"

महंत गिरी ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 17,000 से 18,000 श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। आज से सावन का पवित्र महीना आरंभ होने के साथ आने वाले दिनों में यह संख्या और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

शांति और समृद्धि की प्रार्थना

महंत दीपेंद्र गिरी ने अपने संदेश में कहा, "प्रार्थना सभी की भलाई के लिए होती है। हमारी परंपरा में हम न सिर्फ ईश्वर की, बल्कि प्रकृति की भी पूजा करते हैं — सागर, नदियां, झरने, जानवर और जीवन के सभी रूपों की। हम प्रार्थना में विश्वास रखते हैं, यह हमारी सच्ची प्रार्थना है। जब हम मुख्य यात्रा के लिए आगे बढ़ेंगे, तो हम अपने केंद्र शासित प्रदेश और पूरे देश में शांति के लिए, और सभी की समृद्धि और भलाई के लिए प्रार्थना करेंगे।"

गौरतलब है कि यह यात्रा जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है, जो सदियों से अनवरत चली आ रही है।

पंपोर में माता ज्वाला जी उत्सव: भाईचारे की मिसाल

इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर के पंपोर में माता ज्वाला जी का वार्षिक उत्सव धार्मिक उत्साह और आपसी सद्भाव के साथ मनाया गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक हवन व अनुष्ठानों में भाग लिया।

इस उत्सव में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने मिलकर हिस्सा लिया, जिसे उपस्थित लोगों ने कश्मीर की सदियों पुरानी साझा सांस्कृतिक विरासत और सह-अस्तित्व की परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। यह ऐसे समय में आया है जब घाटी में सामान्य स्थिति बहाली के प्रयासों को व्यापक सामाजिक समर्थन मिल रहा है।

आगे की यात्रा

सावन माह के आरंभ के साथ तीर्थयात्रियों की संख्या में और वृद्धि की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया है ताकि श्रद्धालु निर्बाध रूप से यात्रा कर सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कश्मीर घाटी में सामान्य स्थिति की बहाली का एक मज़बूत प्रतीक भी है। 4.25 लाख तीर्थयात्रियों का आंकड़ा दर्शाता है कि सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं का भरोसा दोनों मज़बूत हैं। पंपोर में हिंदू-मुस्लिम सहभागिता यह रेखांकित करती है कि सांप्रदायिक सद्भाव की जड़ें घाटी में गहरी हैं — हालांकि इसे संस्थागत रूप देने की ज़िम्मेदारी प्रशासन और नागरिक समाज दोनों पर बराबर है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छड़ी मुबारक क्या है और इसका महत्व क्यों है?
छड़ी मुबारक एक पवित्र राजदंड है जो अमरनाथ यात्रा का अभिन्न प्रतीक है। यह श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से पहलगाम होते हुए अमरनाथ गुफा तक ले जाई जाती है और इसकी देखरेख महंत दीपेंद्र गिरी करते हैं।
इस वर्ष कितने तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ यात्रा की?
महंत दीपेंद्र गिरी के अनुसार इस वर्ष अब तक लगभग 4,25,000 तीर्थयात्री दर्शन कर सुरक्षित घर लौट चुके हैं। प्रतिदिन औसतन 17,000 से 18,000 श्रद्धालु यात्रा में भाग ले रहे हैं।
सावन माह में यात्रा पर क्या असर पड़ेगा?
सावन माह के आरंभ के साथ तीर्थयात्रियों की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद है, क्योंकि यह महीना शिव भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
पंपोर में माता ज्वाला जी उत्सव में क्या हुआ?
जम्मू-कश्मीर के पंपोर में माता ज्वाला जी का वार्षिक उत्सव धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने मिलकर भाग लिया। इसे कश्मीर की साझा सांस्कृतिक विरासत और भाईचारे का प्रतीक बताया गया।
छड़ी मुबारक यात्रा में किन रस्मों का पालन होता है?
यात्रा के दौरान पारंपरिक भूमि पूजन और नवग्रह पूजन की रस्में अदा की जाती हैं। महंत दीपेंद्र गिरी के अनुसार, इस परंपरा में ईश्वर के साथ-साथ प्रकृति — सागर, नदियां, झरने और जीवन के सभी रूपों — की भी पूजा की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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