16 सितंबर 2026
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अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली में पीएचडी स्कॉलर्स का विरोध जारी, आइसा का समर्थन; डीन ने सर्कुलर वापसी से इनकार किया

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अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली में पीएचडी स्कॉलर्स का विरोध जारी, आइसा का समर्थन; डीन ने सर्कुलर वापसी से इनकार किया

सारांश

अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली में पीएचडी स्कॉलर्स का विरोध चौथे दिन भी जारी रहा। आइसा के समर्थन के बाद भी डीन ने सर्कुलर वापसी से इनकार किया। प्रशासन के भीतर ही परस्पर विरोधी बयान तालमेल की कमी उजागर कर रहे हैं और छात्रों ने संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।

मुख्य बातें

अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (एयूडी) में 31 जुलाई को जारी अनिवार्य उपस्थिति सर्कुलर के खिलाफ 16 सितंबर 2026 को चौथी बार बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ।
आइसा ने पीएचडी स्कॉलर्स की 'जॉइंट एक्शन कमेटी' के आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
डीन (एकेडमिक अफेयर्स) डॉ.
सत्यकेतु संस्कृत ने बुधवार की बैठक में सर्कुलर वापस लेने से स्पष्ट इनकार किया।
बैठक के दौरान सेक्शन ऑफिसर द्वारा स्कॉलर्स से पहचान पत्र माँगने का आरोप; स्कॉलर्स ने देने से इनकार किया।
डीन ने उसी सर्कुलर पर सवाल उठाए जिस पर उन्होंने खुद हस्ताक्षर किए थे , जिससे प्रशासन के भीतर तालमेल की कमी उजागर हुई।
स्कॉलर्स ने शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।

अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (एयूडी) में पीएचडी स्कॉलर्स के लिए अनिवार्य उपस्थिति लागू करने वाले सर्कुलर के खिलाफ छात्र आंदोलन 16 सितंबर 2026 को भी जारी रहा, जब वामपंथी छात्र संगठन आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) ने भी इस विरोध में अपना समर्थन जोड़ दिया। डीन (एकेडमिक अफेयर्स) डॉ. सत्यकेतु संस्कृत के साथ बुधवार को हुई बैठक बेनतीजा रही और उन्होंने सर्कुलर वापस लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

विवाद की जड़: 31 जुलाई का सर्कुलर

यह पूरा मामला 31 जुलाई को एयूडी के डीन (एकेडमिक अफेयर्स) द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर से शुरू हुआ, जिसमें पीएचडी स्कॉलर्स के लिए अनिवार्य उपस्थिति रजिस्टर का प्रावधान किया गया। छात्र समुदाय इसे शोध की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर सीधा हमला बता रहा है। स्कॉलर्स का तर्क है कि विश्वविद्यालय में बुनियादी ढाँचे की भारी कमी है और ऐसे में जबरन निगरानी की व्यवस्था थोपना उचित नहीं है।

पीएचडी स्कॉलर्स की 'जॉइंट एक्शन कमेटी' इस सर्कुलर को पूरी तरह वापस लेने की माँग लेकर लगातार संघर्ष कर रही है। बुधवार का प्रदर्शन इस क्रम में चौथी बार था जब बड़ी संख्या में स्कॉलर्स और छात्र प्रतिनिधि एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरे।

आइसा का समर्थन और बैठक का ब्यौरा

आइसा के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को पीएचडी स्कॉलर्स के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और सर्कुलर को पूरी तरह वापस लेने की माँग का खुलकर समर्थन किया। इसी दिन छात्रों के काउंसलर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीन (एकेडमिक अफेयर्स) डॉ. सत्यकेतु संस्कृत से मुलाकात की।

बैठक के दौरान एक विवादित घटना भी सामने आई — आरोप है कि बातचीत के लिए आए सेक्शन ऑफिसर ने पीएचडी स्कॉलर्स से उनके पहचान पत्र माँगे, जिसे देने से स्कॉलर्स ने इनकार कर दिया। स्कॉलर्स ने इसे प्रशासनिक दबाव की रणनीति बताया।

