असम बाढ़: 16 जिलों में 5.6 लाख प्रभावित, 21 मौतें; दूरसंचार विभाग ने ICR सुविधा लागू की
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने 22 जुलाई को असम के बाढ़ प्रभावित जिलों में मोबाइल कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए आपातकालीन आधार पर इंट्रा सर्किल रोमिंग (ICR) सुविधा सक्रिय की है। इस कदम से विभिन्न टेलीकॉम ऑपरेटरों के ग्राहक एक-दूसरे के उपलब्ध नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगे, जिससे आपदा के बीच राहत एवं बचाव संचार सुगम होगा। इसी बीच पिछले 24 घंटों में बाढ़ से 21 लोगों की मौत हो चुकी है और 16 जिलों में करीब 5.6 लाख लोग प्रभावित हैं।
ICR सुविधा: कहाँ और कैसे काम करेगी
दूरसंचार विभाग ने फिलहाल चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों में ICR सक्रिय की है। इस व्यवस्था के तहत यदि किसी उपयोगकर्ता के ऑपरेटर का नेटवर्क टॉवर क्षतिग्रस्त या अनुपलब्ध हो, तो वह स्वतः किसी अन्य उपलब्ध ऑपरेटर के नेटवर्क से जुड़ सकेगा। यह सुविधा आपदा-प्रबंधन टीमों, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों के बीच संचार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अहम है।
मुख्य घटनाक्रम: जिलेवार मौतों का ब्यौरा
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा देर रात जारी बुलेटिन के अनुसार, सर्वाधिक प्रभावित शिवसागर जिले में 13 लोगों की जान गई। इसके अतिरिक्त चराइदेव में 5, गोलाघाट में 2 और जोरहाट में 1 व्यक्ति की मृत्यु हुई। बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है और राहत अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
सेना का 'ऑपरेशन जल राहत-3'
राज्य प्रशासन के अनुरोध पर भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन जल राहत-3' शुरू किया है। सेना अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 150 लोगों को सुरक्षित निकाल चुकी है — इनमें 73 पुरुष, 47 महिलाएँ और 30 बच्चे शामिल हैं। बचाव अभियान में इंजीनियर टास्क फोर्स की सहायता ली जा रही है और विशेष दल निकासी, बचाव तथा मानवीय सहायता कार्यों में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री का हवाई सर्वेक्षण
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा बुधवार को चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे और बाढ़ की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब प्रशासन पर राहत वितरण और संचार व्यवस्था को तेज़ करने का दबाव बढ़ रहा है।
आगे क्या
गौरतलब है कि असम हर वर्ष मानसून में विनाशकारी बाढ़ का सामना करता है, परंतु इस बार शिवसागर जैसे ऊपरी असम के जिलों में एकसाथ इतनी मौतें चिंताजनक हैं। ICR जैसी आपातकालीन दूरसंचार व्यवस्था और सेना की सक्रिय भागीदारी राहत में सहायक है, लेकिन प्रभावित लोगों तक खाद्य सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुँचाना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।