अरुणाचल के कीई पन्योर में फ्लैश फ्लड: तीन लापता, 20 घर क्षतिग्रस्त; असम में हाई अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के कीई पन्योर जिले में 24 जून 2026 को 48 घंटे की अविराम भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने कम से कम तीन लोगों को लापता कर दिया और करीब 20 घर व आवासीय इकाइयाँ क्षतिग्रस्त हो गईं। बाढ़ की आशंका को देखते हुए पड़ोसी राज्य असम में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, याजाली सर्कल अंतर्गत पूसा स्थित नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NEEPCO) परियोजना कॉलोनी के निकट फ्लैश फ्लड में तीन लोग लापता हो गए। तेज बारिश के कारण एक रिटेनिंग वॉल ढह गई और बाढ़ का पानी याजाली क्षेत्र के कई निचले रिहायशी इलाकों में घुस गया। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों — गुवाहाटी और ईटानगर — के आंकड़ों के अनुसार, याजाली में पिछले 24 घंटों में 72.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिसमें से अधिकांश 24 जून की सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच हुई।
उपग्रह और रडार चित्रों से बुधवार सुबह अत्यधिक वर्षा की पुष्टि हुई, जिसके कारण ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में नदी के प्रवाह में अचानक वृद्धि दर्ज की गई। पन्योर लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (पूर्व नाम: रांगनदी हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना) क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की सूचना मिली, जिसके बाद जल प्रवाह नियंत्रित करने के लिए एक स्पिलवे गेट खोला गया।
बुनियादी ढाँचे को नुकसान
ईटानगर के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, लगातार भारी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ, जिससे यातायात बाधित हो गया और कई यात्री रास्ते में फँस गए। याजाली से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, मलबे के साथ आई बाढ़ ने मकानों और बुनियादी ढाँचे को व्यापक क्षति पहुँचाई है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और आधारभूत संरचना को नुकसान की घटनाएँ सामने आ रही हैं।
NEEPCO ने एहतियात के तौर पर रांगनदी बाँध से पानी छोड़ना शुरू कर दिया है और परियोजना में बिजली उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
राहत एवं बचाव कार्य
घटना की सूचना मिलते ही अतिरिक्त उपायुक्त, पुलिस उपाधीक्षक और सर्कल अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुँच गए और नुकसान के आकलन के साथ राहत-बचाव कार्यों का समन्वय कर रहे हैं। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम मौके पर तैनात कर दी गई है, जबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के जवान भी अभियान में शामिल होने के लिए रवाना हो चुके हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
असम में हाई अलर्ट
अधिकारियों को आशंका है कि ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश और बढ़ते जलप्रवाह के कारण असम में ब्रह्मपुत्र नदी तथा उसकी सहायक नदियों का जलस्तर और प्रवाह गति काफी बढ़ सकती है। बाढ़ की लहर सबसे पहले धेमाजी, लखीमपुर, बिश्वनाथ और सोनितपुर जिलों को प्रभावित कर सकती है, और अगले एक-दो दिनों में धुबरी तक पहुँचने की संभावना है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के निर्देश पर मुख्य सचिव रवि कोटा ने सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को अधिकतम सतर्कता बरतने तथा हर स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है। राज्य सरकार ने निचले और बाढ़-संभावित क्षेत्रों के निवासियों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। लोगों को जलमग्न क्षेत्रों में जाने और ब्रह्मपुत्र व उसकी सहायक नदियों में छोटी नावों से यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है।
आगे क्या होगा
असम सरकार ने कहा है कि सभी संबंधित एजेंसियों और जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा जा रहा है तथा जन सुरक्षा के हित में समय-समय पर एडवाइजरी और अपडेट जारी किए जाएँगे। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में मानसून अपने चरम पर है और इस क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हर साल बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान करती हैं। लापता लोगों की तलाश और राहत कार्य जारी हैं।