भोपाल: आयुष्मान भारत में फर्जी कर्मचारियों से एनरोलमेंट, EOW जांच में करौंद अस्पताल की बड़ी धोखाधड़ी उजागर
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल के करौंद इलाके में स्थित एक निजी अस्पताल संचालक ने आयुष्मान भारत योजना में पंजीकरण कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर कर्मचारियों की संख्या तीन गुना फुलाकर दर्ज की — यह गंभीर धोखाधड़ी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में उजागर हुई है। 5 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस मामले में EOW के सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में वास्तव में केवल 15 कर्मचारी हैं, जबकि पोर्टल पर 45 कर्मचारियों और चिकित्सकों की संख्या दर्ज की गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
जांच में यह तथ्य सामने आया कि अस्पताल के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज 45 नाम दरअसल केवल 15 कर्मचारियों के नाम कई-कई बार दोहराकर बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, सूत्रों के मुताबिक इन कर्मचारियों के नाम के साथ दर्ज संपर्क नंबर अस्पताल के संचालक का बताया जा रहा है।
EOW ने जब अस्पताल प्रबंधन से नियुक्ति पत्र, वेतन विवरण और उपस्थिति रिकॉर्ड माँगे, तो प्रबंधन इन दस्तावेज़ों को प्रस्तुत करने में विफल रहा। आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने के लिए किसी भी अस्पताल को निर्धारित संख्या में चिकित्सक एवं सहायक स्टाफ रखना अनिवार्य होता है।
फर्जी चिकित्सकों का मामला
जांच का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि अस्पताल की सूची में दर्ज कई चिकित्सकों के नाम अन्य अस्पतालों की सूचियों में भी मौजूद हैं। EOW ने जब इन चिकित्सकों से संपर्क किया, तो उन्होंने संबंधित अस्पताल से किसी भी प्रकार का संबंध होने से सीधे इनकार कर दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें आयुष्मान भारत के दुरुपयोग पर नकेल कसने की कोशिश कर रही हैं। गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब मध्य प्रदेश में किसी निजी अस्पताल पर इस योजना में फर्जीवाड़े का आरोप लगा हो।
बिना लाइसेंस पैथोलॉजी संचालन
सूत्रों के अनुसार, इस अस्पताल में पैथोलॉजी सेवाएँ संचालित की जा रही हैं, जबकि उसके पास इसके लिए वैध लाइसेंस तक नहीं है। और भी गंभीर बात यह है कि जिस चिकित्सक के हस्ताक्षर और मुहर से पैथोलॉजी रिपोर्टें जारी की जाती हैं, उस चिकित्सक ने स्वयं यह स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि वे रिपोर्टें उनके द्वारा हस्ताक्षरित हैं। यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी, बल्कि मरीज़ों की सुरक्षा पर भी सीधा सवाल खड़ा करता है।
आम जनता पर असर
आयुष्मान भारत योजना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को मुफ्त इलाज का अधिकार देती है। यदि ऐसे अस्पताल फर्जी कागज़ातों के आधार पर योजना में शामिल होते हैं, तो इससे न केवल सरकारी कोष का नुकसान होता है, बल्कि पात्र मरीज़ों को भी घटिया या असुरक्षित चिकित्सा सेवाएँ मिलने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या होगा आगे
EOW की जांच जारी है और अस्पताल संचालक के विरुद्ध कार्रवाई की संभावना बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी इस मामले में फर्जी दस्तावेज़ीकरण, अनधिकृत पैथोलॉजी संचालन और चिकित्सकों की फर्जी संबद्धता — तीनों पहलुओं पर एक साथ जांच कर रही है। आगामी दिनों में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज होने की उम्मीद है।