विश्व पर्यावरण दिवस पर असम में 1.02 करोड़ पौधे, महिला स्वयं सहायता समूहों ने रचा रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
असम में 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक वृक्षारोपण अभियान के तहत मात्र आठ घंटे के भीतर राज्यभर में 1,02,35,632 पौधे लगाए गए। इस अभियान की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इसका नेतृत्व 35,34,746 पंजीकृत स्वयं सहायता समूह सदस्यों — मुख्यतः महिलाओं — ने किया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे असम की 'नारी शक्ति' का अद्भुत प्रमाण बताया।
मुख्य घटनाक्रम
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पूरे असम में कुल 1,02,35,632 पौधे एक ही दिन में रोपे गए। अभियान में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जिससे यह असम के सबसे बड़े सामुदायिक वृक्षारोपण अभियानों में शुमार हो गया।
जिलेवार प्रदर्शन
भागीदारी के मामले में नगांव जिला सबसे आगे रहा, जहाँ 2,35,478 स्वयं सहायता समूह सदस्यों ने 5,25,493 पौधे लगाए। पौधारोपण की कुल संख्या के लिहाज़ से बरपेटा जिला शीर्ष पर रहा, जहाँ 5,54,666 पौधे लगाए गए। इसके बाद गोलाघाट में 5,36,590 और बिश्वनाथ में 5,36,000 पौधे रोपे गए।
धुबरी में 5,12,193, उदालगुड़ी में 4,61,500, कामरूप में 4,46,968 और कोकराझार में 4,06,778 पौधे लगाए गए। लखीमपुर, सोनितपुर और मोरीगांव जिलों ने भी तीन लाख से अधिक पौधे लगाकर इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि असम की मेहनती और जागरूक महिलाओं के नेतृत्व में यह अभियान सफल हुआ है और इसने हरित विकास के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने राज्य की सभी महिलाओं को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
पर्यावरण संरक्षण में महत्व
राज्य सरकार ने इस अभियान को पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र विस्तार और जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध जनभागीदारी को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में वनावरण पर दबाव बढ़ रहा है और राज्य सरकारें हरित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दे रही हैं।
आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान की सफलता के बाद राज्य सरकार आने वाले महीनों में रोपे गए पौधों की जीवित रहने की दर पर नज़र रखेगी, ताकि वृक्षारोपण का दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके। यह पहल असम के हरित भविष्य की दिशा में एक निर्णायक जन-आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।