29 जून 2026
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अरुणाचल बाढ़: 12 जिलों में हजारों प्रभावित, केयी पैन्योर में मृतक संख्या तीन हुई

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अरुणाचल बाढ़: 12 जिलों में हजारों प्रभावित, केयी पैन्योर में मृतक संख्या तीन हुई

सारांश

अरुणाचल प्रदेश के 12 जिलों में मानसून की मार — केयी पैन्योर में तीन की मौत, दो लापता। BRO ने 36 घंटे में किमिन-पोटिन सड़क बहाल की, IAF ने राहत पहुँचाई। IMD ने 1 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

अरुणाचल प्रदेश के 28 में से 12 जिलों में मानसून बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित, 29 जून 2026 तक बचाव अभियान जारी।
केयी पैन्योर जिले में 23 जून से जारी अचानक बाढ़ में तीन लोगों की मौत ; तीसरे मृतक सौरभ कुमार खरवार (48) का शव पापुम पारे के हवा कैंप के पास मिला।
एक नाबालिग समेत दो लोग अभी भी लापता ; यजाली सर्कल में लगभग 20 घर और इमारतें क्षतिग्रस्त।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वर्चुअल समीक्षा बैठक की; सरकार ने राहत, बचाव और सड़क बहाली के निर्देश दिए।
BRO ने 45 किलोमीटर लंबी किमिन-पोटिन सड़क मात्र 36 घंटों में बहाल की; IAF ने 25 जून को राहत सामग्री और NDRF जवान पहुँचाए।
IMD ने 1 जुलाई तक अरुणाचल में भारी से बहुत भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है।

अरुणाचल प्रदेश के 12 जिलों में 29 जून 2026 को मानसून की लगातार बारिश से उत्पन्न बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, सर्वाधिक प्रभावित केयी पैन्योर जिले में 23 जून से जारी अचानक बाढ़ में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और दो अन्य — जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है — अभी भी लापता हैं।

मृतकों की पहचान और बचाव अभियान

तीसरे मृतक की पहचान सौरभ कुमार खरवार (48) के रूप में हुई है, जिनका शव रविवार को पड़ोसी पापुम पारे जिले के हवा कैंप के निकट मिला। इससे पहले बुधवार और शनिवार को क्रमशः एक 35 वर्षीय महिला और एक अन्य महिला के शव बरामद किए गए थे। केयी पैन्योर के यजाली सर्कल में अचानक आई बाढ़ से लगभग 20 घर और रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

प्रभावित 12 जिलों में — जिनमें केयी पैन्योर, पापुम पारे, क्रा दादी, कुरुंग कुमे, लोअर सुबनसिरी, कामले, अपर सुबनसिरी, ईस्ट सियांग, लेपाराडा और लोअर सियांग शामिल हैं — बचाव अभियान जारी है। सड़कें, पुल और घर क्षतिग्रस्त होने से जमीनी संपर्क बाधित हुआ है। नुकसान के सटीक आँकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है क्योंकि अधिकारी प्रभावित जिलों से जानकारी एकत्र और सत्यापित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री की वर्चुअल समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को राज्यभर की बाढ़ स्थिति की वर्चुअल समीक्षा की। इस बैठक में मुख्य सचिव मनीष गुप्ता, पुलिस महानिदेशक डॉ. एस.डी. सिंह जमवाल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कुरुंग कुमे, क्रा दादी, लोअर सुबनसिरी, केयी पैन्योर और कामले के उपायुक्त शामिल हुए।

खांडू ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हमने राहत, बचाव, सड़क बहाली, चिकित्सा सहायता और जरूरी सामान की उपलब्धता की समीक्षा की, साथ ही समय पर मदद और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के उपायों पर चर्चा की। सरकार प्रभावित समुदायों को हरसंभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।'

IMD की चेतावनी और सतर्कता की अपील

खांडू ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हवाले से बताया कि अरुणाचल प्रदेश में 1 जुलाई तक गरज और बिजली के साथ व्यापक बारिश की संभावना है। कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा का अनुमान है, जिससे संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़, जलभराव और सड़क-बिजली-संचार सेवाओं में रुकावट की आशंका है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से सतर्क रहने, जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा न करने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।

BRO और वायु सेना की त्वरित कार्रवाई

बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने भारी बारिश और भूस्खलन से ध्वस्त हुई किमिन-पोटिन सड़क को मात्र 36 घंटों में बहाल कर दिया। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत के अनुसार, 45 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ और मार्ग कीचड़, बड़े पत्थरों व उखड़े पेड़ों से बंद हो गया था, जिससे पोटिन, यजाली, याचुली, जोरम और जिरो जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से संपर्क पूरी तरह टूट गया था।

25 जून को भारतीय वायु सेना (IAF) के एक हेलीकॉप्टर को राहत सामग्री — जिसमें एक बचाव नौका भी शामिल थी — पहुँचाने और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के जवानों को बाढ़ प्रभावित केयी पैन्योर जिले तक पहुँचाने के लिए तैनात किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में मानसून की तीव्रता हर वर्ष बढ़ती जा रही है और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र पर दबाव लगातार बना रहता है।

बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और अगले कुछ दिनों में मौसम की चाल पर सबकी नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भूस्खलन, संपर्क टूटना और फिर आपातकालीन बहाली। BRO की 36 घंटे में सड़क बहाली प्रशंसनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में स्थायी बाढ़-रोधी अवसंरचना कब बनेगी। IMD की चेतावनी प्रणाली सक्रिय है, फिर भी 23 जून से 29 जून के बीच तीन मौतें और दो लापता यह संकेत देते हैं कि अंतिम-मील तक सूचना और निकासी तंत्र अभी भी कमज़ोर है। पूर्वोत्तर में जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक बाढ़ की आवृत्ति बढ़ रही है — केवल प्रतिक्रियात्मक राहत से आगे बढ़कर निवारक नीति की ज़रूरत अब अपरिहार्य हो चुकी है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ से कितने जिले प्रभावित हैं और स्थिति क्या है?
अरुणाचल प्रदेश के 28 में से 12 जिले मानसून बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हैं। सड़कें, पुल और घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और जमीनी संपर्क बाधित है; बचाव अभियान जारी है।
केयी पैन्योर में बाढ़ से कितनी मौतें हुई हैं और लापता कौन हैं?
केयी पैन्योर जिले में 23 जून से जारी अचानक बाढ़ में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। तीसरे मृतक सौरभ कुमार खरवार (48) का शव पापुम पारे के हवा कैंप के पास मिला; एक नाबालिग समेत दो अन्य अभी भी लापता हैं।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बाढ़ पर क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 29 जून को वर्चुअल समीक्षा बैठक कर राहत, बचाव, सड़क बहाली, चिकित्सा सहायता और जरूरी सामान की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने नागरिकों से सतर्क रहने और जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा न करने की अपील भी की।
BRO ने किमिन-पोटिन सड़क कितने समय में बहाल की और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने 45 किलोमीटर लंबी किमिन-पोटिन सड़क मात्र 36 घंटों में बहाल की। यह सड़क पोटिन, यजाली, याचुली, जोरम और जिरो जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ती है, जिनका संपर्क भूस्खलन से पूरी तरह टूट गया था।
IMD ने अरुणाचल प्रदेश के लिए क्या मौसम चेतावनी जारी की है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 जुलाई तक अरुणाचल प्रदेश में गरज और बिजली के साथ व्यापक बारिश का अनुमान जताया है। कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा और संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ व जलभराव की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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