उज्जैन: श्रावण दशमी पर महाकाल का भव्य शृंगार — भांग, त्रिनेत्र, चांदी के मुकुट और मुंड माला से सजे बाबा
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 22 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष दशमी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर बाबा को भांग, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिनेत्र, चांदी के मुकुट और मुंड माला से विशेष रूप से सजाया गया। दर्शन के लिए हज़ारों श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध हो गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों के घोष के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।
भस्म आरती का विधान
परंपरा के अनुसार, महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई, जिसके बाद मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
श्रद्धालुओं की आस्था
भस्म आरती के दर्शन के लिए पुरुष श्रद्धालुओं को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही दर्शन हुए, घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
विशेष शृंगार का महत्व
श्रावण मास में महाकाल का शृंगार विशेष रूप से भव्य होता है। इस बार भांग से सजावट, चंद्रमा का प्रतीक, त्रिपुंड और त्रिनेत्र का अंकन, तथा चांदी के मुकुट व मुंड माला से किया गया विशेष शृंगार भगवान शिव के रुद्र स्वरूप का प्रतीक है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
श्रावण माह में उज्जैन की पावन नगरी में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से भक्त यहाँ पहुँचते हैं।