प्रियंका गांधी वाड्रा ने सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे पर जताई चिंता
सारांश
Key Takeaways
- प्रद्युत बोरदोलोई का कांग्रेस से इस्तीफा एक गंभीर राजनीतिक घटना है।
- प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस पर चिंता जताई है।
- बोरदोलोई का भाजपा में शामिल होने का इरादा है।
- यह कांग्रेस के लिए असम में एक बड़ा झटका हो सकता है।
नई दिल्ली, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम से कांग्रेस के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी से इस्तीफाप्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने मीडिया से कहा कि बोरदोलोई संभवतः टिकट वितरण को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी को उनसे बात करने का मौका मिलता, तो शायद समस्या का समाधान हो जाता। लेकिन इस तरह का निर्णय लेने की जानकारी हमें नहीं थी।
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, "मैं ओडिशा के नेताओं, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आभार व्यक्त करता हूँ। ग़लत काम करने वालों और गद्दारों को निलंबित किया गया है। मैं मांग करता हूँ कि बिहार में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाए। यह बहुत आवश्यक है।"
पूर्व कांग्रेस नेता नवज्योति तालुकदार ने कहा, "मैं असम जाकर भाजपा में शामिल होने जा रहा हूँ। सांसद प्रद्युत बोरदोलोई भी भाजपा में शामिल हो रहे हैं और हमारी असम के मुख्यमंत्री से बातचीत हुई है।"
जब बोरदोलोई से पूछा गया कि क्या वे भाजपा में शामिल हो रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मुझे बुलाया गया है।
गौरतलब है कि बोरदोलोई ने हाल ही में पार्टी के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए अपना पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था। उन्होंने इस्तीफे में लिखा, "बहुत दुख के साथ मैं कांग्रेस के सभी पदों, खास अधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे रहा हूँ।" पत्र में शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने पार्टी को अलविदा कहा।
बोरदोलोई असम के डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने २०१९ और २०२४ के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। डिब्रूगढ़ एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और चाय उत्पादन क्षेत्र है, जहाँ भाजपा की मजबूत पकड़ रही है। वे जल्द ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं और पार्टी की असम इकाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह घटना कांग्रेस के लिए असम में बड़ा झटका मानी जा रही है, जहाँ पार्टी पहले से ही संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक कलह से जूझ रही है।