भारत-अल्जीरिया संयुक्त आयोग की पहली बैठक: रक्षा सहयोग विस्तार पर सहमति, 'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' पर हस्ताक्षर

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भारत-अल्जीरिया संयुक्त आयोग की पहली बैठक: रक्षा सहयोग विस्तार पर सहमति, 'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' पर हस्ताक्षर

सारांश

भारत और अल्जीरिया के बीच रक्षा सहयोग ने एक नया अध्याय शुरू किया — नई दिल्ली में संयुक्त आयोग की पहली बैठक में 'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' पर हस्ताक्षर हुए। 2024 के MoU के बाद यह सबसे ठोस कदम है, जो सैन्य प्रशिक्षण से लेकर रक्षा उद्योग तक सहयोग का रास्ता खोलता है।

मुख्य बातें

5 मई 2025 को नई दिल्ली में भारत-अल्जीरिया संयुक्त आयोग की पहली बैठक आयोजित हुई।
दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, चिकित्सा और रक्षा उद्योग सहयोग के विस्तार पर सहमति जताई।
रक्षा सहयोग की निगरानी के लिए 'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर हुए।
बैठक की सह-अध्यक्षता अमिताभ प्रसाद (भारत) और मेजर जनरल क़ैद नूर उद्दीन (अल्जीरिया) ने की।
यह बैठक 2024 में हस्ताक्षरित रक्षा MoU और जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अगस्त 2024 की अल्जीरिया यात्रा के बाद की कड़ी है।

भारत और अल्जीरिया ने 5 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त आयोग की पहली बैठक में सैन्य प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, चिकित्सा और रक्षा उद्योगों सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के विस्तार पर सहमति जताई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस ऐतिहासिक बैठक में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए 'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' पर भी हस्ताक्षर किए।

बैठक का स्वरूप और सह-अध्यक्षता

इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद और अल्जीरिया की ओर से नौसेना चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल क़ैद नूर उद्दीन ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' का महत्व

आपसी सहमति से तैयार किया गया यह ढाँचा भविष्य में संयुक्त आयोग की बैठकों और सहयोगी गतिविधियों के संचालन के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज़ के रूप में कार्य करेगा। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह दस्तावेज़ 2024 में हस्ताक्षरित रक्षा समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद उठाया गया सबसे ठोस कदम है। गौरतलब है कि उस समझौते के बाद से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय दौरों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

अल्जीरियाई नौसेना प्रमुख का दौरा

बैठक से पूर्व मेजर जनरल क़ैद नूर उद्दीन ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारतीय शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। अल्जीरियाई प्रतिनिधिमंडल अपनी भारत यात्रा के दौरान भारत के प्रमुख रक्षा उद्योगों के साथ भी संवाद करेगा, जिससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र में नए सहयोग के अवसर खुलने की संभावना है।

पृष्ठभूमि: जनरल द्विवेदी की अल्जीरिया यात्रा

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक की नींव पिछले वर्ष तब रखी गई जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 25 से 28 अगस्त के बीच अल्जीरिया का आधिकारिक दौरा किया था। उस यात्रा के दौरान आर्मी-टू-आर्मी सहयोग को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने तथा रक्षा उद्योग में नए अवसर तलाशने पर विशेष ज़ोर दिया गया था। जनरल द्विवेदी ने अपने दौरे में अल्जीरिया के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व से मुलाकात की थी।

आगे की राह

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक भारत-अल्जीरिया रक्षा साझेदारी को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में अपनी साझेदारी को व्यापक रूप से मज़बूत कर रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग सहयोग के नए कार्यक्रम शुरू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — 'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' एक प्रशासनिक ढाँचा है, न कि बाध्यकारी प्रतिबद्धता। यह ऐसे समय में आई है जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ रक्षा कूटनीति को रणनीतिक रूप से विस्तार दे रहा है, और अल्जीरिया उत्तरी अफ्रीका में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन सकता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि भारत के कई ऐसे रक्षा MoU वर्षों तक ठोस परिणाम नहीं दे पाए। इस साझेदारी की विश्वसनीयता तब सिद्ध होगी जब संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग अनुबंध ज़मीन पर उतरेंगे।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अल्जीरिया संयुक्त आयोग की पहली बैठक कब और कहाँ हुई?
यह बैठक 5 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी शामिल रहे।
'रूल्स ऑफ प्रोसीजर' दस्तावेज़ क्या है और इसका क्या महत्व है?
यह आपसी सहमति से तैयार एक ढाँचागत दस्तावेज़ है जो भविष्य में संयुक्त आयोग की बैठकों और सहयोगी गतिविधियों के संचालन के लिए मार्गदर्शक का काम करेगा। यह 2024 के रक्षा MoU के बाद उठाया गया सबसे ठोस प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
भारत और अल्जीरिया के बीच रक्षा MoU कब हस्ताक्षरित हुआ था?
दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता ज्ञापन (MoU) वर्ष 2024 में हस्ताक्षरित हुआ था। इसके बाद से उच्चस्तरीय दौरों और द्विपक्षीय सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अल्जीरिया का दौरा कब किया था?
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 25 से 28 अगस्त 2024 के बीच अल्जीरिया का आधिकारिक दौरा किया था। उस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्मी-टू-आर्मी सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श और रक्षा उद्योग में नए अवसर तलाशना था।
इस बैठक से भारत को क्या रणनीतिक लाभ होगा?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अल्जीरिया उत्तरी अफ्रीका में भारत के रक्षा और कूटनीतिक विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार है। इस बैठक से सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और रक्षा उद्योग सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे, जो भारत की 'अफ्रीका आउटरीच' रणनीति को मज़बूती देंगे।
राष्ट्र प्रेस
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