11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आजमगढ़ हत्याकांड: प्रॉपर्टी विवाद में सुशील कुमार की हत्या, मृतक के दो साथी उमाशंकर व वीरेंद्र गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आजमगढ़ हत्याकांड: प्रॉपर्टी विवाद में सुशील कुमार की हत्या, मृतक के दो साथी उमाशंकर व वीरेंद्र गिरफ्तार

सारांश

आजमगढ़ में प्रॉपर्टी डीलिंग का विवाद खून तक पहुँचा — और हत्यारे कोई बाहरी नहीं, बल्कि मृतक के अपने साथी निकले। पुलिस ने फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से साजिश का पर्दाफाश किया और उमाशंकर व वीरेंद्र यादव को गिरफ्तार कर 315 बोर तमंचा बरामद किया।

मुख्य बातें

सुशील कुमार की हत्या 20 मई 2026 की रात रानीपुर गांव मार्ग पर की गई; मामला 26 मई को सुलझाया गया।
मृतक के दो साथी — उमाशंकर उर्फ पिन्टू यादव और वीरेंद्र उर्फ बिन्दू यादव — गिरफ्तार।
आरोपियों की निशानदेही पर 315 बोर का तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद।
हत्या का कारण जमीन की डीलिंग और पैसों का विवाद ; पुलिस के अनुसार यह पूर्व नियोजित थी।
आरोपियों ने जाँच भटकाने के लिए गाड़ी के शीशे पर फायर कर अन्य लोगों को फंसाने की साजिश रची थी।
मामले में हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज; विवेचना जारी।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में जमीन की डीलिंग और पैसों के लेनदेन को लेकर हुई सुशील कुमार की हत्या का पुलिस ने 26 मई 2026 को खुलासा कर दिया। मृतक के दो करीबी साथियों — उमाशंकर उर्फ पिन्टू यादव और वीरेंद्र उर्फ बिन्दू यादव — को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार यह हत्या पूर्व नियोजित थी और आरोपियों ने अपराध को छुपाने के लिए भ्रामक साजिश भी रची थी।

मुख्य घटनाक्रम

जहानागंज थाना क्षेत्र के कोढ़वा गांव निवासी सुनील कुमार ने 21 मई को मुबारकपुर थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि उनके भाई सुशील कुमार 20 मई की रात अपने साथी उमाशंकर उर्फ पिन्टू यादव के साथ चार पहिया वाहन से एक निमंत्रण कार्यक्रम में गए थे।

देर रात सूचना मिली कि रानीपुर गांव जाने वाले मार्ग पर हनुमान मंदिर के पास पंकज सिंह उर्फ सोनू सिंह, अवनीश यादव उर्फ बबलू यादव और एक अज्ञात व्यक्ति ने सुशील कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू की।

जाँच का तरीका

जाँच के दौरान पुलिस ने सीडीआर विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिको-लीगल रिपोर्ट, फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद और घटनास्थल के सीन रीक्रिएशन का सहारा लिया। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उमाशंकर उर्फ पिन्टू यादव और वीरेंद्र उर्फ बिन्दू यादव पर संदेह गहरा हुआ।

इसके बाद पुलिस ने सठियांव रेलवे स्टेशन के पास से उमाशंकर यादव को गिरफ्तार किया, जिसके पास से ₹400 बरामद हुए। दूसरी कार्रवाई में वीरेंद्र उर्फ बिन्दू यादव को कोढ़वा अचलपार मार्ग स्थित मंदिर के पास से पकड़ा गया, जिसके पास से ₹150 मिले। आरोपी की निशानदेही पर झाड़ियों से 315 बोर का तमंचा और दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए।

हत्या की साजिश का खुलासा

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी। 20 मई की रात उमाशंकर यादव ने वीरेंद्र यादव को रानीपुर बुलाया था। उस समय गाड़ी में सुशील कुमार पहले से मौजूद था और वह नशे की हालत में था।

पुलिस के अनुसार, सुनसान रास्ते पर जमीन के लेनदेन और पैसों के विवाद को लेकर उमाशंकर ने सुशील कुमार के सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने जाँच को भटकाने के लिए गाड़ी के शीशे पर भी एक फायर किया और तमंचा वीरेंद्र यादव को छिपाने के लिए सौंप दिया।

पुलिस अधीक्षक की प्रतिक्रिया

आजमगढ़ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पाँच दिन पूर्व एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या की सूचना मिली थी। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वीडियोग्राफी, मेडिको-लीगल रिपोर्ट और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से यह स्पष्ट हुआ कि गाड़ी में मौजूद उमाशंकर ने अपने साथी बिन्दू यादव के साथ मिलकर हत्या को अंजाम दिया था।

डॉ. कुमार ने यह भी बताया कि आरोपियों ने घटना को दूसरा रूप देकर अन्य निर्दोष लोगों को फंसाने की साजिश रची थी, लेकिन वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

आगे की कार्रवाई

दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब प्रारंभिक तहरीर में नामजद पंकज सिंह उर्फ सोनू सिंह और अवनीश यादव उर्फ बबलू यादव की भूमिका की भी जाँच कर रही है, जिन पर मूल शिकायत में आरोप लगाए गए थे। मामले में आगे की विवेचना जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अपराधी अक्सर पीड़ित के करीबी ही होते हैं। उल्लेखनीय यह है कि आरोपियों ने निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सोची-समझी भ्रामक साजिश रची — जो दर्शाता है कि अपराध की योजना कितनी परिष्कृत थी। पुलिस का फॉरेंसिक और सीडीआर-आधारित दृष्टिकोण सराहनीय है, लेकिन प्रारंभिक तहरीर में नामजद व्यक्तियों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है — यह सवाल बना रहता है कि उन्हें कब और कैसे क्लीन चिट मिलेगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजमगढ़ हत्याकांड में मृतक कौन था और हत्या कब हुई?
मृतक का नाम सुशील कुमार था, जो जहानागंज थाना क्षेत्र के कोढ़वा गांव का निवासी था। उसकी हत्या 20 मई 2026 की रात रानीपुर गांव जाने वाले मार्ग पर हनुमान मंदिर के पास की गई।
किसे गिरफ्तार किया गया और उन पर क्या आरोप है?
मृतक के दो साथियों — उमाशंकर उर्फ पिन्टू यादव और वीरेंद्र उर्फ बिन्दू यादव — को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार उमाशंकर ने जमीन और पैसों के विवाद में सुशील कुमार के सिर में गोली मारी, जबकि वीरेंद्र ने हत्या में सहयोग किया और तमंचा छिपाया।
पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा कैसे किया?
पुलिस ने सीडीआर विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिको-लीगल रिपोर्ट, फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद और घटनास्थल के सीन रीक्रिएशन का उपयोग किया। इन वैज्ञानिक साक्ष्यों से दोनों आरोपियों की संलिप्तता साबित हुई।
आरोपियों ने जाँच भटकाने की क्या कोशिश की?
आरोपियों ने हत्या के बाद गाड़ी के शीशे पर एक और फायर किया ताकि घटना को अलग रूप दिया जा सके और अन्य लोगों को फंसाया जा सके। तमंचा वीरेंद्र यादव को छिपाने के लिए दे दिया गया, जो बाद में झाड़ियों से बरामद हुआ।
इस मामले में कौन-सी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है?
पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की विवेचना आजमगढ़ पुलिस द्वारा जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले