छड़ी मुबारक पहलगाम पहुंची: गुरु पूर्णिमा पर 4.25 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, शांति की अरदास
सारांश
मुख्य बातें
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के पावन अवसर पर पवित्र छड़ी मुबारक को श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से पहलगाम ले जाया गया। यात्रा के दौरान पारंपरिक भूमि पूजन और नवग्रह पूजन की विधिवत रस्में अदा की गईं। इस वर्ष अब तक 4,25,000 से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर सुरक्षित घर लौट चुके हैं।
यात्रा का क्रम और परंपरा
छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी पूजा-अर्चना और यात्रा का क्रम निर्बाध रूप से जारी है। उन्होंने कहा, "मेरी जानकारी के अनुसार, इस साल लगभग 4,25,000 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं और सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। मौसम की मुश्किल स्थितियों के बावजूद यह यात्रा का वाकई बहुत उत्साहजनक पहलू है।"
महंत गिरी ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 17,000 से 18,000 श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। आज से सावन का पवित्र महीना आरंभ होने के साथ आने वाले दिनों में यह संख्या और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।
शांति और समृद्धि की प्रार्थना
महंत दीपेंद्र गिरी ने अपने संदेश में कहा, "प्रार्थना सभी की भलाई के लिए होती है। हमारी परंपरा में हम न सिर्फ ईश्वर की, बल्कि प्रकृति की भी पूजा करते हैं — सागर, नदियां, झरने, जानवर और जीवन के सभी रूपों की। हम प्रार्थना में विश्वास रखते हैं, यह हमारी सच्ची प्रार्थना है। जब हम मुख्य यात्रा के लिए आगे बढ़ेंगे, तो हम अपने केंद्र शासित प्रदेश और पूरे देश में शांति के लिए, और सभी की समृद्धि और भलाई के लिए प्रार्थना करेंगे।"
गौरतलब है कि यह यात्रा जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है, जो सदियों से अनवरत चली आ रही है।
पंपोर में माता ज्वाला जी उत्सव: भाईचारे की मिसाल
इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर के पंपोर में माता ज्वाला जी का वार्षिक उत्सव धार्मिक उत्साह और आपसी सद्भाव के साथ मनाया गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक हवन व अनुष्ठानों में भाग लिया।
इस उत्सव में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने मिलकर हिस्सा लिया, जिसे उपस्थित लोगों ने कश्मीर की सदियों पुरानी साझा सांस्कृतिक विरासत और सह-अस्तित्व की परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया। यह ऐसे समय में आया है जब घाटी में सामान्य स्थिति बहाली के प्रयासों को व्यापक सामाजिक समर्थन मिल रहा है।
आगे की यात्रा
सावन माह के आरंभ के साथ तीर्थयात्रियों की संख्या में और वृद्धि की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया है ताकि श्रद्धालु निर्बाध रूप से यात्रा कर सकें।