अश्वगंधा: आयुष मंत्रालय और FSSAI की चेतावनी — केवल जड़ का एक्सट्रैक्ट सुरक्षित, पत्तियाँ नहीं

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अश्वगंधा: आयुष मंत्रालय और FSSAI की चेतावनी — केवल जड़ का एक्सट्रैक्ट सुरक्षित, पत्तियाँ नहीं

सारांश

आयुष मंत्रालय और FSSAI ने स्पष्ट किया है कि अश्वगंधा में केवल जड़ और उसका मानक एक्सट्रैक्ट ही सुरक्षित है — पत्तियाँ नहीं। बाज़ार में पत्तियों के मिश्रण वाले उत्पाद बिक रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उपभोक्ताओं को खरीदने से पहले उत्पाद की सामग्री सूची ज़रूर जाँचनी चाहिए।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 8 मई 2026 को X पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि अश्वगंधा की केवल जड़ और मानक एक्सट्रैक्ट ही सुरक्षित है।
FSSAI और आयुष मंत्रालय ने संयुक्त रूप से तय किया है कि किसी भी उत्पाद में पत्तियों का मिश्रण नहीं होना चाहिए।
अश्वगंधा की जड़ में विदानोलाइड्स (Withanolides) नामक सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जो तनाव, थकान और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सहायक हैं।
बाज़ार में कई उत्पाद पत्तियों के मिश्रण के साथ बेचे जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
उपभोक्ताओं को सप्लीमेंट खरीदने से पहले रूट एक्सट्रैक्ट की पुष्टि करना आवश्यक है।

आयुष मंत्रालय ने 8 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सलाह जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अश्वगंधा के पौधे में केवल जड़ और उसके मानक एक्सट्रैक्ट का उपयोग ही सुरक्षित और परंपरागत रूप से स्वीकृत है। मंत्रालय के अनुसार, पत्तियों का उपयोग न तो पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति में उचित माना गया है और न ही वैज्ञानिक दृष्टि से सुरक्षित प्रमाणित हुआ है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब बाज़ार में अनेक उत्पाद अश्वगंधा की पत्तियों के मिश्रण के साथ बेचे जा रहे हैं।

मंत्रालय और FSSAI का संयुक्त निर्देश

आयुष मंत्रालय और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने संयुक्त रूप से यह नियम निर्धारित किया है कि अश्वगंधा-आधारित किसी भी उत्पाद में केवल जड़ और उसके मानक एक्सट्रैक्ट का ही उपयोग किया जाए। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि कई व्यावसायिक उत्पादों में पत्तियों का मिश्रण किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं है। यह निर्देश उपभोक्ताओं को सही उत्पाद चुनने में सहायता के लिए जारी किया गया है।

अश्वगंधा की जड़ के औषधीय गुण

आयुर्वेद में सदियों से अश्वगंधा की जड़ को सर्वाधिक औषधीय गुणों वाला हिस्सा माना जाता रहा है। इसका उपयोग शरीर की कमज़ोरी दूर करने, तनाव कम करने, नींद की गुणवत्ता सुधारने और ऊर्जा स्तर बढ़ाने के लिए किया जाता है। आधुनिक शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि जड़ में पाए जाने वाले सक्रिय तत्व — विशेष रूप से विदानोलाइड्स (Withanolides) — शरीर को तनाव से लड़ने में सहायक होते हैं। कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, उचित मात्रा में इसके जड़ के अर्क का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता को बेहतर बना सकता है।

उपभोक्ताओं के लिए सावधानियाँ

आयुष मंत्रालय की सलाह के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अश्वगंधा सप्लीमेंट, पाउडर या कैप्सूल का सेवन कर रहा है, तो उसे उत्पाद की सामग्री सूची में यह अवश्य जाँचना चाहिए कि उसमें केवल रूट एक्सट्रैक्ट (Root Extract) हो। पत्तियों का मिश्रण होने पर उत्पाद से अपेक्षित स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता और संभावित दुष्प्रभावों का जोखिम भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी हर्बल उत्पाद का सेवन करने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।

हर्बल उत्पाद नियमन की दिशा में सरकारी प्रयास

सरकार और वैज्ञानिक संस्थाएँ हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। FSSAI ने हर्बल सप्लीमेंट के लिए मानक निर्धारित करने की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया है। गौरतलब है कि भारत में अश्वगंधा-आधारित उत्पादों का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, ऐसे में उपभोक्ता जागरूकता और नियामक स्पष्टता दोनों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। आने वाले समय में मंत्रालय की ओर से इस विषय पर और अधिक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन देर से आई — भारत में अश्वगंधा उत्पादों का बाज़ार अरबों रुपये का हो चुका है और अनियमित उत्पाद वर्षों से बिक रहे हैं। असली सवाल यह है कि FSSAI इस नियम को ज़मीनी स्तर पर कैसे लागू करेगा, क्योंकि लेबलिंग मानकों की अनदेखी भारतीय हर्बल बाज़ार में आम है। जब तक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष परीक्षण और सख्त दंड प्रावधान नहीं होंगे, यह सलाह केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह सकती है। उपभोक्ता जागरूकता ज़रूरी है, लेकिन नियामक जवाबदेही उससे भी ज़रूरी है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा को लेकर क्या चेतावनी दी है?
आयुष मंत्रालय ने 8 मई 2026 को स्पष्ट किया कि अश्वगंधा में केवल जड़ और उसका मानक एक्सट्रैक्ट ही सुरक्षित और परंपरागत रूप से स्वीकृत है। पौधे की पत्तियाँ न तो आयुर्वेदिक पद्धति में उचित मानी गई हैं और न ही वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित प्रमाणित हुई हैं।
अश्वगंधा की पत्तियाँ क्यों सुरक्षित नहीं मानी जाती हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, अश्वगंधा की पत्तियों का उपयोग पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति में स्वीकृत नहीं है और वैज्ञानिक शोध भी इन्हें सुरक्षित नहीं मानते। गलत हिस्से के उपयोग से अपेक्षित स्वास्थ्य लाभ नहीं मिलता और दुष्प्रभावों का जोखिम बढ़ सकता है।
अश्वगंधा सप्लीमेंट खरीदते समय क्या जाँचें?
उपभोक्ताओं को उत्पाद की सामग्री सूची में यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसमें केवल 'Root Extract' या 'जड़ का अर्क' लिखा हो। यदि उत्पाद में पत्तियों का उल्लेख हो, तो उसे न खरीदें और FSSAI-प्रमाणित उत्पाद को प्राथमिकता दें।
FSSAI और आयुष मंत्रालय ने मिलकर क्या नियम बनाया है?
दोनों संस्थाओं ने संयुक्त रूप से तय किया है कि अश्वगंधा-आधारित किसी भी खाद्य या सप्लीमेंट उत्पाद में केवल जड़ और उसके मानक एक्सट्रैक्ट का उपयोग होना चाहिए। यह नियम उपभोक्ताओं की सुरक्षा और हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
अश्वगंधा की जड़ के क्या स्वास्थ्य लाभ हैं?
अश्वगंधा की जड़ में विदानोलाइड्स (Withanolides) नामक सक्रिय तत्व पाए जाते हैं जो तनाव कम करने, नींद सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मानसिक थकान घटाने में सहायक हैं। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों ने भी उचित मात्रा में जड़ के अर्क के सेवन को लाभकारी पाया है।
राष्ट्र प्रेस
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