बहबल कलां फायरिंग SIT पर रोमाना का वार: 'कांग्रेस-AAP हर चुनाव से पहले उठाती हैं यह मुद्दा'
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल के नेता परमबंस सिंह रोमाना ने 4 जुलाई को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बहबल कलां फायरिंग मामले की नई एसआईटी जाँच को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दल पिछले 10 वर्षों से इस मुद्दे पर केवल राजनीति करते आए हैं और सच सामने लाने की उनकी कोई वास्तविक मंशा कभी नहीं रही।
मुख्य आरोप: राजनीतिक इस्तेमाल का पैटर्न
रोमाना ने कहा कि बेअदबी और बहबल कलां का यह मुद्दा हर चुनाव से ठीक पहले उभारा जाता है और चुनाव समाप्त होते ही ठंडे बस्ते में चला जाता है। उन्होंने 2019 के चुनाव और उससे पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सिलसिला नया नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि बीते 11 वर्षों में कई एसआईटी गठित की गईं, फिर भी कोई ठोस निष्कर्ष सामने क्यों नहीं आया। उनके अनुसार, यदि जाँच वास्तव में निष्पक्ष होती तो AAP नेताओं के नाम सामने आते, इसीलिए सच छिपाया गया।
चालान और जाँच पर सवाल
रोमाना ने बताया कि इस मामले में अब तक चार चालान पेश किए जा चुके हैं, जिनमें से तीन चालान पूर्व IPS अधिकारी कुंवर विजय प्रताप की ओर से पेश किए गए। उन्होंने प्रश्न किया कि इन चारों चालानों में किसी भी अकाली नेता या कार्यकर्ता का नाम क्यों नहीं आया, यदि उनकी कोई संलिप्तता होती।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आखिरी चालान 2 अप्रैल 2021 को पेश हुआ था। उनके शब्दों में, 'साढ़े पाँच वर्ष बीत गए — क्या सरकार सो रही थी? जब चुनाव आता है तो यह मामला उठा लिया जाता है।'
भगवंत मान वीडियो विवाद
रोमाना ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े एक वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने 'बेअदबी' से जोड़ा। उनके अनुसार, वीडियो की जाँच में वह असली पाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीडियो के बचाव में एक फर्जी रिपोर्ट तैयार करने की कोशिश की गई, जिसमें शामिल लोगों को पकड़ लिया गया और धारा 164 के तहत न्यायालय के समक्ष उनके बयान दर्ज कराए गए।
रोमाना ने कहा कि इस विवाद से घिरे भगवंत मान ने ध्यान भटकाने के लिए बहबल कलां SIT का 'नया एंगल' सामने रखा है।
आगे क्या
यह ताज़ा बयानबाज़ी पंजाब में आगामी चुनावी माहौल की पृष्ठभूमि में आई है, जहाँ बेअदबी और बहबल कलां फायरिंग मामला वर्षों से एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। अकाली दल, कांग्रेस और AAP तीनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।