प्रशासन के भीतर ही तालमेल की कमी

बैठक में एक और विरोधाभास सामने आया — डीन ने उसी सर्कुलर पर सवाल उठाए जिस पर उन्होंने खुद हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने दावा किया कि अनिवार्य उपस्थिति रजिस्टर की माँग स्कूल डीन्स ने की थी। वहीं, कुछ स्कूल डीन्स ने स्कॉलर्स को बताया था कि ऐसा सर्कुलर जारी करना केंद्रीय प्रशासन की जिम्मेदारी थी। यह परस्पर विरोधी बयान विश्वविद्यालय प्रशासन के भीतर समन्वय की गंभीर कमी को उजागर करता है।

जंतर-मंतर आंदोलन से संबंध का आरोप

स्कॉलर्स ने यह भी आरोप लगाया है कि यह सर्कुलर उस आंदोलन के जवाब में जारी किया गया, जो जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर हुआ था और जो सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था। यदि यह आरोप सही है, तो इसका अर्थ है कि अनिवार्य उपस्थिति का सर्कुलर शैक्षणिक कारणों से नहीं, बल्कि छात्र सक्रियता को नियंत्रित करने की मंशा से जारी किया गया — जो एक गंभीर आरोप है।

आगे का रास्ता

आइसा के अनुसार, बुधवार की बैठक बेनतीजा रही और डीन ने सर्कुलर वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद स्कॉलर्स और छात्रों ने ऐलान किया है कि उनका शांतिपूर्ण संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अनिवार्य उपस्थिति वाला सर्कुलर पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन बढ़ते दबाव के सामने अपना रुख बदलता है या आंदोलन और तेज होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासनिक जवाबदेही की गंभीर कमी दर्शाता है। यह आरोप कि सर्कुलर जंतर-मंतर आंदोलन के जवाब में जारी किया गया, अगर सही है, तो यह शैक्षणिक नीति को राजनीतिक प्रतिशोध के औजार के रूप में इस्तेमाल करने का मामला बनता है — जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। बुनियादी ढाँचे की कमी की स्वीकृति के बावजूद निगरानी थोपना प्राथमिकताओं की उलटी समझ है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली में पीएचडी स्कॉलर्स का विरोध किस बात को लेकर है?
एयूडी के डीन (एकेडमिक अफेयर्स) द्वारा 31 जुलाई को जारी किए गए उस सर्कुलर के खिलाफ विरोध हो रहा है जिसमें पीएचडी स्कॉलर्स के लिए अनिवार्य उपस्थिति रजिस्टर का प्रावधान किया गया है। स्कॉलर्स इसे शोध की स्वतंत्रता पर हमला और बुनियादी ढाँचे की कमी के बावजूद जबरन निगरानी का प्रयास बता रहे हैं।
आइसा ने इस विरोध में कब और कैसे भाग लिया?
आइसा के कार्यकर्ताओं ने 16 सितंबर 2026 को पीएचडी स्कॉलर्स के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और सर्कुलर को पूरी तरह वापस लेने की माँग का समर्थन किया। यह इस विवाद में किसी बड़े छात्र संगठन का पहला औपचारिक समर्थन था।
बुधवार की डीन के साथ बैठक का क्या नतीजा रहा?
डीन (एकेडमिक अफेयर्स) डॉ. सत्यकेतु संस्कृत के साथ बुधवार की बैठक बेनतीजा रही। उन्होंने सर्कुलर वापस लेने से स्पष्ट इनकार किया और जिम्मेदारी स्कूल डीन्स पर डाल दी। बैठक के दौरान सेक्शन ऑफिसर द्वारा स्कॉलर्स से पहचान पत्र माँगने का भी विवाद रहा।
इस सर्कुलर का जंतर-मंतर आंदोलन से क्या संबंध बताया जा रहा है?
स्कॉलर्स ने आरोप लगाया है कि यह सर्कुलर जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर हुए उस आंदोलन के जवाब में जारी किया गया, जो सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था। हालाँकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस आरोप पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
एयूडी के पीएचडी स्कॉलर्स आगे क्या करेंगे?
स्कॉलर्स और छात्रों ने घोषणा की है कि उनका शांतिपूर्ण संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अनिवार्य उपस्थिति वाला सर्कुलर पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। यह चौथा बड़ा प्रदर्शन है और आइसा के समर्थन के बाद आंदोलन के व्यापक होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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