विश्व नारियल दिवस 2026: शिवराज सिंह चौहान बोले — नारियल संस्कृति, आस्था और किसान समृद्धि का प्रतीक
सारांश
मुख्य बातें
विश्व नारियल दिवस के अवसर पर 2 सितंबर को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत में नारियल महज एक फल नहीं, बल्कि संस्कृति, आस्था, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने देशभर के नारियल उत्पादक किसानों को हार्दिक बधाई देते हुए इस फसल के बहुआयामी महत्व को रेखांकित किया।
मंत्री चौहान का संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, 'भारतीय संस्कृति में नारियल का विशेष महत्व है। इसे अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक उत्सवों, पूजा-पाठ एवं विभिन्न शुभ कार्यों व मांगलिक अवसरों में नारियल समर्पित किया जाता है।' उन्होंने आगे कहा कि मिठाइयों, विभिन्न व्यंजनों और अन्य उत्पादों में नारियल का व्यापक उपयोग होता है तथा किसानों की अथक मेहनत से इसका उत्पादन, निर्यात और व्यापार निरंतर बढ़ रहा है।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने भी विश्व नारियल दिवस पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नारियल प्रकृति का अनूठा वरदान है, जो पूजा-पाठ के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहद उपयोगी है।
भाजपा विधायक अजय सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि विश्व नारियल दिवस नारियल के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इसकी अहमियत उजागर करने और इस फसल की ओर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
भाजपा नेता गोपाल चतुर्वेदी ने किसानों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, 'नारियल ऐसा फल है जो हमारे जीवन से बहुत गहराई से जुड़ा है। धार्मिक रीति-रिवाजों के अलावा अब ये रोज़गार का भी बड़ा साधन है। इसे श्रीफल भी कहा जाता है, इसलिए कि ये 'श्री' बढ़ाता है।'
किसानों की आजीविका का आधार
केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में लाखों किसान नारियल की खेती पर निर्भर हैं। नारियल से तेल, दूध, पानी, खोपरा और कॉयर जैसे कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार होते हैं, जिनकी देश-विदेश में भारी माँग है।
सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व
नारियल को भारतीय परंपरा में 'श्रीफल' के नाम से जाना जाता है — यह नाम ही इसके सांस्कृतिक गौरव को परिभाषित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर ज़ोर दे रही है। नारियल उत्पादों का निर्यात इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार नारियल आधारित उद्योगों में और अधिक निवेश तथा प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से तटीय राज्यों के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। नारियल विकास बोर्ड और राज्य सरकारों की साझेदारी से इस क्षेत्र को और सशक्त बनाने की संभावनाएँ प्रबल हैं।