बड़ा मंगल 2025: हनुमानगढ़ी में भोर से उमड़े श्रद्धालु, प्रयागराज में 3 कुंतल आम-सेब से भव्य श्रृंगार
सारांश
मुख्य बातें
ज्येष्ठ मास के चौथे मंगलवार बड़ा मंगल के पावन अवसर पर अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर में मंगलवार, 26 मई को भोर होते ही हज़ारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जय श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा, जबकि प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में विशेष सामग्री से भव्य श्रृंगार किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रयागराज स्थित बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलवीर गिरि महाराज ने बताया कि इस वर्ष श्रृंगार विशेष रूप से भव्य रहा। उन्होंने कहा, तीन कुंतल आम, तीन कुंतल सेब, लगभग 5,000 लच्छी मोंगरा के फूल, दो कुंतल गेंदा और एक कुंतल हरे आम के पत्तों से हनुमान जी महाराज का श्रृंगार किया गया।
इसके अतिरिक्त रुद्र शुक्त से महाभिषेक और महाआरती संपन्न हुई। सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ जारी रहा तथा संध्याकाल में श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन रखा गया।
धार्मिक महत्व और मान्यताएँ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल अथवा बुढ़वा मंगल कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इसी माह के मंगलवार को भगवान श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान का प्रथम मिलन हुआ था, जिससे इन दिनों हनुमान जी की उपासना का विशेष महत्व है।
भक्तों की आस्था है कि बड़े मंगल पर की गई साधना संकटों का नाश करती है, मंगल दोष दूर होता है और शारीरिक-मानसिक बल की प्राप्ति होती है।
नौतपा और गंगा दशहरा का संगम
महंत बलवीर गिरि महाराज ने बताया कि इस समय गंगा दशहरा और नौतपा का पर्व भी साथ-साथ चल रहा है, जिससे इस काल का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पवनदेव के पुत्र होने के नाते हनुमान जी के बारे में मान्यता है कि वे भीषण गर्मी में भी शीतलता और राहत प्रदान करते हैं। इसी कारण नौतपा की तपन में भी उनसे सबको शीतलता देने की विशेष प्रार्थना की जा रही है।
आम जनता पर असर
अयोध्या और प्रयागराज दोनों शहरों में श्रद्धालुओं की भारी आवक के कारण मंदिर परिसरों के आसपास भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतज़ाम किए गए। भक्त भोर से ही पंक्तियों में खड़े होकर दर्शन कर रहे हैं, और पूरे इलाके में धार्मिक उत्साह का माहौल है।
क्या होगा आगे
ज्येष्ठ मास में अभी और मंगलवार शेष हैं, और प्रत्येक बड़ा मंगल पर इसी प्रकार के आयोजन होते रहेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार आगामी मंगलवारों पर भी विशेष पूजा-अर्चना और श्रृंगार का कार्यक्रम निर्धारित है।