प्रताप बाजवा का AAP विधायकों के BJP में जाने पर तंज: 'कांग्रेस की बस भरी है, BJP में सीट और विटामिन M मिलती है'
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 4 नवंबर 2026 को संगरूर में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलों पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस के पास दूसरे दलों से आने वाले विधायकों के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि पार्टी की 'बस पहले से भरी हुई है।'
बाजवा का व्यंग्य: 'खाली बस में ही सवारी जाएगी'
बाजवा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, 'पहली बात तो यह है कि हमारे पास जगह ही खाली नहीं है। ग्रामीण पंजाब में BJP का कोई विधायक नहीं है। उन्हें विधायकों की जरूरत है और वहाँ जगह खाली है। हमारी बस भरी हुई है। जहाँ खाली बस होगी, सवारियाँ उसी में जाएंगी। इस सामान को हम लेना भी नहीं चाहते, क्योंकि यह कबाड़ है।'
उन्होंने आगे कहा कि इन नेताओं की माँगें भी 'अलग किस्म की' हैं — वे पार्टी की गाड़ी में जगह भी चाहते हैं और साथ में 'किराया' भी। बाजवा ने आरोप लगाया कि केवल BJP ही ऐसे नेताओं को सीट के साथ 'विटामिन M' यानी धन की सुविधा दे सकती है, कांग्रेस यह नहीं कर सकती।
भगवंत मान सरकार पर हमला
बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पंजाब के लोगों का है। उनके अनुसार, AAP सरकार ने जनता के साथ धोखा किया है — लोगों ने पार्टी को एक मौका दिया, लेकिन अब महसूस हो रहा है कि न तो आम नागरिकों की जिंदगी सुरक्षित है, न कारोबार और परिवारों का भविष्य।
बाजवा ने राज्य में युवाओं के बड़े पैमाने पर विदेश पलायन का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, आर्थिक रूप से सक्षम परिवार बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेज रहे हैं, जबकि कमजोर तबके के युवा नशे की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे के कारण पंजाब की युवा पीढ़ी का भविष्य खतरे में पड़ रहा है।
कांग्रेस को 'एकमात्र विकल्प' बताया
बाजवा ने मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस को पंजाब के लिए 'एकमात्र व्यवहारिक राजनीतिक विकल्प' करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी, शिक्षित और प्रशासनिक दक्षता रखने वाले नेताओं की टीम है। पंजाब अब किसी नए राजनीतिक प्रयोग का जोखिम नहीं उठा सकता।
बाजवा ने राहुल गांधी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य 2029 में केंद्र और पंजाब दोनों में सत्ता में आना है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और प्रताप सिंह कैरों के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में भाखड़ा बाँध, सिंचाई व्यवस्था और पंजाब विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं की नींव रखी गई थी, जिन्होंने राज्य की तरक्की में अहम भूमिका निभाई।
व्यापार और सीमापार मार्गों की वकालत
बाजवा ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े पारंपरिक व्यापार मार्गों को फिर से खोलने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब के उद्योग, कारोबार और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। उनके अनुसार, पंजाब को केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल की ज़रूरत है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब में AAP के कुछ विधायकों के BJP के निकट जाने की चर्चाएँ तेज हैं। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, लेकिन कथित तौर पर पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत मिल रहे हैं। पंजाब की राजनीतिक दिशा आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगी।