13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु में बकरीद पर मस्जिदों-ईदगाहों में उमड़े हजारों नमाजी, शांतिपूर्ण माहौल में मनाई ईद-उल-अजहा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु में बकरीद पर मस्जिदों-ईदगाहों में उमड़े हजारों नमाजी, शांतिपूर्ण माहौल में मनाई ईद-उल-अजहा

सारांश

तमिलनाडु में बकरीद का पर्व इस बार भी सामुदायिक एकता का प्रतीक बना। चेन्नई के दर्जनों इलाकों से लेकर तिरुनेलवेली के मेलापालयम तक, मस्जिदों और ईदगाहों में हजारों नमाजियों ने ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की और कुर्बानी का मांस गरीबों में बाँटा।

मुख्य बातें

28 मई 2026 को तमिलनाडु भर में बकरीद (ईद-उल-अजहा) श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
चेन्नई के पेरंबूर, रोयापुरम, पुरसावक्कम, अन्ना नगर सहित कई इलाकों में विशेष ईद नमाज का आयोजन हुआ।
तिरुनेलवेली के मेलापालयम क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नमाज में शामिल हुए।
कुर्बानी के बाद मांस का बड़ा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में वितरित किया गया।
तमिलनाडु प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के साथ त्योहार को शांतिपूर्वक संपन्न कराया।

तमिलनाडु में 28 मई 2026 को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व श्रद्धा, उत्साह और सामुदायिक एकता के साथ मनाया गया। राज्यभर की मस्जिदों, खुले मैदानों और स्टेडियमों में हजारों नमाजियों ने विशेष ईद की नमाज अदा की। चेन्नई से लेकर तिरुनेलवेली तक, हर कोने में बकरीद का उल्लास देखने को मिला।

त्योहार का महत्व और पृष्ठभूमि

बकरीद इस्लामी कैलेंडर के महीने जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। यह पर्व पैगंबर इब्राहिम की उस अटूट आस्था की स्मृति में है, जिसमें उन्होंने खुदा के आदेश पर अपने पुत्र की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। इस्लामी परंपरा में यह त्याग, करुणा और ईश्वर-भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

नमाज के बाद परिवारों ने पारंपरिक कुर्बानी की रस्म अदा की, जिसमें बकरों, मवेशियों और अन्य अनुमत पशुओं की कुर्बानी दी गई। इस्लामी परंपरा के अनुसार कुर्बानी के मांस का एक बड़ा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में वितरित किया गया, शेष रिश्तेदारों और पड़ोसियों में बाँटा गया।

चेन्नई में उत्सव का माहौल

चेन्नई के पेरंबूर, ओटेरी, रोयापुरम, पुरसावक्कम, अन्ना नगर, आइस हाउस, वाशरमेनपेट, टोंडियारपेट और कोडुंगैयूर सहित दर्जनों इलाकों में बकरीद का पर्व बड़े उत्साह से मनाया गया। नए पारंपरिक परिधान पहने पुरुष, महिलाएँ और बच्चे सुबह से ही नमाज स्थलों पर एकत्र होने लगे। नमाज की समाप्ति के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाइयाँ दीं।

तिरुनेलवेली और अन्य जिलों में भी जोश

तिरुनेलवेली जिले के मुस्लिम बहुल मेलापालयम क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नमाज के लिए जमा हुए। राज्य के अन्य जिलों में भी मस्जिदों और खुले स्टेडियमों में विशेष नमाज का आयोजन हुआ, जहाँ हर उम्र के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की तैयारी

तमिलनाडु प्रशासन ने त्योहार को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए। नमाज स्थलों के आसपास कड़ी सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की गई थी। राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने इस अवसर पर शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

धार्मिक संदेश और सामाजिक सौहार्द

धार्मिक विद्वानों ने अपने संबोधनों में बकरीद के मूल मूल्यों — त्याग, करुणा, दान और सामाजिक एकता — पर जोर दिया। देश में शांति, समृद्धि और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए विशेष दुआएँ भी की गईं। यह पर्व एक बार फिर तमिलनाडु की बहुधर्मी सामाजिक संरचना की मिसाल बना।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि सार्वजनिक उत्सवों के दौरान प्रशासनिक तैयारी और सामुदायिक नेतृत्व की भूमिका कितनी अहम होती है। धार्मिक विद्वानों का सौहार्द और दान पर जोर केवल रस्मी नहीं — यह उस सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करता है जो विविधता में एकता की नींव है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर भीड़ के दृश्यों तक सिमट जाती है; असली खबर यह है कि कुर्बानी के मांस का वितरण एक अनौपचारिक सामाजिक सुरक्षा जाल का काम करता है, जो हाशिये पर खड़े परिवारों तक पहुँचता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बकरीद (ईद-उल-अजहा) क्यों मनाई जाती है?
बकरीद पैगंबर इब्राहिम की उस आस्था की स्मृति में मनाई जाती है, जिसमें उन्होंने खुदा के आदेश पर अपने पुत्र की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। यह इस्लामी कैलेंडर के महीने जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाई जाती है और त्याग, करुणा व ईश्वर-भक्ति का प्रतीक है।
तमिलनाडु में बकरीद 2026 कहाँ-कहाँ मनाई गई?
चेन्नई के पेरंबूर, ओटेरी, रोयापुरम, पुरसावक्कम, अन्ना नगर, आइस हाउस, वाशरमेनपेट, टोंडियारपेट और कोडुंगैयूर सहित दर्जनों इलाकों में बकरीद मनाई गई। तिरुनेलवेली के मेलापालयम और राज्य के अन्य जिलों में भी मस्जिदों व स्टेडियमों में विशेष नमाज हुई।
बकरीद पर कुर्बानी का मांस कैसे बाँटा जाता है?
इस्लामी परंपरा के अनुसार कुर्बानी के मांस का एक बड़ा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में वितरित किया जाता है, शेष रिश्तेदारों और पड़ोसियों में बाँटा जाता है। यह परंपरा सामाजिक समानता और दान के मूल्यों को व्यावहारिक रूप देती है।
तमिलनाडु प्रशासन ने बकरीद के लिए क्या इंतजाम किए?
तमिलनाडु प्रशासन ने नमाज स्थलों पर कड़ी सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की। नेताओं ने शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की और त्योहार शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
बकरीद पर धार्मिक विद्वानों ने क्या संदेश दिया?
धार्मिक विद्वानों ने त्याग, करुणा, दान और सामाजिक सौहार्द के मूल्यों पर जोर दिया। देश में शांति और समृद्धि के लिए विशेष दुआएँ भी की गईं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले