10 अगस्त 2026
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अरुणाचल फ्लैश फ्लड के बाद असम में हाई अलर्ट, धेमाजी से धुबरी तक खतरे की चेतावनी

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अरुणाचल फ्लैश फ्लड के बाद असम में हाई अलर्ट, धेमाजी से धुबरी तक खतरे की चेतावनी

सारांश

अरुणाचल के लोअर सुबनसिरी में 72.8 मिमी बारिश और फ्लैश फ्लड ने असम को हाई अलर्ट पर ला दिया है। पन्योर परियोजना का स्पिलवे गेट खुला, याजाली में मकानों को नुकसान। बाढ़ की लहर धेमाजी से धुबरी तक पहुँच सकती है — एनडीआरएफ-एसडीआरएफ तैनात।

मुख्य बातें

असम सरकार ने 24 जून 2026 को अरुणाचल फ्लैश फ्लड के बाद राज्यव्यापी हाई अलर्ट जारी किया।
याजाली स्टेशन पर 24 घंटों में 72.8 मिमी वर्षा दर्ज; अधिकांश बारिश सुबह 6 से 9 बजे के बीच।
पन्योर लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना का एक स्पिलवे गेट खोला गया; याजाली में मकान और बुनियादी ढाँचा क्षतिग्रस्त।
बाढ़ की लहर धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ, सोनितपुर से होते हुए धुबरी तक पहुँच सकती है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के निर्देश पर मुख्य सचिव रवि कोटा ने समीक्षा की; एनडीआरएफ व एसडीआरएफ तैनाती के लिए तैयार।
प्रशासन ने नागरिकों को नावों से यात्रा और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी।

अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले में 24 जून 2026 को हुई मूसलाधार बारिश और अचानक आई फ्लैश फ्लड के बाद असम सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, अगले एक-दो दिनों में सुबनसिरी नदी बेसिन से जुड़े कई निचले जिलों में जलस्तर तेज़ी से बढ़ सकता है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं।

बाढ़ का कारण और मौसम डेटा

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी), गुवाहाटी और मौसम केंद्र, ईटानगर के आँकड़ों के अनुसार, याजाली स्टेशन पर पिछले 24 घंटों में 72.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इनमें से अधिकांश बारिश बुधवार सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच हुई। उपग्रह और रडार तस्वीरों से यह भी पुष्टि हुई है कि सुबह 6 बजे से 7:30 बजे के बीच हुई भारी बारिश ने नदी के जलप्रवाह में तीव्र उछाल ला दिया।

पन्योर जलविद्युत परियोजना का स्पिलवे गेट खुला

यह बाढ़ पन्योर लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना क्षेत्र में दर्ज की गई, जिसे पहले रंगानदी हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना के नाम से जाना जाता था। अधिकारियों के अनुसार, जलप्रवाह में अचानक वृद्धि के कारण अतिरिक्त पानी निकालने के लिए परियोजना का एक स्पिलवे गेट खोला गया। याजाली क्षेत्र से आई रिपोर्टों के मुताबिक मलबे के साथ आई बाढ़ से कई मकानों और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचा है।

कौन-से जिले होंगे प्रभावित

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि बाढ़ की लहर सबसे पहले धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ और सोनितपुर जिलों को प्रभावित कर सकती है। इसके बाद यह पश्चिमी असम की ओर बढ़ते हुए अगले एक-दो दिनों में धुबरी तक पहुँच सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब असम पहले से ही मानसूनी बारिश की पहली लहर से जूझ रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और तैयारियाँ

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के निर्देश पर मुख्य सचिव रवि कोटा ने स्थिति की समीक्षा की और सभी संबंधित विभागों को अधिकतम सतर्कता बरतने तथा आपदा से निपटने की पूरी तैयारी रखने के आदेश दिए। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य आपदा राहत एजेंसियों की टीमों को तत्काल तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। जिला प्रशासन को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

आम जनता के लिए सलाह

प्रशासन ने निचले और बाढ़-संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचने तथा छोटी नावों और देशी नौकाओं से यात्रा न करने की सलाह दी है। नदी की धाराएँ और तेज़ होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे आधिकारिक निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचित करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे नदी किनारे बसे गाँवों को तैयारी का समय नहीं मिलता। असली सवाल यह है कि क्या राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली केवल प्रतिक्रियावादी है या इसमें वास्तविक समय की पूर्व-चेतावनी और नदी-किनारे समुदायों की स्थायी पुनर्वास योजना भी शामिल है। जब तक ये संरचनात्मक सुधार नहीं होते, हाई अलर्ट महज़ एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में हाई अलर्ट क्यों जारी किया गया है?
अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले में 24 जून 2026 को हुई भारी बारिश (72.8 मिमी) और फ्लैश फ्लड के कारण सुबनसिरी नदी के जलप्रवाह में तीव्र वृद्धि हुई है। इससे असम के कई निचले जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, इसलिए सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया।
कौन-से जिले सबसे पहले प्रभावित होंगे?
अधिकारियों के अनुसार बाढ़ की लहर सबसे पहले धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ और सोनितपुर जिलों को प्रभावित कर सकती है। इसके बाद अगले एक-दो दिनों में यह पश्चिमी असम होते हुए धुबरी तक पहुँच सकती है।
पन्योर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना का स्पिलवे गेट क्यों खोला गया?
जलप्रवाह में अचानक और तीव्र वृद्धि के कारण परियोजना में अतिरिक्त पानी जमा हो गया, जिसे निकालने के लिए एक स्पिलवे गेट खोलना ज़रूरी हो गया। इससे नदी के निचले हिस्सों में जल-प्रवाह और बढ़ने की आशंका है।
सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के निर्देश पर मुख्य सचिव रवि कोटा ने समीक्षा बैठक की और सभी विभागों को अधिकतम सतर्कता बरतने के आदेश दिए। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य आपदा राहत टीमों को तत्काल तैनाती के लिए तैयार रखा गया है और जिला प्रशासन को लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
प्रशासन ने नागरिकों को जलभराव वाले इलाकों में न जाने, छोटी नावों या देशी नौकाओं से यात्रा न करने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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