28 जुलाई 2026
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बरेली तूफान में 25 वर्षीय युवक की मौत, परिवार को ₹4 लाख मुआवजा; DM अविनाश सिंह ने दिए सख्त निर्देश

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बरेली तूफान में 25 वर्षीय युवक की मौत, परिवार को ₹4 लाख मुआवजा; DM अविनाश सिंह ने दिए सख्त निर्देश

सारांश

बरेली में 80-90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आई आंधी ने एक युवक की जान ली और 250 से अधिक बिजली खंभे गिरा दिए। DM अविनाश सिंह ने 24 घंटे में मुआवजे और राहत के निर्देश दिए — लेकिन किसानों के लिए आम की फसल की तबाही बड़ा झटका है।

मुख्य बातें

बरेली में 12 जून 2026 को 80-90 किमी/घंटे की रफ्तार से आई आंधी-बारिश ने भारी तबाही मचाई।
तूफान में 25 वर्षीय युवक की मौत; परिवार को ₹4 लाख मुआवजा दिया गया।
जिले में 250 से अधिक बिजली खंभे और लाइनें गिरीं, शहरी क्षेत्र में अकेले 100 खंभे धराशायी।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने 24 घंटे के भीतर मुआवजा वितरण और राहत में लापरवाही न बरतने के सख्त निर्देश दिए।
पकी आम की फसल को भारी नुकसान; धान की रोपाई के लिए बारिश को किसान फायदेमंद मान रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 12 जून 2026 को आई भीषण आंधी और मूसलाधार बारिश ने व्यापक तबाही मचाई, जिसमें एक 25 वर्षीय युवक की जान चली गई। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने पुष्टि की कि मृतक के परिवार को ₹4 लाख का मुआवजा प्रदान कर दिया गया है। पूरे जिले में बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और जगह-जगह पेड़ व खंभे गिरने से भारी क्षति दर्ज की गई।

तूफान की तीव्रता और नुकसान का आकलन

जिलाधिकारी अविनाश सिंह के अनुसार, पिछले दो दिनों में बरेली में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। गुरुवार को तेज बारिश ने स्थिति और गंभीर कर दी। जिले भर में 250 से अधिक बिजली खंभे और लाइनें धराशायी हो गईं, जिनमें अकेले शहरी क्षेत्र में करीब 100 खंभे गिरे। इससे शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक घंटों बिजली आपूर्ति ठप रही।

प्रशासन की तैयारी और राहत कार्य

जिलाधिकारी ने बताया कि 'सचेत' ऐप के माध्यम से पहले ही खराब मौसम की चेतावनी मिल जाने से प्रशासन ने अग्रिम तैयारी कर ली थी और तूफान के दौरान हाई अलर्ट पर रहा। बिजली विभाग ने भी शुरुआत में ही आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय कर दी थी, जिससे कई इलाकों में समय रहते बिजली बहाल की जा सकी।

अविनाश सिंह ने सभी अधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत कार्यों की निगरानी करने और नुकसान का आकलन कर 24 घंटे के भीतर मुआवजा वितरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

किसानों पर असर: आम को नुकसान, धान को राहत

तूफान और बारिश का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा। पकने के लिए तैयार आम की फसल टूटकर गिर पड़ी, जिससे किसानों की आमदनी पर सीधी चोट पड़ी। वहीं, दूसरी ओर धान की रोपाई के लिए तैयार खेतों में पानी भर जाने से सिंचाई की जरूरत खत्म हो गई — प्रगतिशील किसान इस बारिश को धान की फसल के लिए फायदेमंद मान रहे हैं। पेड़ और खंभे गिरने से यातायात भी कई घंटों तक बाधित रहा।

आगे की स्थिति

प्रशासन की ओर से नुकसान का व्यापक सर्वेक्षण जारी है और प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने की प्रक्रिया चल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई जिले मानसून-पूर्व की तेज आंधियों की चपेट में हैं और आपदा प्रबंधन तंत्र की तत्परता पर सवाल उठ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 250 से अधिक खंभों का एक ही तूफान में गिरना बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरी को उजागर करता है। सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग की 'पहले से तैयारी' महज़ आपातकालीन प्रतिक्रिया थी या दीर्घकालिक मज़बूती की कोई योजना भी है। उत्तर प्रदेश में मानसून-पूर्व की आंधियों से हर साल जान-माल का नुकसान होता है — एकमुश्त मुआवजा समस्या का समाधान नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचे में स्थायी निवेश ज़रूरी है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बरेली तूफान में किसकी मौत हुई और परिवार को कितना मुआवजा मिला?
बरेली में 12 जून 2026 को आई भीषण आंधी से संबंधित घटना में एक 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने पुष्टि की कि मृतक के परिवार को ₹4 लाख का मुआवजा प्रदान किया गया है।
बरेली में तूफान कितना तेज था और क्या नुकसान हुआ?
बरेली में दो दिनों तक 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। इससे जिले भर में 250 से अधिक बिजली खंभे और लाइनें गिर गईं, शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली आपूर्ति घंटों ठप रही और यातायात बाधित हुआ।
प्रशासन ने तूफान से पहले क्या तैयारी की थी?
'सचेत' ऐप के माध्यम से खराब मौसम की अग्रिम चेतावनी मिलने पर प्रशासन ने पहले से तैयारी कर ली थी और तूफान के दौरान हाई अलर्ट पर रहा। बिजली विभाग ने भी आपातकालीन टीमें तैनात की थीं, जिससे कई इलाकों में समय रहते बिजली बहाल हो सकी।
तूफान से किसानों पर क्या असर पड़ा?
पकने के लिए तैयार आम की फसल टूटकर गिर पड़ी, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ। हालाँकि, धान की रोपाई के लिए तैयार खेतों में बारिश का पानी भरने से सिंचाई की जरूरत खत्म हुई और प्रगतिशील किसान इसे धान के लिए लाभकारी मान रहे हैं।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने राहत कार्यों के लिए क्या निर्देश दिए?
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सभी अधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत कार्यों की निगरानी करने और नुकसान का आकलन कर 24 घंटे के भीतर मुआवजा वितरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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